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पं. बंगाल सरकार की पहल, मानसून में रोकेगी डायरिया का कहर

मानसून में डायरिया से निपटने के मकसद से ओआरएस घोल और जिंक गोलियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार इस डायरिया नियंत्रण पखवाड़े में करीब 70-75 लाख बच्चों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

Author July 29, 2015 16:56 pm

मानसून में डायरिया से निपटने के मकसद से ओआरएस घोल और जिंक गोलियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार इस डायरिया नियंत्रण पखवाड़े में करीब 70-75 लाख बच्चों तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

इस हफ्ते कोलकाता के पास बज से शुरू हुए इस कार्यक्रम का फोकस ओआरएस और जिंक गोलियों के सेवन को बढ़ावा देकर डायरिया को नियंत्रण करने के बारे में जागरूता फैलाना है।

यूनिसेफ में स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ कनीनिका मित्रा ने पीटीआई भाषा को बताया कि राज्य में जिंक की गोलियों और ओआरएस का घोल इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। इसलिए हम इसे बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं।

‘आशा’ :मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता: कार्यकर्ता घर-घर जा रही हैं और उन परिवारों को जिंक की गोलियां दे रही हैं जिनके घर में पांच साल की आयु से कम उम्र के बच्चे हैं। यह अस्पतालों में भी मुहैया कराई जा रही है।

राज्य सरकार इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए यूनिसेफ के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘ हम इस अभियान के जरिए तकरीबन 70-75 लाख बच्चों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।’

इसकी रोकथाम के लिए, वे हाथ धोएं, साफ सफाई रखें, शौचालय का इस्तेमाल करें, सही से स्तनपान करांए आदि। अभियान के दूसरे हफ्ते का फोकस शिशुओं और छोटे बच्चों के पोषण पर होगा।

डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा ऐसे वक्त हो रहा है जब 29 जुलाई को ओआरएस दिवस है, साथ ही में हर वर्ष एक से सात अगस्त तक मानाया जाने वाला विश्व स्तनपान सप्ताह पड़ रहा है।

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