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बंगाल के गवर्नर बोले- अर्जुन के तीरों में परमाणु शक्ति, संजय के पास थी दिव्यदृष्टि

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि रामायण के दिनों में हमारे पास पुष्पक विमान था। संजय ने महाभारत का पूरा युद्ध घृतराष्ट्र को सुनाया, लेकिन टीवी देखकर नहीं। महाभारत में अर्जुन के तीरों में परमाणु शक्ति थी।

Author कोलकाता | Updated: January 15, 2020 9:08 AM
बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को दावा किया कि रामायण के दिनों में भी ‘पुष्पक विमान’ था और महाभारत के अर्जुन के तीरों मे परमाणु शक्ति थी। यहां एक कार्यक्रम में धनखड़ ने कहा कि यह 20वीं सदी में नहीं, बल्कि रामायण के दिनों में हमारे पास पुष्पक विमान था। संजय ने महाभारत का पूरा युद्ध घृतराष्ट्र को सुनाया, लेकिन टीवी देखकर नहीं। महाभारत में अर्जुन के तीरों में परमाणु शक्ति थी। महाकाव्य महाभारत में ऐसा प्रसंग है कि कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान संजय ने हस्तिनापुर में बैठकर दृष्टिबाधित नरेश धृतराष्ट्र को आंखों देखा हाल सुनाया था। इसके लिए संजय के पास दिव्यदृष्टि जैसी कोई शक्ति थी।

समाज पर नकरात्मक प्रभाव पड़ेगा: राज्यपाल ने मीडिया से बातचीत में आगे कहा कि विमान का अविष्कार 1910 के बाद किया गया लेकिन हमारे धर्मग्रंथों पर नजर डाले तो रामायण के समय पर ही हमारे पास “उड़न खटोला” था। दुनिया भारत की अनदेखी नहीं कर सकती है। वहीं धनखड़ के इस बयान पर देश के वैज्ञानिकों ने उनकी आलोचना करते हुए कहा कि राज्यपाल को ऐसी बयान नहीं देना चाहिए क्योकिं समाज पर इसका गलत प्रभाव पड़ेगा।

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कृष्ण के चक्र में हाइड्रोजन बम की शक्तियां थीं: गौरतलब है कि परमाणु भौतिक वैज्ञानिक बिकाश सिन्हा ने राज्यपाल के बयान पर कहा कि किसी दिन वह यह भी कह सकते हैं कि भगवान कृष्ण के चक्र में हाइड्रोजन बम की शक्तियां थीं। यह बेतुका बयान है। एक गवर्नर को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए क्योंकि इसका लोग पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

 सरकार से नाराज होकर धरने पर बैठ चुके है धनखड़: बता दें कि धनखड़ इन दिनों बंगाल की राजनीति को लेकर चर्चा में है कुछ दिनों पहले ही उन्होंन राज्य की सीएम ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लगाया था कि कोई भी अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहा है और राज्य सरकार उनसे किसी भी काम को लेकर संवाद नहीं करती है।  इससे नाराज होकर राज्यपाल विधानसभा के गेट के बाहर ही धरने पर बैठ गए थे।

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