पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज 9 मई 2026 शनिवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब राज्य में एक नए राजनीतिक घटनाक्रम के तहत भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। नंदीग्राम से विधायक और लंबे समय तक विपक्ष के नेता रहे शुभेंदु अधिकारी ने इस शपथ के साथ राज्य की कमान संभाल ली। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर उनका आभार जताया।
शपथ ग्रहण समारोह में कई भाजपा नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली और नई सरकार का हिस्सा बने। इनमें सबसे प्रमुख नाम निशीथ प्रमाणिक का रहा, जो पहले केंद्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। उनके साथ दिलीप घोष ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जो लंबे समय तक पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं।
| पद | नाम | संक्षिप्त जानकारी |
|---|---|---|
| मुख्यमंत्री | शुभेंदु अधिकारी | नंदीग्राम से विधायक, पूर्व विपक्ष नेता; रिपोर्ट्स के अनुसार नए मुख्यमंत्री |
| मंत्री | निशीथ प्रमाणिक | पूर्व केंद्रीय मंत्री, संगठन और प्रशासनिक अनुभव रखने वाले नेता |
| मंत्री | दिलीप घोष | भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मजबूत संगठनात्मक चेहरा |
| मंत्री | क्षुदिराम टुडू | क्षेत्रीय स्तर पर सक्रिय आदिवासी नेता, जमीनी पकड़ वाले विधायक |
| मंत्री | अशोक कीर्तनिया | उत्तर बंगाल क्षेत्र से जुड़े नेता, स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका |
| मंत्री | अग्निमित्रा पॉल | आसनसोल दक्षिण से विधायक, महिला नेतृत्व में उभरता चेहरा |
इसके अलावा क्षुदिराम टुडू और अशोक कीर्तनिया ने भी मंत्री पद की शपथ ली। दोनों नेताओं को जमीनी स्तर पर सक्रिय और अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाला नेता माना जाता है। वहीं, आसनसोल दक्षिण से विधायक अग्निमित्रा पॉल ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर नई कैबिनेट में जगह बनाई। वे पार्टी की महिला इकाई में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह नई मंत्रिपरिषद क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। हालांकि पूरी सूची और विभागों का आधिकारिक आवंटन अभी अंतिम रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, समर्थक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां लंबे समय बाद सत्ता में नया नेतृत्व सामने आया है।
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में टकराव अगर किसी एक चेहरे से पहचाना जाता है, तो वह शुभेंदु अधिकारी हैं। यह वह नेता नहीं हैं जो बयान देकर माहौल संभालते हैं, बल्कि वह हैं जो सीधे मैदान में उतरकर लड़ाई तय करते हैं। नंदीग्राम से निकली उनकी राजनीति ने सिर्फ जमीन का विवाद नहीं बदला, बल्कि सत्ता की दिशा भी मोड़ दी। और फिर वही शुभेंदु, जो कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपाही माने जाते थे, 2020 में पाला बदलकर उसी सत्ता के सबसे बड़े चुनौतीकर्ता बन गए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
