पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग संपन्न हो गई है, 90 फीसदी के करीब मतदान हुआ है। पिछले 15 सालों से राज्य में ममता बनर्जी की सरकार है। 2011 में उन्होंने पहली बार सत्ता में आने के बाद बंगाल की जनता से कई वादे किए थे। बीजेपी आरोप लगाती है कि ममता उन वादों पर खरा नहीं उतर पाई हैं।

जनसत्ता अपनी स्पेशल सीरीज आंकड़े बोलते हैं के जरिए ममता बनर्जी की 15 साल की सरकार के कामकाज का विश्लेषण कर रही है। जानने का प्रयास है कि 15 सालों में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, निवेश के क्षेत्र में कितना काम हुआ है।

शिक्षा के क्षेत्र में कितना काम?

Unified District Information System for Education का डेटा पश्चिम बंगाल की शिक्षा प्रणाली को लेकर विस्तृत जानकारी देता है। पश्चिम बंगाल में वर्तमान में 93 हजार 715 स्कूल है। राज्य में प्राथमिक यानी कि प्राइमरी स्कूलों की संख्या 74 हजार 316 है, वहीं माध्यमिक यानी कि सेकेंड्री स्कूलों की संख्या सिर्फ 3 हजार 280 है। पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों की संख्या 82 हजार 154 है, वहीं निजी स्कूलों की संख्या 7 हजार 176।

वर्तमान में पश्चिम बंगाल में 6482 ऐसे स्कूल हैं जहां सिर्फ एक ही शिक्षक मौजूद है, वहीं बिना छात्रों वाले स्कूलों की संख्या 3 हजार 812 दर्ज है। इसके अलावा बंगाल में 50 से कम बच्चे वाले स्कूलों की संख्या 38 फीसदी दर्ज की गई है। हर तीन में से एक स्कूल राज्य में छोटा है। नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझ सकते हैं कि बंगाल में शिक्षा की कैसी व्यवस्था है और राष्ट्रीय औसत के मुकाबले इसकी स्थिति क्या है।

सूचकपश्चिम बंगालपूरे भारत% पश्चिम बंगाल% पूरे भारत
कुल स्कूल93,71514,71,4736.4
प्राथमिक (Primary)74,3167,30,51879.349.6
उच्च प्राथमिक (Upper Primary)8,5284,34,0139.129.5
माध्यमिक (Secondary)3,2801,42,7493.59.7
उच्च माध्यमिक (Higher Secondary)7,5911,64,1938.111.2
सरकारी स्कूल82,15410,13,32287.768.9
प्राइवेट (बिना सहायता)7,1763,39,5437.723.1
एक शिक्षक वाले स्कूल6,4821,04,1256.97.1
बिना नामांकन वाले स्कूल3,8127,9934.10.5
छोटे स्कूल (<50 छात्र)3836
सोर्स: UDISE+ (2021–22 से 2024–25 की रिपोर्ट्स)

ऊपर दी गई टेबल से एक ट्रेंड स्पष्ट दिखाई देता है। पश्चिम बंगाल में प्राथमिक स्कूलों की संख्या जरूर 79 फीसदी है, लेकिन बात आगे की शिक्षा की आती है, हालात चिंताजनक दिखाई देते हैं। बंगाल में सेकेंड्री स्कूलों की संख्या 3.5 फीसदी है और हायर सेकेंड्री स्कूलों की संख्या 8.1 फीसदी। इसका सीधा मतलब है कि बच्चे एक से पांचवी कक्षा तक तो पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन आगे की शिक्षा के लिए उनके पास सीमित विकल्प हैं। ऐसी स्थिति में स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट बढ़ सकता है।

