Bengal News: पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद बनी नई शुभेंदु सरकार राज्य में आम जनता के लिए मछली भात की एक नई योजना लाने वाली है, जिसके तहत लोगों को 5 रुपये में मछली-चावल दिया जाएगा। सरकारी कैंटीनो में मछली चावल को शामिल करने का यह प्रस्ताव बंगाल में सार्वजनिक खाद्य वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है।
बता दें कि बंगाल के लोगों के लिए मछली महज भोजन नहीं है, बल्कि एक पहचान है। लोकप्रिय बंगाली मुहावरा ‘माछे-भाते बंगाली’ जिसका अर्थ है, “बंगाली मछली और चावल पर जीते हैं”, आर्थिक वर्गों के बावजूद बंगाली परिवारों में मछली के महत्व को दर्शाता है। इसलिए सरकार द्वारा मछली और चावल का भोजन अत्यंत रियायती दर पर उपलब्ध कराने को एक कल्याणकारी उपाय बन सकती है।
राजनीतिक दृष्टिकोण भी अहम
शुभेंदु अधिकारी की सरकार यह निर्णय राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान मछली एक असामान्य लेकिन प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभरी थी, जिसके चलते बीजेपी को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। यही मछली बीजेपी के कई नेताओं ने कैमरे पर भी खाई थी।
बता दें कि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान तृणमूल कांग्रेस ने बार-बार आरोप लगाया कि अगर भाजपा बंगाल में सत्ता में आती है, तो मछली और मांस के सेवन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, और इसकी तुलना कुछ अन्य राज्यों में देखी गई खाद्य राजनीति से की। इसके जवाब में बीजेपी ने इस आरोप का पुरजोर खंडन किया।
बीजेपी ने खारिज किए थे ममता की पार्टी के आरोप
बीजेपी के कई नेता और उम्मीदवार सार्वजनिक रूप से चुनाव प्रचार के दौरान मछली खाते, मछली बाजारों का दौरा करते और मछुआरों से बातचीत करते हुए देखे गए, जिससे यह संदेश गया कि पार्टी का बंगाल की खान-पान की आदतों में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है।
सरकार बनने के बाद, कई जिलों में बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने “माछ-भात” के सामुदायिक भोज के साथ चुनावी जीत का जश्न मनाया, जिससे यह संदेश और मजबूत हुआ कि बंगाली खान-पान की संस्कृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
फैसले को भरोसे का प्रतीक बनाना चाहती है बीजेपी
इस पृष्ठभूमि में, सरकार द्वारा अब मछली और चावल का भोजन 5 रुपये में परोसने के कथित निर्णय को जनता को आश्वस्त करने और साथ ही कल्याणकारी गतिविधियों को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि इस फैसले को आंतरिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे लागू किए जाने की उम्मीद है।
यह योजना बंगाल भर में चल रही सरकारी रियायती कैंटीनों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से शुरू की जाएगी। ये कैंटीनें वर्तमान में दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों, परिवहन कर्मचारियों, कम आय वाले परिवारों और शहरी गरीबों को कम लागत पर भोजन उपलब्ध कराकर उनकी जरूरतों को पूरा करती हैं।
अगले सोमवार से पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों में ‘वन्दे मातरम’ गाना अनिवार्य, शुभेंदु अधिकारी सरकार ने जारी किया निर्देश
पश्चिम बंगाल के सभी स्कूलों में अगले सोमवार से सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वन्दे मातरम’ गायन अनिवार्य कर दिया गया है। राज्य के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने मीडिया को इसकी जानकारी दी। शुभेंदु सरकार ने पश्चिम बंगाल में बिना अनुमति के पशु वध करने के खिलाफ सख्ती बरतने की भी बात कही है। शुभेंदु अधिकारी ने नौ मई को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। पढ़िए पूरी खबर…
