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मिथुन कोबरा बन BJP में गए हैं या जाकर कोबरा बने हैं? रवीश ने रखा सवाल तो लोग देने लगे तरह-तरह के जवाब

NDTV से जुड़े पत्रकार के मुताबिक, "जिस मंच पर पीएम ममता के लिए स्कूटी के गिर जाने का रूपक चुनते हैं तो उसी मंच पर मिथुन कहते हैं कि वह कोबरा हैं। काटते ही इंसान फ़ोटो में बदल जाता है। संवाद भले फिल्मी हो मगर संदर्भ तो ममता को लेकर ही था।"

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली/कोलकाता | Updated: March 9, 2021 9:45 AM
Mithun, BJP, Bengalजाने-माने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती कभी नक्सली रहे हैं। वह उसके बाद TMC के कोटे से राज्यसभा भेजे गए। हाल ही में वह बंगाल चुनाव से ऐन पहले BJP का हिस्सा बने हैं। (फोटोज़ः PTI)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ऐन पहले BJP में शामिल हुए जाने-माने ऐक्टर मिथुन चक्रवर्ती के एक बयान को लेकर टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने उन पर टिप्पणी की है। मंगलवार को एक फेसबुक पोस्ट में NDTV से जुड़े पत्रकार ने सवाल उठाया कि मिथुन कोबरा बनकर भाजपा में गए हैं या फिर जाकर कोबरा बने हैं?

रवीश ने पोस्ट में लिखा, “जिस मंच पर पीएम ममता के लिए स्कूटी के गिर जाने का रूपक चुनते हैं तो उसी मंच पर मिथुन कहते हैं कि वह कोबरा हैं। काटते ही इंसान फ़ोटो में बदल जाता है। संवाद भले फिल्मी हो मगर संदर्भ तो ममता को लेकर ही था। इस घटिया संवाद के जरिए सीएम को टार्गेट करते हैं और कहते हैं मैं जिसे मारता हूं उसकी लाश श्मशान में मिलती है। मिथुन कोबरा बन कर बीजेपी में गए हैं या बीजेपी में जाने के बाद कोबरा बन गए हैं? अगर बीजेपी में नहीं जाते तो ईडी और आयकर विभाग के डर से भीगी बिल्ली बने फिरते।”

रवीश के इसी कथन पर सोशल मीडिया यूजर्स भी तरह-तरह के जवाब देने लगे। कमल अरोड़ा ने कमेंट किया, “मिथुन कोबरा हैं तो जनता सपेरा है। पूंछ से पकड़ कर पिटारे में बंद कर देगी। सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी कुर्सी है, इसे कब तक झूठ बोल बचाएगी।” वहीं, ए.सदफ ने लिखा- मिथुन ने जिंदगी भर जनता की तालियां लूटीं। और अब बुढ़ापे में गालियां खाने जा रहे हैं।

इसी बीच, बंस राज सिंह ने लिखा- कानपुर में पीएम का पैर फिसल गया था और आप जैसे पत्रकारों ने उनके मरने तक कि दुआ कर डाली थी। मिथुन ने खुद को कोबरा क्या कहा सारे विरोधी खुद को नेवला कहने लगे गए। भाषण या भाषा की चतुराई केवल रवीश कुमार का वेशेषधिकार नहीं है। हज़ारों बंगाली गुजरात मे रोजगाररत हैं। आप तो बस लंबा चौड़ा सा लेख स्विट्ज़रलैंड में बुर्का बैन और बाटला हाउस पर कोर्ट के फैसले पर लिख मारिए।

उधर, मयंक बीकानेर के अकाउंट से प्रतिक्रिया आई- अब जो देश आंशिक रूप से आज़ाद है। वहां आप और क्या आशा रखते हैं? चाय वाला तो सस्ती बात ही करेगा ना साहब। उसका टार्गेट ग्रुप इन ओछे फिकरों पर ताली पीटने वाला ही तो है। जहां तक मिथुन की बात है तो कभी नक्सली इतिहास रखने वाला आज कोबरा हो गया है। बात भी सही है। बीजेपी में रहना है तो जानवर एक योग्यता है और ज़हरीला एक विशेषण। आज आपके पास दो ही ऑपशन हैं। या तो मोदी गुणगान करें और अभय दान पाएं…जैसे- अक्षय कुमार, करण जौहर, अजय देवगन और कंगना। विरोध करें और सजा पाएं…जैसे- तापसी और अनुराग कश्यप।

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