ताज़ा खबर
 

अखिलेश के खेमे ने चुनाव आयोग पहुंचकर ‘साइकिल’ पर ठोका दावा, रामगोपाल यादव ने कहा-हमारे पास 90% विधायकों का समर्थन

साइकिल के चुनावी निशान पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का खेमा अपना दावा ठोक रहा है।

रामगोपाल यादव

समाजवादी पार्टी में वार और पलटवार का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। साइकिल के चुनावी निशान पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का खेमा अपना दावा ठोक रहा है। सोमवार को मुलायम सिंह यादव इसे लेकर चुनाव आयोग गए थे। वहीं आज (3 जनवरी) को पार्टी के निष्काषित नेता रामगोपाल यादव 11 बजे चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंचे और चुनावी निशान को लेकर अपनी राय रखी। अखिलेश के समर्थकों ने कहा कि उनके पास ज्यादातर सपा नेताओं का समर्थन है। वहीं बाहर आकर रामगोपाल ने कहा, हमने चुनाव आयोग को बताया कि हमारे पास 90 प्रतिशत विधायकों का समर्थन है, जो अखिलेश यादव को सपोर्ट कर रहे हैं। इसलिए उनके नेतृत्व वाली पार्टी को ही असली समाजवादी पार्टी माना जाए।

दूसरी ओर मुलायम सिंह के समर्थकों का कहना है कि पिछले शनिवार को अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी के निष्काषित कर दिया गया था और उन्हें वापस पार्टी में नहीं लिया गया था। अखिलेश यादव को लेकर शर्त यह थी कि वह सम्मेलन आयोजित नहीं करेंगे। इन्हीं दो शर्तों के कारण चुनाव आयोग के सामने मुलायम का दावा मजबूत नजर आता है क्योंकि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही अधिवेशन बुला सकता है, निष्काषित सदस्य नहीं।

इससे पहले 30 दिसंबर को मुलायम सिंह यादव ने मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को छह साल के लिए समाजवादी पार्टी से निकाल दिया था। मुलायम ने पत्रकारों को बताया था कि अनुशासनहीनता के चलते यह कार्रवाई की गई है। उन्‍होंने कहा कि पार्टी अध्‍यक्ष के अलावा और कोई भी सूची जारी नहीं सकता और ना ही पार्टी की बैठक बुला सकता है। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव पर गुटबाजी करने का आरोप लगाया। मुलायम ने कहा था कि रामगोपाल ने सीएम को गुटबाजी में फंसाया। मुख्‍य मंत्री समझ नहीं रहे हैं कि रामगोपाल उनका भविष्‍य समाप्‍त कर रहे हैं।

मुलायम ने कहा था कि हमारे लिए पार्टी सबसे अहम है और हमारी प्राथमिकता पार्टी को बचाना है। पार्टी को बचाने के लिए हमने रामगोपाल और अखिलेश यादव को छह साल के लिए निकाल दिया है। उन्‍होंने रामगोपाल यादव को लेकर कहा, ”वह(रामगोपाल यादव) मेरी अनुमति के बिना नेशनल एग्‍जीक्‍यूटिव की आपात बैठक कैसे बुला सकते हैं। सामान्‍य तौर पर 10 से 15 दिन का नोटिस पीरियड दिया जाता है। पार्टी अध्‍यक्ष के अलावा कोई भी नेशनल एग्‍जीक्‍यूटिव की मीटिंग नहीं बुला सकता। ऐसा करके पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचाया गया है।

समाजवादी पार्टी विवाद: किसे मिलेगा ‘साइकिल’ का चिन्ह? जानिए चुनाव आयोग किन तरीकों से कर सकता है फैसला, देखें वीडियो ः

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X