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अलग राज्य की मांग के आंदोलन को समर्थन देकर पांव जमाना चाहती है BJP

राज्य विधानसभा चुनावों में अपने तमाम मुद्दों को बेअसर होते देख कर भाजपा ने अब उत्तर बंगाल में अलग राज्य की मांग में चलने वाले आंदोलनों को समर्थन देकर अपनी जमीन मजबूत करने की रणनीति बनाई है।

Author कोलकाता | April 28, 2016 2:16 AM
The New Cooch Behar station

राज्य विधानसभा चुनावों में अपने तमाम मुद्दों को बेअसर होते देख कर भाजपा ने अब उत्तर बंगाल में अलग राज्य की मांग में चलने वाले आंदोलनों को समर्थन देकर अपनी जमीन मजबूत करने की रणनीति बनाई है। दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के साथ तो पहले से ही उसका तालमेल है। अब वह कूचबिहार जिले में अलग राज्य की मांग का समर्थन कर कोच राजबंशियों का समर्थन हासिल करना चाहती है। पार्टी ने यह मांग उठाने वाले ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन (जीसीपीए) के साथ हाथ मिलाया है। कूचबिहार जिले में विधानसभा चुनावों के आखिरी दौर में पांच मई को मतदान होना है।

जीसीपीए ने बीते साल फरवरी में अलग राज्य की मांग में रेल रोको की अपील कर कई दिनों तक सामान्य जनजीवन ठप कर दिया था। पार्टी के हजारों समर्थकों ने न्यू कूचबिहार रेलवे स्टेशन पर धरना दिया था। नतीजतन पूर्वोत्तर भारत का रेल संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट गया था। आखिर में पुलिस ने लाठियां बरसा कर प्रदशर्नकारियों को खदेड़ा। उस लाठीचार्ज में दर्जनों लोग घायल हो गए थे। उस समय तो मामला कुछ ठंढा पड़ गया था। लेकिन विधानसभा चुनावों के मौके पर अलग राज्य की मांग फिर सिर उभार रही है। बंशी बदन बर्मन की अगुवाई वाला उक्त संगठन पश्चिम बंगाल व असम के सीमावर्ती इलाकों को मिला कर कोच राजबंशी तबके के लिए अलग कूचबिहार राज्य की मांग कर रहा है। उसकी दलील है कि कूचबिहार कभी भारत का हिस्सा नहीं रहा। आजादी के बाद भारत में इसका विलय किया गया और वर्ष 1949 में इसे बंगाल का हिस्सा बना दिया गया।

वैसे, कोच राजबंशियों के लिए अलग राज्य की मांग कोई दो दशक पुरानी है। बीच में कामतापुर पीपुल्स पार्टी ने भी कामतापुर राज्य के नाम से यही मांग उठाई थी। उसने तो इसके लिए उग्रवादी रुख अपनाया था। बाद में जीसीपीए इस मुद्दे पर सक्रिय हुई और उसने नए सिरे से आंदोलन छेड़ा। कामतापुर लिबरेशन आर्गनाइजेशन (केएलओ) के बैनर तले राजबंशियों ने इस मांग के समर्थन में हथियार भी उठाए थे। लेकिन वह आंदोलन अब दम तोड़ चुका है।

इस महीने सात अप्रैल को सिलीगुड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भीड़ जुटाने का जिम्मा जीसीपीए के अनंत राय गुट को सौंपा गया था। इससे साफ है कि उत्तर बंगाल में भाजपा हाशिए पर रह रही कुछ जातियों को एकजुट करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ममता पहले ही साफ कर चुकी हैं कि सरकार किसी भी कीमत पर बंगाल का विभाजन नहीं होने देगी। बावजूद इसके भाजपा ऐसी ताकतों के सहारे अपने पैरों तले की जमीन मजबूत करने का प्रयास कर रही है। भाजपा की कूचबिहार जिला अध्यक्ष अनिल माकार कहते हैं कि पार्टी कूचबिहार को अलग राज्य का दर्जा देने के पक्ष में नहीं है। लेकिन गोरखा, आदिवासी और राजबंशियों को लेकर उत्तर बंगाल को अलग राज्य का दर्जा देने पर विचार किया जा सकता है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि इलाके में वाम-कांग्रेस गठजोड़ व तृणमूल कांग्रेस की ताकत को ध्यान में रखते हुए भाजपा को सियासी तौर पर अपनी रणनीति से कोई फायदा हो या नहीं, जीसीपीए को समर्थन से इलाके में अलग राज्य की मांग एक बार फिर जोर पकड़ सकती है। स्थानीय इतिहासकार देवब्रत चाकी कहते हैं कि भाजपा अलगाववादी तत्वों को बढ़ावा देकर राज्य को विभाजित करने का प्रयास कर रही है।

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