आंकड़े बोलते हैं | विशेष श्रृंखला
ममता सरकार का 15 साल का आर्थिक रिपोर्ट कार्ड
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जीडीपी — चार मोर्चों पर पश्चिम बंगाल का हाल
पश्चिम बंगाल 2011-2025
कुल स्कूल
93,715
माध्यमिक ड्रॉपआउट 2025
20%
स्वास्थ्य बजट 2025-26
21,355 Cr
GDP हिस्सेदारी 2023-24
5.6%
स्कूलों का ढांचा — राष्ट्रीय तुलना
स्रोत: UDISE+ (2021–22 से 2024–25) | पश्चिम बंगाल vs पूरा भारत
सूचक पश्चिम बंगाल पूरा भारत बंगाल % राष्ट्रीय %
कुल स्कूल 93,715 14,71,473 6.4%
प्राथमिक (Primary) 74,316 7,30,518 79.3% 49.6%
उच्च प्राथमिक 8,528 4,34,013 9.1% 29.5%
माध्यमिक (Secondary) 3,280 1,42,749 3.5% 9.7%
उच्च माध्यमिक 7,591 1,64,193 8.1% 11.2%
सरकारी स्कूल 82,154 10,13,322 87.7% 68.9%
एक शिक्षक वाले स्कूल 6,482 1,04,125 6.9% 7.1%
बिना नामांकन वाले स्कूल 3,812 7,993 4.1% 0.5%
छोटे स्कूल (50 से कम छात्र) 38% 36%
चिंता का विषय
3,812
बिना किसी छात्र के स्कूल — राष्ट्रीय औसत का 8 गुना (0.5% vs 4.1%)
माध्यमिक की कमी
3.5%
सेकेंड्री स्कूलों की हिस्सेदारी, जबकि राष्ट्रीय आंकड़ा 9.7% है
स्कूल ड्रॉपआउट ट्रेंड
स्रोत: राज्यसभा डेटा | पश्चिम बंगाल में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट लगातार बढ़ रहा है
वर्ष प्राथमिक उच्च प्राथमिक माध्यमिक
2020–21 0% 0% 13.26%
2021–22 8.62% 0% 17.98%
2022–23 8.10% 3.40% 8.50%
2023–24 0% 0% 17.80%
2024–25 1.40% 3% 20%
माध्यमिक ड्रॉपआउट — बार चार्ट
2020–21
13.26%
2021–22
17.98%
2022–23
8.50%
2023–24
17.80%
2024–25
20%
अन्य राज्यों से तुलना
माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट — 2020-21 vs 2024-25 | स्रोत: राज्यसभा डेटा
राज्य प्राथमिक 2020-21 प्राथमिक 2024-25 माध्यमिक 2020-21 माध्यमिक 2024-25
पश्चिम बंगाल 0% 1.40% 13.26% 20%
केरल 0.02% 0.40% 7.05% 4.80%
हिमाचल प्रदेश 1.89% 0.50% 7.62% 6.60%
राजस्थान 0.98% 2.70% 8.89% 7.40%
पंजाब 0% 2.50% 9.02% 6.20%
गुजरात 1.02% 0.20% 23.31% 16.90%
स्रोत: UDISE+ (2021–22 से 2024–25) · राज्यसभा डेटा · MoSPI
सरकारी डॉक्टरों की संख्या (2011–2022)
स्रोत: Central Bureau of Health Intelligence | नोट: 2015–2020 का विश्वसनीय डेटा उपलब्ध नहीं
2011
10,854
2012
3,325
2013
9,474
2014
8,829
2021
920
2022
17,692
अस्थिर आंकड़े
920
2021 में सरकारी डॉक्टरों की संख्या असामान्य रूप से गिरी — विश्वसनीयता पर सवाल
2022 में उछाल
17,692
सरकारी डॉक्टरों की संख्या 2022 में अब तक के उच्चतम स्तर पर
सरकारी अस्पताल एवं बेड
वर्ष सरकारी अस्पताल बेड की संख्या
2011 654 71,191
2012 1,566 77,210
2013 1,566 78,188
2014 1,566 78,566
2019 1,594 96,012
2022 1,510 97,000
बेड में बढ़ोतरी
+36.3%
2011 से 2022 तक सरकारी अस्पतालों में बेड 71,191 से बढ़कर 97,000 हुए
अस्पताल घटे
1,594
2019 में 1,594 से घटकर 2022 में 1,510 — छोटे अस्पतालों का विलय संभावित
स्वास्थ्य बजट ट्रेंड
