पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के रुझानों में बीजेपी ने टीएमसी को काफी पीछे छोड़ दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों में भी बीजेपी ने रुझानों में बहुमत का आंकड़ा छू लिया है। राज्य में पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी 77 सीटों पर जीती थी। बात अगर बीते लोकसभा चुनाव की करें तो 2019 के मुकाबले उसे बंगाल में नुकसान हुआ था। राज्य में बीजेपी की लोकसभा सीटें 18 से कम होकर 12 पर आ गई थी लेकिन इस बार बंगाल में बीजेपी ने जबरदस्त प्रदर्शन किया है। आइए आपको बताते हैं बंगाल में बीजेपी का ग्राफ बढ़ने की कुछ वजह…

समिक भट्टाचार्य को बनाया बंगाल बीजेपी चीफ

पिछले साल जुलाई में बीजेपी ने समिक भट्टाचार्य को बंगाल में बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया। यह एक अहम कदम था क्योंकि समिक भट्टाचार्य अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के जमाने से ही BJP की राजनीति कर रहे हैं। वह तब से बीजेपी में हैं, जब पश्चिम बंगाल में BJP हासिए पर थी।

समिक भट्टाचार्य को अध्यक्ष बनाए जाने से बीजेपी को फायदा हुआ। जहां पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ग्रामीण बंगाल में BJP का चेहरा थे, वहीं मृदुभाषी और फोटोग्राफी के शौकीन समिक भट्टाचार्य ने कोलकाता और सब-अर्बन बंगाल के ‘भद्रलोक’ वोटर्स के साथ जुड़ाव बनाने की कोशिश की।

टीएमसी के बाहरी वाले नैरेटिव को किया ध्वस्त

चुनाव की शुरुआत से ही बीजेपी के खिलाफ ममता बनर्जी बाहरी वाले नैरेटिव का इस्तेमाल कर रही थीं। बीते सभी चुनावों में भी टीएमसी ने बीजेपी को उत्तर भारत की पार्टी बताते हुए प्रचार किया था। दावे तो यहां तक किए गए कि बीजेपी सत्ता में आई तो बंगालियों की खाने की आदत बदल देगी।

चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी का मेजर फोकस इस नैरेटिव को ध्वस्त करना था। चुनाव के दौरान बीजेपी के नेताओं ने बार-बार इस बात पर जोर किया किया वे ऐसा कुछ नहीं करने जा रहे हैं। प्रचार के दौरान समिक भट्टाचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि बंगाल में मछली और मांस का सेवन जारी रहेगा।

पुराने नेताओं को तवज्जो दी

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसला बीजेपी ने बंगाल में साइड लाइन किए गए अपने नेताओं को लाइम लाइट में लाकर किया। इन नेताओं पर पूर्व बंगाल बीजेपी चीफ दिलीप घोष (खड़गपुर सदर से प्रत्याशी), राहुल सिन्हा (राज्यसभा भेजे गए) शामिल हैं। बीजेपी ने बंगाल में अपने कार्यकर्ताओं में यह संदेश किया कि वह चाहती है कि पुराने सभी नेता टीएमसी से लड़ाई में साथ आएं। BJP की रणनीति पीएम मोदी के मंच से उस समय नजर आई जब दिलीप घोष और तथागत रॉय एक साथ नजर आए। पीएम नरेंद्र मोदी ने तब उनमें से हर एक को बधाई दी।

जमीन पर पूरा फोकस

2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के पास जमीन पर उतनी संगठनात्मक ताकत नहीं थी। इस बार बीजेपी ने इस पर काफी काम किया था। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बंगाल में बीजेपी के बूथ लेवल नेटर्क को मजबूत किया। बीजेपी ने अपने पोलिंग एजेंट्स चुनने के लिए मौखिक और लिखित परीक्षाएं भी आयोजित कीं। इसके अलावा बीजेपी ने पिछले छह महीनों में दो बातों पर खास ध्यान दिया- एक जमीनी नेटवर्क तैयार किया और दूसरा ग्रामीण इलाकों में ‘डर के माहौल’ का मुकाबला करने और वोटर बूथ तक पहुंचे।

यह भी पढ़ें: बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम से जुड़े लाइव अपडेट्स