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NRC + CAA से वाकई में है आम आदमी का नाता? समझें फैक्ट्स

What is Citizenship Amendment Act (CAA) & National Register of Citizens (NRC) and How it is related to Common Man: गृह मंत्री अमित शाह भी साफ कर चुके हैं कि इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। साथ ही इसमें धर्म का आधार नहीं होगा। हालांकि, यह साफ नहीं है कि सरकार इसे पूरे देश में लागू करने के लिए नया कानून लाएगी या नहीं।

CAA, CAB, NRC, India, Indians, Citizens of India, Assam, India, Hindu, Muslim, Jain, Sikh, Buddhist, BJP, NDA, Opposition, India News, National News, Hindi Newsदिल्ली में Jamia Milia Islamia University के बाहर रविवार को CAA के खिलाफ नारे लिखीं तख्तियां लेकर प्रदर्शन करतीं छात्राएं। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः अमित मेहरा)

What is Citizenship Amendment Act (CAA) & National Register of Citizens (NRC) and How it is related to Common Man: Citizenship Amendment Act (CAA) और National Register of Citizens (NRC) को लेकर देश में कई जगह हिंसा, विरोध प्रदर्शन, बंद और गुबार देखने को मिला। छात्रों का शुरू किया प्रदर्शन बड़े आंदोलन में तब्दील हुआ, जिसमें बड़े स्तर मुस्लिमों ने भी विरोध जाहिर किया। हालांकि, प्रदर्शनों में शामिल एक धड़ा ऐसा भी था, जिसे सीएए और एनआरसी के बारे में ढंग से पता भी न था और वे विरोध जता रहे थे।

इसी बीच, विपक्ष ने इन दोनों चीजों को मुद्दा बनाया और दावा किया ये असंवैधानिक और गलत हैं, जबकि केंद्र में BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार का दावा है कि विपक्षी दलों ने इस पर भ्रम फैलाया है, इसलिए किसी भी नागरिक को घबराने या डरने की जरूरत नहीं है। इन दोनों ही मुद्दों पर बहस और विमर्श के बीच आइए जानते हैं कि आखिर आम आदमी से इन दोनों ही चीजों का क्या नाता है?

जनता से कैसे ताल्लुक रखता है NRC?: यह इस पर निर्भर करेगा कि आप असम के निवासी हैं या नहीं। इस सूबे में फिलहाल यह प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल असम ही इकलौता राज्य है, जहां पर NRC लाया गया है। सबसे पहले इसे 1951 में तैयार किया गया था और आखिरकार इसे 2019 में अपडेट किया गया। केंद्र ने इसे पूरे देश में लागू करने का प्रस्ताव रखा है।

गृह मंत्री अमित शाह भी साफ कर चुके हैं कि इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा। साथ ही इसमें धर्म का आधार नहीं होगा। हालांकि, यह साफ नहीं है कि सरकार इसे पूरे देश में लागू करने के लिए नया कानून लाएगी या नहीं। ‘प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो’ द्वारा जारी की गई FAQ सूची में कहा गया है- राष्ट्रीय स्तर पर इसे देश भर में लागू/शुरू करने पर कोई ऐलान नहीं किया गया है। गृह मंत्री के अनुसार, “यह भारतीय नागरिकों के बीच छिपे अवैध अप्रवासियों को खोजने का तरीका है।”

2013 में सुप्रीम कोर्ट ने असम में एनआरसी अपडेट को अनिवार्य कर दिया था। असम के इतिहास को पलायन ने गढ़ा है, इसलिए वहां विरोध NRC के बजाय CAA के खिलाफ है। छह साल के जन आंदोलन के बाद 1985 में असम समझौते (Assam Accord) के तहत घोषत किया गया था- जो लोग या उनके पुरखे देश में अपनी मौजदूगी 25 मार्च 1971 के पहले दर्ज कराने की बात साबित कर सकेंगे, उन्हें भारतीय माना जाएगा। यही एनआरसी के लिए कटऑफ डेट है।

खुद/पुरखों के 1971 से पहले देश में होने के लिए 14 दस्तावेजों में ये चीजें भी हो सकती हैं-

– 1951 NRC
– 24 मार्च 1971 तक के इलेक्टोरल रोल्स
– 12 अन्य दस्तावेजों में से कुछ भी। मसलन जमीन के रिकॉर्ड, नागरिकता के प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, बोर्ड/विवि सर्टिफिकेट आदि।

असम के बाहर लागू होने पर ये देने होंगे डॉक्यूमेंट्सः PIB के अनुसार, अगर एनआरसी पूरे देश में लागू होता है, तब वोटर आईडी कार्ड/आधार कार्ड/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/इंश्योरेंस पेपर/बर्थ सर्टिफिकेट/स्कूल छोड़ने के समय वाले प्रमाण-पत्र/घर-जमीन से जुड़े कागजात जैसे दस्तावेजों से काम चल जाएगा। साथ ही माता-पिता के डॉक्यूमेंट्स देना जरूरी नहीं होगा।

मुस्लिमों के डरने पर क्या है सरकार का कहना?: एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में गृह मंत्री ने साफ किया था कि CAA, NRC से नहीं जुड़ा है। किसी भी भारतीय को डरने या घबराने की जरूरत नहीं है। और, न ही किसी को देश से बाहर किया जाएगा। भारतीय अल्पसंख्यकों के लिए केंद्र खास व्यवस्था करेगी। पर सरकार सीमा खुली भी नहीं छोड़ सकती है।

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