स्रोत: बंगाल सरकार का स्वास्थ्य बजट | राष्ट्रीय नीति लक्ष्य: कुल बजट का 8%
2017–18 (5.5% बजट)
8,856 Cr
2019–20
10,739 Cr
2020–21 (कोविड)
12,831 Cr
2023–24 (7.4% बजट)
18,490 Cr
2025–26 (बजट)
21,355 Cr
स्रोत: Central Bureau of Health Intelligence · बंगाल सरकार स्वास्थ्य बजट
बेरोजगारी दर — बंगाल vs भारत (15–29 आयु वर्ग)
स्रोत: MoSPI · आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025
वर्ष भारत (%) पश्चिम बंगाल (%) स्थिति
2022 10.90% 8.40% राष्ट्रीय से बेहतर
2023 10.00% 8.10% राष्ट्रीय से बेहतर
2024 10.30% 9.70% करीब
2025 9.90% 10.60% राष्ट्रीय से खराब
ग्रामीण बेरोजगारी
9.4%
युवाओं (15-29) में ग्रामीण बेरोजगारी दर 2025 में
शहरी बेरोजगारी
13.9%
युवाओं (15-29) में शहरी बेरोजगारी दर — चिंताजनक स्तर
शिक्षा स्तर अनुसार बेरोजगारी
पढ़े-लिखे लोगों में भी बेरोजगारी — खासकर महिलाओं में | स्रोत: MoSPI
शिक्षा स्तर पुरुष (%) महिला (%)
पोस्ट ग्रेजुएट 2.90% 15.40%
ग्रेजुएट 7.10% 12.50%
डिप्लोमा 5.70% 13.80%
हायर सेकेंडरी 4.00% 7.70%
सेकेंडरी 1.70% 6.00%
मिडिल 2.60% 2.00%
प्राइमरी 1.10% 0.70%
अनपढ़ 0.30% 0.10%
गरीबी से बाहर आए लोग
गरीबी से बाहर (2016–21)
92.58 लाख
नीति आयोग के अनुसार 5 वर्षों में 92 लाख से अधिक लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए
गरीबी दर 2022-23
8.60%
2016 में 21.3% से घटकर 2022-23 में 8.60% — देश में 15वां स्थान
स्रोत: MoSPI · PLFS 2025 · नीति आयोग MPI रिपोर्ट
देश की GDP में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी (1960–2024)
स्रोत: भारत सरकार | 1960 में 10.5% से गिरकर 2023-24 में मात्र 5.6%
1960–61
10.5%
1970–71
9.7%
1980–81
8.8%
1990–91
7.9%
2000–01
8.2%
2010–11
6.7%
2020–21
5.7%
2023–24
5.6%
बंगाल की अर्थव्यवस्था का ढांचा
2012–13 से 2021–22 की औसत क्षेत्रीय हिस्सेदारी | स्रोत: नीति आयोग
क्षेत्र (सेक्टर) हिस्सेदारी (%) स्थिति
कृषि एवं संबद्ध 23.60% कृषि प्रधान
व्यापार, होटल, रेस्टोरेंट 15.90% ठीक
रियल एस्टेट, व्यवसाय सेवाएं 12.70% ठीक
विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) 12.30% कमजोर
अन्य सेवाएं 8.30% ठीक
निर्माण (कंस्ट्रक्शन) 7.40% ठीक
परिवहन, भंडारण, संचार 6.50% ठीक
बैंकिंग और बीमा 5.30% ठीक
सार्वजनिक प्रशासन 5.00% ठीक
बिजली, गैस, जल आपूर्ति 2.00% ठीक
खनन एवं उत्खनन 1.00% ठीक
GDP गिरावट
10.5% → 5.6%
60 वर्षों में राष्ट्रीय GDP में हिस्सेदारी आधी से भी कम रह गई
उद्योग की कमजोरी
12.3%
मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी — नीति आयोग ने इसे कमजोर बताया है
स्रोत: भारत सरकार GDP डेटा · नीति आयोग विस्तृत रिपोर्ट · MPI 2022-23
स्रोत: UDISE+ · राज्यसभा डेटा · Central Bureau of Health Intelligence · MoSPI · नीति आयोग · भारत सरकार | डेटा: 2011–2025
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बंगाल में स्कूलों का ड्रॉप आउट रेट

