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11 पुलिसवालों से घिरे 71 वर्षीय MLA को सता रहा रोज मौत का डर, बनवा रखी है अपनी ही तीन मूर्ति, रोज घंटों करते हैं देखभाल

विधायक का कहना है कि उन्होंने खुद ही अपनी प्रतिमाएं बनवायी हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं है कि उनकी मौत के बाद उनके समर्थक या रिश्तेदार उनकी प्रतिमाएं बनवाकर लगवाएंगे।

Author Translated By नितिन गौतम कोलकाता | Updated: March 13, 2020 9:27 AM
अपनी प्रतिमाओं के साथ टीएमसी विधायक जयंत नासकर। (एक्सप्रेस फोटो)

Atri Mitra

हर सुबह टीएमसी विधायक जयंत नासकर अपनी ही प्रतिमाओं की साफ-सफाई करने में घंटों बिताते हैं। टीएमसी विधायक के पास अपनी ही 2 आदमकद और एक पूर्ण प्रतिमा है, जो कि उनके पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के चूनाखली इलाके के बागुलाखली में स्थित घर में रखे हुए हैं।

जयंत नासकर गोसाबा विधानसभा सीट से दो बार से विधायक चुने जा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने खुद ही अपनी प्रतिमाएं बनवायी हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं है कि उनकी मौत के बाद उनके समर्थक या रिश्तेदार उनकी प्रतिमाएं बनवाकर लगवाएंगे।

जयंत नासकर की जान को खतरा है और वह हर समय 11 पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। नासकर को कई बार धमकियां भी मिल चुकी हैं। नासकर का कहना है कि ‘हम राजनेता हैं, हमारे बहुत से दुश्मन होते हैं। जब हम मर जाएंगे तो कोई हमें नहीं जानेगा। मैं किसी भी दिन मर सकता हूं। मेरी मौत के बाद मेरे रिश्तेदार शायद मेरी प्रतिमा ना लगाएं, इसलिए मैंने फैसला किया है कि मैं खुद ही अपनी प्रतिमा बनवाऊंगा।’

पुलिस सूत्रों के अनुसार, नासकर पर दो बार उपद्रवियों द्वारा हमला किया जा चुका है, जिनमें वह किसी तरह खुद को बचाने में सफल रहे हैं। बीते तीन सालों से उन्हें मिल रही धमकियों को देखते हुए उनकी सुरक्षा में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है।

बता दें कि गोसाबा, दक्षिण 24 परगना में राजनैतिक झड़पों को लेकर बदनाम है। राज्य में वामपंथी सरकार के समय यहां सीपीएम और आरएसपी और टीएमसी समर्थकों के बीच आए दिन हिंसक झड़प होती थी।

जयंत नासकर एक राजनैतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके बड़े भाई भी 1977 में सीपीएम उम्मीदवार के सामने विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि उन्हें इसमें हार का सामना करना पड़ा था। बड़े भाई के निधन के बाद नासकर ने राजनैतिक पारी की शुरूआत की और साल 1996 , 2001 और 2006 का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन तीनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

जयंत नासकर को पहली बार 2011 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी कैंडिडेट के तौर पर जीत मिली। अब जब वामपंथी पार्टियां राज्य में सत्ता में नहीं है, तब भी दक्षिण 24 परगना में हिंसक झड़पें आम हैं।

हालांकि विधायक अभी अपनी प्रतिमाओं को तब तक नहीं लगवाएंगे, जब तक उनका निधन नहीं हो जाता। इस दौरान ये प्रतिमाएं विधायक के आवास पर सुरक्षित रखी हुई हैं। विधायक का कहना है कि ‘मैं नहीं चाहता कि जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक ये प्रतिमाएं लगें। लेकिन जब मेरे मरने के बाद मेरे रिश्तेदार और दोस्त इन प्रतिमाओं को लगवाएं।’

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