राज्यसभा ने बुधवार को विपक्ष के वॉकआउट के बीच ध्वनि मत से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। विधेयक को गुरुवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सीएपीएफ विधेयक को केंद्रीय बलों का मनोबल तोड़ने का प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र में उनकी पार्टी की सरकार आने पर पर इस प्रस्तावित कानून को समाप्त किया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है CAPF बिल और क्यों इस पर मचा है राजनीतिक घमासान?
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 में प्रावधान है कि सीएपीएफ में आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति के लिए, 50 प्रतिशत पद महानिरीक्षक (IG) रैंक में प्रतिनियुक्ति (Deputation) द्वारा और न्यूनतम 67 प्रतिशत पद अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) रैंक में प्रतिनियुक्ति द्वारा भरे जाएंगे।
यह प्रस्तावित विधेयक अक्टूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र की उस याचिका को खारिज करने के बाद आया है जिसमें 2025 के अपने फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी। उस फैसले में निर्देश दिया गया था कि सीएपीएफ में वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) स्तर तक आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए और 6 महीने के भीतर कैडर समीक्षा करने का आदेश दिया गया था।
CAPF बिल में क्या है?
इसके तहत IG स्तर पर 50% पद IPS अधिकारियों के लिए, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) स्तर पर न्यूनतम 67% पदों पर IPS की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा ‘स्पेशल डीजी’ और ‘डीजी’ के सभी पद IPS अधिकारियों हेतु आरक्षित किए जाएंगे और ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों की सेवा शर्तों के लिए एक सिंगल लीगल फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह विधेयक प्रशासनिक स्पष्टता लाएगा, मुकदमों की संख्या कम करेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर अनुभवी नेतृत्व लाएगा।
CAPF के विभागीय अधिकारी कर रहे विधेयक का विरोध
वहीं, प्रस्तावित कानून का CAPF के विभागीय अधिकारियों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। उनका कहना है कि शीर्ष पदों के आरक्षित होने से कैडर अधिकारियों के करियर में ठहराव आता है और उच्च पदों से वंचित रखे जाने के कारण भेदभाव की भावना उत्पन्न होती है। साथ ही आलोचकों का तर्क है कि यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई OGAS की भावना और निर्देशों के विपरीत है।
राहुल बोले- सरकार बनते ही खत्म कर देंगे
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक को केंद्रीय बलों का मनोबल तोड़ने का प्रयास करार दिया और कहा कि केंद्र में उनकी पार्टी की सरकार आने पर पर इस प्रस्तावित कानून को समाप्त किया जाएगा। उन्होंने एक वीडियो जारी कर यह दावा भी किया कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 को उस दिन लोकसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए लाया गया है, जिस दिन वह असम के चुनावी दौरे पर हैं।
राहुल ने कहा कि उन्होंने बुधवार को सरकार से आग्रह किया था कि वह इस विधेयक पर सदन में बोलना चाहते हैं, ऐसे में इसे पारित करवाने की तिथि थोड़ा आगे-पीछे कर दी जाए लेकिन सरकार नहीं चाहती कि वह इस विषय पर बोलें। लोकसभा में बृहस्पतिवार को इस विधेयक पर चर्चा होगी। राज्यसभा ने बुधवार को विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून बनने के बाद इन बलों का बेहतर प्रबंधन होगा और कार्यकुशलता बढ़ेगी।
लोकसभा में बोले अमित शाह- 15 हजार बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 30 मार्च 2026 को घोषणा की कि देश नक्सल मुक्त हो चुका है। इसके लिए उन्होंने 31 मार्च 2026 की डेडलाइन दी थी। लोकसभा में नक्सलियों के खात्मे को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। अमित शाह के निशाने पर नक्सलियों के समर्थक भी रहे। उन्होंने कहा कि इस देश में जितना पाप बंदूक थामने वालों ने किया, उतना ही इसमें भागीदार उनका समर्थन करने वाले हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