स्कूल ड्रॉप आउट को लेकर कुछ विश्वसनीय आंकड़े मौजूद हैं जो पश्चिम बंगाल की स्पष्ट तस्वीर दिखाते हैं। राज्यसभा में दिए गए डेटा से 2020 से लेकर 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण कर सकते हैं। नीचे दी गई टेबल से समझते हैं-

वर्षप्राथमिकउच्च प्राथमिक माध्यमिक
2020–210%0%13.26%
2021–228.62%0%17.98%
2022–238.10%3.40%8.50%
2023–240%0%17.80%
2024–251.40%3%20%
सोर्स: राज्यसभा डेटा

ऊपर दी गई टेबल से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में माध्यमिक शिक्षा का हाल काफी खराब है। लगातार छात्रों का ड्रॉप आउट रेट बढ़ता गया है। जो आंकड़ा 2020-21 में 13.26 फीसदी था, वो 2024-25 तक 20 फीसदी पहुंच चुका है। यह बताने के लिए काफी है कि राज्य में पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। दूसरे कई राज्य इस दिशा में बंगाल की तुलना में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। नीचे दी गई टेबल से टॉप पांच राज्यों की स्थिति समझें-

राज्य2020–21 (प्राथमिक)2024–25 (प्राथमिक)2020–21 (माध्यमिक)2024–25 (माध्यमिक)
केरल0.02%0.40%7.05%4.80%
हिमाचल प्रदेश1.89%0.50%7.62%6.60%
गुजरात1.02%0.20%23.31%16.90%
राजस्थान0.98%2.70%8.89%7.40%
पंजाब0%2.50%9.02%6.20%
सोर्स: राज्यसभा डेटा

स्वास्थ्य के क्षेत्र में कितना काम

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार दावा करती है कि पिछले 15 सालों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम हुआ है। कुछ पहलुओं को आंकड़ों की कसौटी पर परखने की कोशिश करते हैं। Central Bureau of Health Intelligence का डेटा बताता है कि पश्चिम बंगाल में 2011 के बाद से सरकारी डॉक्टरों की संख्या कितनी रही है। हैरानी की बात यह है कि सरकारी डॉक्टरों के आंकड़े काफी अस्थिर दिखाई देते हैं। कभी अचानक से अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखने को मिली है तो कभी भारी गिरावट। नीचे दी गई टेबल से बीते कुछ सालों का ट्रेंड समझते हैं-

वर्षसरकारी डॉक्टरों की संख्या
201110,854
20123,325
20139,474
20148,829
202190
202217,692
सोर्स: Central Bureau of Health Intelligence (नोट- 2015 से लेकर 2020 का विश्वनीय डेटा नहीं मिला है)

सरकारी अस्पतालों की संख्या

पश्चिम बंगाल में सरकारी अस्पताल को लेकर Central Bureau of Health Intelligence द्वारा आंकड़े दिए गए हैं। उन आंकड़ों के मुताबिक 2011 से सरकारी अस्पतालों की संख्या में बढ़ोतरी जरूर हुई है, लेकिन आगे चलकर आंकड़ा स्थिर रहा है, कोई बड़ी बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली है। उदाहरण के लिए 2019 में 1594 सरकारी अस्पताल बंगाल में दर्ज हुए, लेकिन 2020 में आंकड़ा 1510 रह गया। इसका मतलब है कि कुछ छोटे सरकारी अस्पतालों का मर्ज अप हुआ है। नीचे दी गई टेबल से 2011 से सरकारी अस्पतालों का ट्रेंड समझते हैं-

वर्षअस्पतालों की संख्या
2011654
20121,566
20131,566
20141,566
20191,594
20221,510
सोर्स: Central Bureau of Health Intelligence (नोट- 2014 से लेकर 2018 का विश्वनीय डेटा नहीं मिला है)

सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या

सिर्फ ज्यादा सरकारी अस्पताल बना देना किसी सरकार की कामयाबी नहीं हो सकती, वहां कैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, इस पर भी काफी कुछ निर्भर कर सकता है। पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में बेड की क्या व्यवस्था है, इसे लेकर भी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ हेल्थ इंटेलिजेंस डेटा देता है। डेटा के मुताबिक पश्चिम बंगाल में लगातार ही 2011 से सरकारी अस्पतालों में बेड की स्थिति सुधरती गई है। 2011 में जो आंकड़ा 71 हजार 191 बेड का था, 2022 में वो बढ़कर 97000 पहुंच गया, यानी कि सीधे-सीधे 36.3 फीसदी की बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली। नीचे दी गई टेबल से इस ट्रेंड को डीकोड करते हैं-

वर्षबेड की संख्या
201171,191
201277,210
201378,188
201478,566
201996,012
202297,000
सोर्स: Central Bureau of Health Intelligence

बंगाल के स्वास्थ्य बजट का विश्लेषण

पश्चिम बंगाल कुल राशि के लिहाज से स्वास्थ्य पर कम खर्च करता है, लेकिन पिछले कुछ सालों का ट्रेंड दिखाता है राज्य सरकार ने लगातार इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बंगाल सरकार के ही डेटा से पता चलता है कि 2017-18 में स्वास्थ्य पर 8 हजार 856 करोड़ खर्च हुए थे, 2023-24 तक वो आंकड़ा बढ़कर 18 हजार 490 करोड़ पहुंच गया। कोरोना काल में भी पश्चिम बंगाल ने स्वास्थ्य पर काफी खर्च किया है। 2019-20 में जो आंकड़ा 10 हजार 739 करोड़ था, 2020-21 में वो बढ़कर 12 हजार 831 पहुंच गया। 2025-26 की बात करें तो बंगाल सरकार ने बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 21 हजार 355 करोड़ रुपये आवंटित किए थे।

वर्षस्वास्थ्य खर्च / बजट (₹ करोड़)
2017–188,856
2019–2010,739
2020–2112,831
2023–2418,490
2025–2621,355
सोर्स: बंगाल सरकार का स्वास्थ्य बजट

दूसरे शब्दों में कहें तो पश्चिम बंगाल में 2017-18 में स्वास्थ्य पर खर्च राज्य के कुल व्यय का 5.5 फीसदी रहा था। 2021-22 में ये आंकड़ा बढ़कर 7.4 प्रतिशत पहुंच गया। देश की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति कहती है कि राज्यों के कुल बजट का 8 फीसदी स्वास्थ्य पर खर्च होना चाहिए, उस लिहाज से बंगाल उस लक्ष्य से अभी कुछ दूर जरूर है, लेकिन वो आगे जरूर बढ़ रहा है।

बंगाल में कितनी बेरोजगारी?

बंगाल की ममता सरकार ने नौकरियों को लेकर कई दावे किए हैं। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey) 2025 बताता है कि बंगाल में वर्तमान में 15 से 29 वर्ष के लोगों के बीच में बेरोजगारी दर 10.6 फीसदी चल रही है, राष्ट्रीय औसत 9.9 फीसदी है। ग्रामीण बेरोजगारी दर की बात करें तो बंगाल में यह आंकड़ा 9.4 फीसदी चल रहा है, शहरी बेरोजगारी दर का आंकड़ा 13.9 फीसदी है।

अगर सभी एज ग्रुप की बात करें तो बंगाल में ग्रामीण बेरोजगारी दर 2.4 फीसदी है, वहीं शहरी बेरोजगारी दर 3.9 फीसदी दर्ज की गई है। कुल आंकड़ा 2.8 फीसदी का बैठता है। पिछले चार सालों का ट्रेंड भी कुछ पहलुओं पर रोशनी डालता है। नीचे दी गई टेबल से समझते हैं-

वर्षभारत (%)पश्चिम बंगाल (%)
202210.90%8.40%
202310.00%8.10%
202410.30%9.70%
20259.90%10.60%
स्रोत: MoSPI

