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ममता बनर्जी का फरमान- TMC के जिस विधायक, सांसद, पार्षद ने वसूले हैं ‘कट मनी’, फौरन करें वापस

कोलकाता में एक रियल एस्टेट कारोबारी सुमंत चौधरी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि 2012 से 2018 के बीच उन्हें टीएमसी के पार्षद शांतनु सेन को 40 लाख रुपये दिए थे, जो अब राज्यसभा सांसद और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (Express Photo)

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि टीएमसी के जिन विधायकों, सांसदों और पार्षदों ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी से ‘कट मनी’ की वसूली की है, वे फौरन वापस करें। दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने आरोप लगाया था कि बंगाल में टीएमसी नेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर ‘कट मनी’ की वसूली की गई है। इसके बाद किसान से लेकर व्यवसायी तक सैंकड़ों लोग सार्वजनिक रूप से उन टीएमसी नेताओं का नाम ले रहे हैं, जिन्होंने पैसे लिए हैं।

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों को ऐसा लगता है कि जिस तरह से लोग ‘कट मनी’ को लेकर टीएमसी नेताओं का नाम ले रहे हैं, उससे 2020 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव और 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों में टीएमसी को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बीते 18 जून को कोलकाता में स्थानीय निकाय के नेताओं को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा था कि जिन्होंने भी आम लोगों से ‘कट मनी’ या कमीशन लिए हैं, वे उसे तुरंत वापस करें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ टीएमसी नेता मृतकों को भी नहीं छोड़ते हैं और राज्य सरकार की 2,000 रुपये की राशि जारी करने के लिए 200 रुपये का कमीशन लेते हैं, जो गरीब लोगों को परिवार के सदस्यों का दाह संस्कार करने के लिए दिया जाता है।

19 जून को मालदा जिले के रतुरा में एक बड़े प्रदर्शन के बाद पुलिस ने निर्मल बांग्ला परियोजना निधि से एक करोड़ रुपये के गबन के आरोप में पूर्व ग्राम पंचायत प्रधान सुकेश यादव को गिरफ्तार किया था। इसी मामले में एक सरकारी कर्मचारी प्रमोद कुमार सरकार को भी शनिवार को गिरफ्तार किया गया था। कमीशन और ‘कट मनी’ को लेकर पूरे राज्य में लगभग हर दिन प्रदर्शन हो रहे हैं। आरोप है कि पंचायत सदस्य और स्थानीय निकाय नेता से लेकर राज्यसभा सांसदों तक ने ‘कट मनी’ लिए।

शनिवार को टीएमसी ने भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद कोलकाता के दक्षिणी इलाकों में राजपुर-सोनारपुर नगरपालिका के उपाध्यक्ष शांता सरकार को हटा दिया। अध्यक्ष पल्लब कुमार दास ने कहा, “मैंने केवल पार्टी से आदेशों का पालन किया। मुझे नहीं पता कि ऐसा क्यों किया गया था, लेकिन वाइस चेयरमैन का पद खत्म कर दिया गया है।”

मंगलकोट में टीएमसी पंचायत के नेता कलिमोय गंगोपाध्याय ने कहा, “मैंने टीएमसी के स्थानीय अध्यक्ष रमजान शेख के निर्देश पर पैसा लिया। उन्होंने हमें बताया कि पार्टी स्थानीय संगठन को चलाने के लिए कोई पैसा नहीं देगी और हमें ग्रामीणों से पैसे लेकर अपने धन की व्यवस्था करनी होगी।” गंगोपाध्याय के सहयोगी अपूर्व घोष ने कहा, “हमने लगभग 3 लाख रुपये जुटाए। हम अपनी जमीन बेच देंगे और पैसा लौटा देंगे।” वहीं, रामजन शेख ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “वे (दो आरोपी नेता) हमारी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। इसका यह नाटक भाजपा ने किया है।”

कोलकाता में एक रियल एस्टेट कारोबारी सुमंत चौधरी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि 2012 से 2018 के बीच उन्हें टीएमसी के पार्षद शांतनु सेन को 40 लाख रुपये दिए थे, जो अब राज्यसभा सांसद और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा, “2012 से मैं टीएमसी को पैसे दिए बिना अपना व्यवसाय करने में सक्षम नहीं हूं। मैं अपनी बात कहने में तब सक्षम हो पाया हूं, जब ममता बनर्जी ने हमें खुलकर बोलने को कहा है।” वहीं, सेन ने कहा कि आरोप झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं और वह मानहानि का मुकदमा करेंगे।

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