West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। गुरुवार को पहले चरण के मतदान में 92.14% वोटिंग हुई। यह चुनाव चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के बाद हो रहे थे। इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से करीब 11% नाम हटा दिए गए थे। इसके चलते 27.10 लाख और वोटरों का भविष्य अधर में लटका हुआ था। उनकी अपीलें अभी भी ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं।

तमिलनाडु में भी वोटिंग ने पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 84.98% वोटिंग हुई है। पिछले विधानसभा चुनावों में राज्य में 72.73% मतदान हुआ था।

पश्चिम बंगाल की कितनी सीटों पर हुआ मतदान?

पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर गुरुवार को मतदान हुआ। इसमें कुल 1478 उम्मीदवार मैदान में उतरे। बाकी बची हुई सीटों पर 29 अप्रैल को वोटिंग होगी।

1951 से अब तक का सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 84.33% रहा था। 2011 में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सत्ता में आकर CPI(M) के 34 साल के शासन का अंत किया था। 2021 के विधानसभा चुनावों में राज्य में 81.56% मतदान दर्ज किया गया।

मुर्शिदाबाद जिले के समसेरगंज इलाके में, जहां पहले सबसे ज्यादा लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, वहां भी शाम 5 बजे तक करीब 95.34% मतदान हुआ। यह जानकारी ECINET ऐप के अनुसार है। जिन अन्य जगहों पर भी सबसे ज्यादा नाम हटाए गए थे, वहां भी काफी लोगों ने वोट डाले। लालगोला (मुर्शिदाबाद) में 95.07%, भगवांगोला (मुर्शिदाबाद) में 95.31%, रघुनाथपुर में 88.69%, फरक्का (मुर्शिदाबाद) में 94.61%, मतदान हुआ। चुनाव आयोग की तरफ से सीएपीएफ के कर्मियों की भारी तैनाती की गई थी।

मतदान हिंसा-मुक्त रहा-सुब्रता गुप्ता

बंगाल में चुनाव आयोग के स्पेशल इलेक्शन ऑब्जर्वर सुब्रता गुप्ता ने कहा कि कुछ छिटपुट घटनाओं को छोड़कर, मतदान हिंसा-मुक्त रहा। उन्होंने कहा, “हम हर शिकायत पर कार्रवाई कर रहे हैं। हमें जितनी भी शिकायतें मिली हैं, उन सभी पर कार्रवाई की जा रही है। ईवीएम से संबंधित शिकायतों के बारे में हमने पीठासीन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में हमने तुरंत सीएपीएफ की क्यूआरटी से संपर्क किया है। मैंने जांच रिपोर्ट मांगी है और उसके आधार पर हम कार्रवाई करेंगे।”

पश्चिम बंगाल में पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई विवादित एसआईआर प्रक्रिया के बाद चुनाव हुए। पहले हर साल और चुनाव से पहले स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) किया जाता था, जिसमें सिर्फ कुछ सुधार किए जाते थे। लेकिन इस बार आयोग ने गहन संशोधन (SIR) किया, जिसमें पूरी मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार किया गया।

2025-2026 की एसआईआर प्रक्रिया अलग थी। इसमें हर रजिस्टर्ड वोटर्स को फॉर्म जमा करना पड़ा। कुछ लोगों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा बताए गए 13 तरह के दस्तावेज देने पड़े। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने ईआरओ के फैसलों की समीक्षा के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर भी नियुक्त किए।

बीजेपी का खेल खत्म हो गया- टीएमसी

गुरुवार शाम मतदान खत्म होने के बाद टीएमसी ने एक बयान में कहा, “चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर के माध्यम से 91 लाख नाम हटाए जाने के बावजूद, बंगाल में रिकॉर्ड मतदान हुआ है। बीजेपी का खेल खत्म हो गया है।” उसने कहा कि भारी मतदान का कारण यह है कि बंगाल के लोग जानते हैं कि यह उनके भविष्य को सुरक्षित करने का उनका आखिरी वास्तविक अवसर हो सकता है।

टीएमसी के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का सूरज डूब गया- अमित शाह

पार्टी ने कहा, “वे एनआरसी और परिसीमन के खतरे को अपने सामने स्पष्ट रूप से देख रहे हैं और उन्होंने बीजेपी की हर भावी साजिश को नाकाम करने के लिए पूरी ताकत से मतदान किया है।” गुरुवार को कोलकाता में मौजूद गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “टीएमसी के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का सूरज डूब गया है।”

पीएम मोदी ने टीएमसी पर कसा तंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बंगाल में एक चुनावी रैली के दौरान घोषणा की कि 4 मई को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव परिणाम घोषित होने पर मिठाइयां और साथ ही झालमुड़ी बांटी जाएगी। पढ़ें पूरी खबर…