भविष्य निधि अंशदान क्या हैं नए प्रावधान

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएफ खाते को नियमों में कई तरह के बदलाव करने की घोषणा की है।

सांकेतिक फोटो।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने ईपीएफ खाते को नियमों में कई तरह के बदलाव करने की घोषणा की है। इसके तहत अगर आपने अपना पीएफ खाता और यूएएन को आधार से लिंक नहीं कराया है तो नियोक्ता आपके पीएफ में अपना योगदान नहीं दे सकेगा। इसके अलावा निकासी एवं अन्य तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए 31 अगस्त की समय सीमा तय की गई थी। अब इसे बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया गया है। हालांकि, 31 दिसंबर की तिथि का फायदा पूर्वोत्तर क्षेत्र और कुछ खास वर्ग से जुड़े लोगों को ही मिलेगा। इसके अलावा ईपीएफ ने वर्ष 2020-21 के लिए ब्याज दर भुगतान की दरें तय कर दी हैं। इसके लिए अब निकाय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। इसके मुताबिक, त्योहारों से पहले सदस्य कर्मचारियों के पीएफ खाते में 8.5 फीसद की दर से ब्याज डाला जा सकता है।

नई प्रक्रिया पूरी कर लेने से नियोक्ता का योगदान देख पाएंगे। सरकार ने ईपीएफ खाता को आधार से लिंक कराना अनिवार्य कर दिया है। इससे कई तरह के लाभ अंशधारक को मिलते हैं। खाता लिंक नहीं होने पर आपका नियोक्ता खाते में राशि नहीं डाल पाएगा। इसके अलावा आप खाते में नियोक्ता की ओर से जमा राशि का कुल योगदान भी नहीं देख पाएंगे। जरूरत पर राशि नहीं निकाल सकेंगे। आपका ईपीएफ खाता यदि आधार से लिंक नहीं है, तो ईपीएफ से किसी भी तरह की निकासी नहीं कर सकेंगे। अब किसी भी तरह की निकासी के लिए ईपीएफ खाता का आधार से लिंक होना अनिवार्य है। केवल आपके लिए ही नहीं, बल्कि आपके आश्रित के लिए यह परेशानी का सबब बन सकता है।

बेहद आसान है आधार से लिंक करना : सबसे पहले ईपीएफओ के पोर्टल पर लॉग-इन करें। इसके बाद यूएएन और आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर डालें। इसके बाद ‘क्लिक टू जनरेट ओटीपी’ पर क्लिक करें। ओटीपी डालने के बाद लिंक का चुनाव करें। इसके बाद आधार नंबर डालें और ‘आधार वेरिफिकेशन’ पर क्लिक करें। अब मोबाइल या ईमेल ‘वेरिफिकेशन आॅप्शन’ पर क्लिक करें। इसके बाद एक और ओटीपी नंबर आपके मोबाइल या ईमेल पर आएगा। इस ओटीपी का सत्यापन करें और इसके बाद यूएएन और आधार लिंक की प्रक्रिया पूरी करें।

ईपीएफओ ने जो नई डेडलाइन 31 दिसंबर घोषित की है, उसका फायदा सभी लोगों को नहीं मिलेगा। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार इसका फायदा पूर्वोत्तर क्षेत्र और कुछ कुछ खास वर्ग से जुड़े लोगों को ही मिलेगा। धारा 142 के तहत ईपीएफ खाते को आधार से लिंक करना अनिवार्य हो गया है।

ईपीएफओ ने इसके अलावा वर्ष 2020-21 के लिए ब्याज दर भुगतान की दरें तय कर दी हैं। इसके लिए अब निकाय को वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। इसके मुताबिक, त्योहारों से पहले सदस्य कर्मचारियों के पीएफ खाते में 8.5 फीसद की दर से ब्याज डाला जा सकता है। ईपीएफओ प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए पीएफ राशि पर ब्याज दर की घोषणा करता है। चालू वित्त वर्ष में, ईपीएफओ ने 8.5 फीसद की दर से ब्याज देने का फैसला किया है। इससे नौकरीपेशा लोगों को बड़ा लाभ होगा।

अधिकारियों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय की मंजूरी सिर्फ प्रोटोकॉल का मामला है। ईपीएफओ मंजूरी के बिना ब्याज दर को जारी नहीं कर सकता। पिछले वित्त वर्ष में ईपीएफओ को 70,300 करोड़ रुपए की आय हुई, जिसमें अपने इक्विटी निवेश का एक हिस्सा बेचने से प्राप्त 4000 करोड़ रुपए भी शामिल हैं। महामारी के दौरान लाखों लोगों ने ईपीएफओ से धन की निकासी की है। अब दीपावली से पहले कर्मचारियों को ब्याज का लाभ मिल सकता है।

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