पश्चिम बंगाल में एक महीने पहले शुरू हुई SIR प्रक्रिया के बाद सोमवार को चुनाव आयोग ने अपनी अंतिम ड्राफ्ट लिस्ट जारी की। ECI द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बाहर किए जाने के बाद विचाराधीन 60,06,675 नामों में से 27,16,393 यानी लगभग 45.22%, नाम हटा दिए गए हैं।
इसका मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की कुल संख्या विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत में 7.66 करोड़ से घटकर 6.77 करोड़ हो गई है। सबसे अधिक पेंडिंग मामले अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले (11 लाख) में थे, उसके बाद मालदा (8.28 लाख), दक्षिण 24 परगना (5.22 लाख) और उत्तर 24 परगना (5 लाख) का स्थान था। झाड़ग्राम (6682) और कलिम्पोंग ( 6790) में सबसे कम पेंडिंग केस थे।
प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज़्यादा मतदाता इन जिलों से हटाए गए
चुनाव आयोग के ज़िलावार आंकड़ों के अनुसार, प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज़्यादा मतदाता मतुआ बहुल नादिया (77.86%) में हटाए गए हैं। दूसरा जिला हुगली (70.33%) है जहां मुसलमानों की संख्या अधिक है। इसके बाद पूर्वी बर्धमान (57.4%), उत्तर 24 परगना (55.08%) और पश्चिम बर्धमान (53.72%) से नाम हटाए गए हैं। अल्पसंख्यक बहुल मालदा (28.91%), मुर्शिदाबाद (41.33%), उत्तर दिनाजपुर (36.84%) और दक्षिण 24 परगना (42.70%) में दर्ज किए गए मामलों की संख्या सबसे अधिक थी, वहां प्रतिशत के हिसाब से कम मामले हटाए गए हैं। हालांकि संख्या के हिसाब से उनका हिस्सा अधिक है।
सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में 705 न्यायिक अधिकारियों द्वारा समीक्षा के बाद किया गया फैसला
एसआईआर की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी और 28 फरवरी 2026 को अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद मतदाताओं की कुल संख्या घटकर 7.04 करोड़ रह गई थी। इसमें 60.06 लाख वो मतदाता शामिल थे जिनके नामों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायिक अधिकारियों द्वारा समीक्षा के लिए चिह्नित किया गया था।
सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में 705 न्यायिक अधिकारियों द्वारा समीक्षा के बाद फैसला किया गया। सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने मतदाता सूचियों को फ्रीज करने से पहले समय बढ़ाने की याचिका स्वीकार नहीं की। ईसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “फैसले के बाद जिन लोगों के नाम हटा दिए गए हैं वे न्यायाधिकरणों के समक्ष इसे चुनौती दे सकते हैं।”
SIR में 47 हजार नाम कटे
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