भाजपा ने पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगा दी है। सुवेंदु अधिकारी 9 मई को सुबह 11 बजे कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सुवेंदु के नाम पर ही भाजपा ने मुहर क्यों लगाई?

माना जा रहा कि भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी के नाम पर कई वजहों से हामी भरी गई है। एक तो भाजपा अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए मुख्य वादों को पूरा करना चाहती है, जिनमें बांग्लादेश सीमा पार से आ रहे अवैध प्रवासियों को रोकना, और यूसीसी को लागू करने जैसा मुख्य मुद्दा शामिल है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने भी किया इशारा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बात की ओर इशारा करते हुए कहा, “साथियों यह जीत महज भाजपा के विस्तार या उसकी विचारधारा के बारे में नहीं है। न ही यह सिर्फ भाजपा या एनडीए के अपने 21 वें राज्य में सरकार बनाने के बारे में है। इस जीत का सबसे अहम महत्व है कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठ और गौ-तस्करी बंद हो जाएगी।”

जमीनी नेता की है पहचान

बंगाल में भाजपा का मुख्य मुद्दा घुसपैठ और उससे होने वाले आबादी में बदलाव रहे हैं और इसे रोकने के लिए भाजपा को अधिकारी जैसे तेज-तर्रार नेता की जरूरत है, जिनके पास पहले से ही प्रशासनिक अनुभव है। सुवेंदु अधिकारी टीएमसी के दूसरे कार्यकाल के दौरान ममता सरकार में मंत्री रह चुके हैं। साथ ही सुवेंदु अधिकारी की पहचान बंगाल में जमीनी साख रखने वाले नेता के तौर पर भी है।

टीएमसी का नैरेटिव तोड़ा

साथ ही सुवेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगाकर भाजपा ने अपना चुनावी वादा भी निभाया है कि बंगाल में मुख्यमंत्री बंगाली ही बनेगी, इस तरह उसने टीएमसी के टीएमसी के उस नैरिटिव को भी गलत साबित कर दिया, जिसमें वो कहते थे कि भाजपा को चुनने का अर्थ है बहिरगतों (बाहर वालों) के हाथों में सत्ता सौंपना। सुवेंदु अधिकारी की छवि काफी हद तक ममता बनर्जी की तरह है, दोनों नेताओं की मानसिकता सड़कों और गलियों वाले नेता की तरह है यानी अपने कार्यकर्ताओं में लोकप्रिय और दोनों प्रशासन चलाने में भी उतने ही सहज हैं।

भाजपा को थी दृढ़ निश्चयी नेता की तलाश

भाजपा सूत्रों ने बताया कि नई सरकार की ओर से टीएमसी के भ्रष्टाचार पर एक श्वेत पत्र जारी करने और एक आयोग गठित करने की उम्मीद है। सुवेंदु ने भी शुक्रवार को अपने भाषण में इस बात को कहा था। अगर ऐसा होता है तो टीएमसी के कई नेता जांच के दायरे में आ जाएंगे और उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। पार्टी को इन चुनौतियों से उबारने और अपने अन्य बड़े एजेंडों को पूरा करने लिए एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो दृढ़ निश्चयी हो और अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे और सुवेंदु इस कैटेगरी में फिट बैठते हैं।

कार्यकर्ताओं में लोकप्रिय

ममता बनर्जी लगातार दो चुनावों में हराने के बाद सुवेंदु अधिकारी भाजपा के आम कार्यकर्ताओं के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व ने दिमाग लगाया कि मुख्यमंत्री चुनते समय इस बात को भी ध्यान में रखना जरूरी है। चूंकि बंगाल के इतिहास में पहली बार भाजपा सत्ता में आई है, ऐसे में पार्टी को लगा कि ऐसे किसी चेहरे को चुनो जिस पर सभी की हामी हो, न कि विधायकों पर कोई नया नाम थोपना, जैसा कि उन्होंने अन्य कई राज्यों में किया था।

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सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। बीजेपी विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को नेता चुना गया है। सुवेंदु बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री होंगे। वह 2020 में ही टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। सुवेंदु अधिकारी का पूरा परिवार राजनीति में है। उनके पिता शिशिर अधिकारी तीन बार के सांसद रह चुके हैं और यूपीए सरकार में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें