पश्चिम बंगाल चुनावी नतीजों के बाद टीएमसी में बड़ी टूट हुई है। इसपर चुनाव आयोग के पूर्व अधिकारियों का कहना है कि टीएमसी के 20 बागी लोकसभा सांसदों का गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी में विलय करने का प्लान 2016 में पेमा खांडू के नेतृत्व में कांग्रेस की अरुणाचल प्रदेश इकाई में हुई टूट से काफी मिलता-जुलता है। 2016 में अरुणाचल में पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव देखा गया था।

सितंबर 2016 में पेमा खांडू और 42 कांग्रेस विधायक ‘पीपल्स पार्टी ऑफ़ अरुणाचल’ (PPA) में शामिल हो गए, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी कांग्रेस के साथ ही बने रहे। PPA उस समय बीजेपी के नेतृत्व वाले ‘नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ (NEDA) का हिस्सा थी। इसके बाद बीजेपी ने पेमा खांडू को मुख्यमंत्री बनाकर सरकार बनाई। दो महीने बाद दिसंबर में पेमा खांडू और 32 PPA विधायक BJP में शामिल हो गए। इस कदम से अरुणाचल में BJP की पहली पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी और 60 सदस्यों वाली विधानसभा में उसकी ताकत बढ़कर 45 हो गई। PPA के पास 10 और कांग्रेस के पास तीन विधायक रह गए। 2019 के विधानसभा चुनावों में BJP ने 60 में से 41 सीटें जीतीं और पेमा खांडू मुख्यमंत्री बने रहे।

बागी सांसदों ने किया NCPI में विलय

अब 2026 की बात करते हैं। TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ‘नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया’ (NCPI) में विलय करने की अपनी योजना के बारे में बताया है। NCPI पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है।

2023 के त्रिपुरा चुनावों में पार्टी ने चार उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से दो ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा, एक ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर, जबकि चौथे का नामांकन रद्द कर दिया गया। तीनों ही हार गए और उन्हें NOTA से भी कम वोट मिले। सूत्रों के मुताबिक लोकसभा सचिवालय अब TMC के बागी नेताओं की विलय की अर्जी पर लिखित कानूनी राय ले रहा है, ताकि अगर स्पीकर के अंतिम फैसले को अदालत में चुनौती दी जाए, तो वह कानूनी जांच में टिक सके।

क्या कहते हैं संवैधानिक विशेषज्ञ?

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचार्य ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 4 का हवाला देते हुए बताया कि केवल एक राजनीतिक दल को ही किसी दूसरे दल में विलय करने की अनुमति है। उनके अनुसार सिर्फ़ सांसद या विधायक विलय नहीं कर सकते। 10वीं अनुसूची का पैरा 4 विलय की स्थिति में अयोग्यता से छूट के बारे में है।

इसमें कहा गया है कि सदन का कोई सदस्य तब अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा जब उसका मूल राजनीतिक दल किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर ले और संबंधित विधायी दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य इस विलय के लिए सहमत हों। आचार्य ने PTI को बताया कि अगर कोई राजनीतिक दल किसी दूसरे दल में विलय का फैसला करता है, तो उसके विधायकों और सांसदों को विलय पर सहमत होना होगा। लेकिन सांसद या विधायक अकेले किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते- यही संवैधानिक प्रावधान है।

चुनाव आयोग के एक पूर्व अधिकारी, जो चुनाव आयोग में राजनीतिक दलों के मामलों को देखते थे, उन्होंने TMC के बागी नेताओं के NCPI में विलय करने की योजना को एक नई पहल बताया है। इस तरह की किसी प्रक्रिया का ज़िक्र न तो दलबदल विरोधी कानून में है और न ही ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (Representation of the People Act) में है।

अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र

TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बागी सांसदों के विलय के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। 10 जून के इस पत्र में अभिषेक बनर्जी ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के 2023 के एक फैसले का हवाला दिया है। इस फैसले में कहा गया था कि राजनीतिक दल और विधायी दल (legislature party) अलग-अलग इकाइयां हैं और ‘पैराग्राफ 4’ के तहत सुरक्षा पाने के लिए एक वैध विलय ज़रूरी है, जिसमें मूल राजनीतिक दल भी शामिल हो।

अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा, “91वें संशोधन के बाद सदस्यों के समूह के लिए कानूनी रूप से फिर से संगठित होने का एकमात्र तरीका 10वीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत ‘विलय’ है, जिसके लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए। पहली शर्त है कि राजनीतिक दल का विलय हो और दूसरी, विधायी दल के दो-तिहाई सदस्य दल बदल लें।”

अभिषेक बनर्जी ने लिखा, “मीडिया में चल रही बातों में यह माना जा रहा है कि केवल एक ही शर्त पूरी होनी चाहिए, जो कि गलत है। इसलिए अगर यह मान भी लिया जाए कि विधायी दल के दो-तिहाई सदस्यों ने दल बदल लिया है, तब भी राजनीतिक दल का किसी अन्य दल के साथ कोई विलय नहीं हुआ है और न ही AITC नाम की कोई नई पार्टी बनाई गई है।”

टीएमसी पर ‘पूरा कब्जा’ करने की है तैयारी

टीएमसी में बगावत की शुरुआत करने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने बड़ा दावा किया है। बनर्जी का कहना है कि विधायकों और सांसदों का समर्थन मिलने के बाद अब उनका गुट धीरे-धीरे पार्टी में बाकी हिस्सों पर भी नियंत्रण हासिल करने की ओर आगे बढ़ेगा। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर