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अग्निपथ प्रोटेस्टः सरकार बाहुबली, लोगों को झुकना ही पड़ेगा, जानिए फौजियों के गांव में कैसे विरोध जता रहे लोग

दो साल से सेना में जाने की तैयारी कर रहे 21 साल के हरीश कुमार का कहना है कि सरकार कह रही है कि जो भी चयनित होगा उसे चार साल बाद कम से कम 11 लाख रुपये मिलेंगे। क्या मैं इतने पैसों से घर बना सकता हूं?

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अग्निपथ योजना का विरोध करते युवा(फोटो सोर्स:Express/फाइल)।

केंद्र सरकार द्वारा लाई गई अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं में विरोध देखा जा रहा है। यूपी के बुलंदशहर के सैदपुर गांव में भी विरोध देखने को मिल रहा है। दरअसल इस गांव का विरोध इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसे फौजियों का गांव भी कहते हैं। इस गांव में लगभग हर घर में बच्चे अपने दादा, पिता और भाइयों की तरह सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखते हैं।

सैदपुर गांव के प्रधान अमित सिरोही ने द इंडियन एक्सप्रेस से दावा किया कि गांव में करीब 2,000 घर हैं और इनमें से कम से कम 800 घरों में सेना में सेवा करने वाले मिल जाएंगे। अग्निपथ योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार अब इतनी सख्त है कि या तो बुलडोजर चलेगा, ये करियर खराब होगा। ये सरकार बाहुबली है, लोगों को झुकना ही पड़ेगा।

14 साल के शिव सिरोही के दादा और पिता दोनों सेना में सेवा दे चुके हैं। शिव कहना है कि मेरा सपना फौजी बनने का है। मैंने कभी दूसरे करियर के बारे में नहीं सोचा। मैं अपना स्टेमिना बढ़ाने के लिए सुबह दौड़ता हूं लेकिन नई योजना ने बहुत से लोगों को झकझोर दिया है। यहां तक ​​कि मेरे माता-पिता को भी यकीन नहीं है कि जो मेहनत हम कर रहे हैं वो सिर्फ चार साल के लायक ही है।

वहीं 17 साल के आशीष का कहना है कि हम बचपन से फौजी कल्चर में पले-बढ़े हैं। यहां हर लड़का फौजी बनना चाहता है। अब अचानक से हमारे सामने दूसरे विकल्प आ गये हैं। बता दें कि आशीष के पिता दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। आशीष का कहना है कि सेना मेरे लिए अंतिम लक्ष्य था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि उसके बाद मुझे दूसरी नौकरी की तलाश करनी पड़ेगी। लेकिन नई योजना के तहत अब अनिश्चितता का माहौल है।

दो साल से सेना में जाने की तैयारी कर रहे 21 साल के हरीश कुमार का कहना है कि सरकार कह रही है कि जो भी चयनित होगा उसे चार साल बाद कम से कम 11 लाख रुपये मिलेंगे। क्या मैं इतने पैसों से घर बना सकता हूं? जमींदार किसानों के लिए यह आसान है लेकिन हम क्या करेंगे?”

हालांकि ऐसा नहीं है कि गांव में सभी इस योजना का विरोध कर रहे हैं। 43 वर्षीय जसवीर सिरोही अग्निपथ योजना को बेरोजगारी के उपाय के रूप में देखते हैं। उनके दादा और परदादा दोनों सेना में थे। जसवीर का कहना है कि “दो साल से सेना में भर्ती नहीं हुई। नई योजना के तहत कम से कम युवा हाथ में कुछ पैसे लेकर वापस आ सकेंगे और एक छोटा व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। यह कुछ नहीं से तो बेहतर ही है।”

बता दें कि केंद्र द्वारा अग्निपथ योजना के ऐलान के साथ ही देशभर में विरोध प्रदर्शन देखे गये। इसी क्रम में यूपी के अलीगढ़ में एक पुलिस चौकी और वाहन को आग लगा दी गई। जिसको लेकर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों पर मामला दर्ज किया गया। इसमें नौ सेना कोचिंग सेंटर संचालकों को भी गिरफ्तार किया गया।

नौकरी की असुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती होने वाले जवानों में 25 फीसदी को रेग्युलर रखा जाएगा। केंद्र की नई सैन्य भर्ती स्कीम में लगभग 45,000 सैनिकों की सालाना भर्ती की जाएगी, और उनमें से केवल 25% को ही स्थायी कमीशन के तहत अगले 15 वर्षों तक सेवा देंगे।

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