बंगाल में बेरोजगारी सिर्फ कम पढ़े-लिखों तक सीमित नहीं है। ग्रेजुएट और डिप्लोमा धारक भी बड़ी संख्या में नौकरी की तलाश में हैं। नीचे दी गई टेबल से देखें, किस शिक्षा स्तर पर कितने प्रतिशत लोग बेरोजगार चल रहे हैं-

शिक्षा स्तरपुरुष (%)महिला (%)
पोस्ट ग्रेजुएट2.90%15.40%
ग्रेजुएट7.10%12.50%
डिप्लोमा5.70%13.80%
हायर सेकेंडरी4.00%7.70%
सेकेंडरी1.70%6.00%
मिडिल2.60%2.00%
प्राइमरी1.10%0.70%
अनपढ़ (Illiterate)0.30%0.10%
स्रोत: MoSPI

बंगाल में कितने लोग गरीबी से बाहर आए?

नीति आयोग के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 2016 से 2021 के बीच में 92.58 लाख लोग गरीबी से बाहर आए हैं। 2016 में पश्चिम बंगाल में गरीबी दर 21.3 फीसदी थी, 2021 आते-आते 9.4 फीसदी की गिरावट देखने को मिली और आंकड़ा 11.9 फीसदी पर आ गया। 2022-23 को लेकर Multidimensional Poverty Index का डेटा बताता है कि बंगाल में गरीबी दर 8.60 फीसदी पहुंच गई है। देश के कुल राज्यों में बंगाल इस मामले में 15वें पायदान पर आता है।

देश की जीडीबी में बंगाल का कितना हिस्सा?

देश की जीडीपी में पश्चिम बंगाल का हिस्सा 2023-24 में सिर्फ 5.7 फीसदी रहा। 1960 में जहां बंगाल देश की जीडीपी में 10.5 फीसदी की हिस्सेदारी दे रहा था, साल दर साल वो घटता रहा और अब आंकड़ा मात्र 5.7 फीसदी पर सिमट गया है। जानकार मानते हैं कि बंगाल में समय के साथ ओद्योगिकीकरण कमजोर होता गया है, उसी वजह से आर्थिक मोर्चे पर उसके सामने कई चुनौतियां पेश हुई हैं। नीचे दी गई टेबल से इस ट्रेंड को समझिए-

वर्षजीडीपी में हिस्सेदारी (%)
1960–6110.50%
1970–719.70%
1980–818.80%
1990–917.90%
2000–018.20%
2010–116.70%
2020–215.70%
2023–245.60%
सोर्स: भारत सरकार

नीति आयोग की विस्तृत रिपोर्ट बताती है कि पश्चिम बंगाल अभी भी एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां पर उद्योग से जुड़े विभाग अभी भी कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। नीचे दी गई टेबल से 2012–13 से 2021–22 की औसत हिस्सेदारी समझने की कोशिश करते हैं।

सेक्टरहिस्सेदारी (%)
कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां23.60%
व्यापार, होटल और रेस्टोरेंट15.90%
रियल एस्टेट, आवास एवं व्यवसाय सेवाएं12.70%
विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग)12.30%
अन्य सेवाएं8.30%
निर्माण (कंस्ट्रक्शन)7.40%
परिवहन, भंडारण और संचार6.50%
बैंकिंग और बीमा5.30%
सार्वजनिक प्रशासन5.00%
बिजली, गैस और जल आपूर्ति2.00%
खनन एवं उत्खनन1.00%
2012–13 से 2021–22 की औसत हिस्सेदारी, सोर्स: नीति आयोग

बंगाल का वित्तीय घाटा क्या कहता?

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में पश्चिम बंगाल का वित्तीय घाटा 3.6 फीसदी है। राष्ट्रीय औसत से यह अभी भी ज्यादा है, लेकिन फिर भी नियंत्रण में कहा जा सकता। बंगाल का वित्तीय घाटे का ट्रेंड बताता है कि राज्य ने समय के साथ अपनी आर्थिक सेहत में सुधार किया है। नीति आयोग ने बंगाल के वित्तीय घाटे को लेकर एक स्पष्ट तस्वीर अपनी रिपोर्ट में पेश की थी-

सालघाटा (%)
1998–998.80%
2010–116.30%
2022–234.00%
सोर्स: नीति आयोग

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