भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद इस मुद्दे पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा और उसकी जगह वेनेजुएला के साथ ऊर्जा कारोबार शुरू करेगा।
हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान पर अब तक भारत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या सफाई सामने नहीं आई थी, लेकिन अब पहली बार विदेश मंत्रालय ने इस सवाल पर अपना रुख साफ कर दिया है।
रणधीर जायसवाल ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि तेल आयात के मामले में भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देता है और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला करता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि देश की 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भारत से जुड़े सभी फैसले इसी बुनियादी सोच के आधार पर लिए जाएंगे।
वेनेजुएला को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने अहम बयान दिया। जायसवाल ने कहा कि वेनेजुएला भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार रहा है। उनके मुताबिक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र के साथ पहले से ही मजबूत संबंध रहे हैं और भविष्य में भी इनके बने रहने की उम्मीद है।
रूस ने क्या बोला है?
इस पूरे विवाद पर रूस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। रूसी सरकार ने कहा है कि भारत जिसे चाहे, उससे तेल आयात करने के लिए स्वतंत्र है। रूस ने यह भी जोड़ा कि अब तक भारत सरकार ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक स्टैंड स्पष्ट नहीं किया है और न ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर कोई टिप्पणी की है।
जानकारी के लिए बता दें कि कई सालों तक भारत ने अपनी तेल की आपूर्ति ईराक और सऊदी अरब के जरिए पूरी की है। लेकिन 2023 में जब रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ, पूरी दुनिया में तेल सप्लाई बाधित हुई, चिंता भारत के लिए थी- कहीं तेल की कीमतों में भारी उछाल ना आ जाए, कहीं पेट्रोल-डीजल के दाम सातवें आसमान पर ना पहुंच जाएं।
उस समय तक भारत, रूस से ना के बराबर तेल ले रहा था, कुल आपूर्ति का 0.2 फीसदी सिर्फ वहां से आ रहा था। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद एक बड़ा शिफ्ट देखने को मिला और समय भारत का 40 फीसदी तेल रूस से आने लगा।
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