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पश्चिम बंगालः ‘दीदी को बोलो’ कैंपेन से TMC नेताओं की फजीहत, ‘कट मनी’ पर जवाब देते नहीं बन रहा

हालांकि, इस मुहिम की जद में पार्टी के भी लोग आ जा रहे हैं। टीएमसी नेता के मुताबिक, "लोगों ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके धन-उगाही, कट मनी और सिंडिकेट की शिकायत दर्ज कराई है।

Mamata Banerjee, TMC, Trinamool Congress, CM, West Bengal, Cut Money, Trinamool Congress, Didi, Didi Ke Bolo, Didi Ke Bolo Campaign, Party Leaders, Tough Time, India News, National News, Hindi News, Jansatta Newsपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (फोटोः पीटीआई)

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) चीफ ममता बनर्जी की मुहिम “दीदी को बोलो” लोगों के बीच काफी सुर्खियां बटोर रही है। इसी कैंपेन के चलते टीएमसी की पहुंच लोगों तक पहुंच तो हो रही है, पर साथ ही स्थानीय नेता और कार्यकर्ताओं की फजीहत भी बढ़ गई है। दरअसल, स्थानीय नेताओं को “कट मनी” पर लोगों के सवालों का जवाब भी देना पड़ रहा है। ऐसे में स्थानीय नेतृत्व खुद को इस मुहिम से अपमानित महसूस कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जवाब देते नहीं बन रहा। पश्चिम बंगाल में ‘कट मनी’ यानी कम के बदले पैसे देने का प्रचलन सामने आया। गौर करने वाली बात यह है कि इसके आरोपों के घेरे में टीएमसी के ही नेता और कार्यकर्ता आ गए हैं।

बता दें कि चुनावी राजनीति के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के सुझाव पर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने 29 जुलाई को “दीदी को बोलो” नाम से कैंपेन शुरू किया था, जिसका मकसद लोगों का मुख्यमंत्री से सीधा संवाद स्थापित करना और उनकी परेशानियों का निपटारा करना था।

मुहिम ने पार्टी के भीतर बिचौलिए का खेल खेलने वालों का धंधा ही बंद कर दिया और लोगों ने भी पुराने काम के लिए दिए गए पैसों का हिसाब मांगना शुरू कर दिया। रिपोर्ट्स में आगे यह भी कहा गया कि इस प्रोग्राम के तहत 1000 पार्टी नेताओं ने तकरीबन 10,000 गांवों का दौरा किया और लोगों की शिकायतों का निपटारा किया है।

टीएमसी कार्यकर्ताओं और नेताओं के सामने इस मुहिम के चलते काफी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं, क्योंकि शिकायत सामने आते ही उनके कंधे पर उसके तुरंत निपटारे की चुनौती भी है।

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए साक्षात्कार में टीएमसी के एक नेता ने बताया, “संकट में फंसे लोगों का फोन आते ही हम स्थानीय टीएमसी नेता और संबंधित विभाग को फोन करते हैं और मामले का समाधान करने के लिए बोलते हैं। सभी शिकायतों का निपटारा 24 घंटे के भीतर कर दिया जाता है।” टीएमसी नेताओं का यह भी दावा है कि उन्होंने कर्नाटक और केरल में आई बाढ़ में फंसे पश्चिम बंगाल के लोगों को भी बचाने का काम किया।

हालांकि, इस मुहिम की जद में पार्टी के भी लोग आ जा रहे हैं। टीएमसी नेता के मुताबिक, “लोगों ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके धन-उगाही, कट मनी और सिंडिकेट की शिकायत दर्ज कराई है। पीटीआई से बातचीत में टीएमसी नेता ने कहा, “फिलहाल हम लोगों के सवालों का जवाब देते हुए काफी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। लेकिन हम लोगों को आश्वासन दे रहे हैं कि मुमकिन कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”

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