पश्चिम बंगाल में एसआईआर (SIR) से जुड़े मामले को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश किया गया। सुनवाई के दौरान एक वकील ने बताया कि बड़ी संख्या में लोगों की अपील अभी भी अपीलेट ट्रिब्यूनल में लंबित है जबकि चुनाव आयोग ने गुरुवार, 9 अप्रैल को मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया है।
गुरुवार आधी रात को आने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए दूसरी और अंतिम मतदाता सूची फ्रीज कर दी गई जबकि वादे के मुताबिक 19 ट्रिब्यूनल कभी अस्तित्व में नहीं आ पाए। निर्णय प्रक्रिया के बाद ‘हटाए गए’ 27,16,393 नामों में से केवल दो मामलों में ही सुनवाई हुई और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें सूची में शामिल किया गया।
SC में अब 13 अप्रैल को सुनवाई
वकील का कहना है कि वीक ऐसे में जिनका नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया, वे इस बार मतदान नहीं कर सकेंगे। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि इस बार मतदाता सूची में नाम न होने का यह अर्थ नहीं है कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में कभी वोट नहीं डाल पाएंगे। फिलहाल, अदालत ने आश्वासन दिया है कि मामले की अगली सुनवाई 13 अप्रैल को की जाएगी।
पश्चिम बंगाल के निर्वाचन आयोग के प्रमुख मनोज अग्रवाल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। लेकिन सूत्रों के अनुसार गुरुवार तक ट्रिब्यूनल में सुनवाई के लिए ऑनलाइन 2 लाख से अधिक अपीलें प्राप्त हो चुकी थीं।
कोलकाता के पास एक केंद्रीय सरकारी संस्थान में स्थापित होने वाले ट्रिब्यूनल अभी तक काम शुरू नहीं कर पाए हैं। ऐसे में परेशान मतदाता अपने दस्तावेजों के साथ राज्यभर में ब्लॉक विकास अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेट के दफ्तरों के बाहर कतारों में लगे रहे। उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं था कि ऑनलाइन आवेदन पर्याप्त होगा या नहीं।
हटाए जाने के बाद जिन दो लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल हो पाए, वे हैं फरक्का से कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख और पूर्व मणिकचक विधायक मोत्तकिल आलम ने मतदाता सूची में बहाली के बाद रतुआ से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया।
SC ने खारिज कर दी थी बंगाल सरकार की याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कुछ श्रेणियों के हटाए गए मतदाताओं को मतदान की अनुमति देने या मतदाता सूची को फ्रीज न करने की मांग की गई थी। अदालत ने 19 ट्रिब्यूनलों को लंबित मामलों के निपटारे के लिए कोई सख्त समय-सीमा तय करने से भी इनकार कर दिया।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय जल एवं स्वच्छता संस्थान के एक कर्मचारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ”काम आगे बढ़ा है लेकिन अभी तक कोई ट्रिब्यूनल स्थापित नहीं हुआ है… शायद एक-दो दिन में हो जाए।”
7 अप्रैल को प्रक्रिया में तेजी लाने के प्रयास के तहत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विभु गोयल को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया। उन्हें भारतीय चुनाव आयोग, कलकत्ता हाई कोर्ट और ट्रिब्यूनलों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है ताकि किसी भी कमी को दूर किया जा सके।
6 अप्रैल को फ्रीज़ हुई थी पहली सूची
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची 6 अप्रैल को ही फ्रीज कर दी गई थी जबकि 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए गुरुवार आखिरी तारीख थी।
एक महीने से ज्यादा चले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद चुनाव आयोग ने सोमवार आधी रात को अंतिम सप्लीमेंट्री सूची जारी की।
पूरे अभियान के अंत में पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 6.77 करोड़ रह गई। यानी कुल 89 लाख (करीब 11.62%) नाम सूची से हटाए गए।
शुरुआत में 58 लाख नाम हटाए गए थे जबकि 60.06 लाख मामलों को आगे जांच (adjudication) के लिए भेजा गया।
गुरुवार को मीणाखान के बीडीओ कार्यालय के बाहर कतार में खड़ी 61 वर्षीय चालेया बेगम ने कहा, ”मैंने ऑनलाइन अपील भी की और बीडीओ दफ्तर भी गई लेकिन उन्होंने कहा कि अब यह उनके हाथ में नहीं है।”
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पश्चिम बंगाल में एक महीने पहले शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद सोमवार को चुनाव आयोग ने अपनी अंतिम ड्राफ्ट लिस्ट जारी की। ECI द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बाहर किए जाने के बाद विचाराधीन 60,06,675 नामों में से 27,16,393 यानी लगभग 45.22%, नाम हटा दिए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
