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कांग्रेस से निष्कासन की खबर सुन मां संग खूब रोई थीं ममता बनर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष ने ठुकरा दिया था सोनिया का प्रस्ताव

कांग्रेस की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी नहीं चाहती थी कि ममता बनर्जी कांग्रेस छोड़ें। उन्होंने ममता की शिकायतों को हल करने के लिए ऑस्कर फर्नांडीस से ममता बनर्जी और अजीत पांजा से परामर्श से एक नोट बनाने को कहा।

sonia gandhiटीएमसी नेता ममता बनर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी। (Source: Express Archive)

बात करीब 22 साल पुरानी है। 22 दिसंबर, 1997 को बेंगलुरु में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) का अधिवेशन कवर कर रहे एक पत्रकार ने ममता बनर्जी को बताया कि पार्टी उन्हें निष्कासित करने पर विचार कर रही है। इस बीच आनन-फानन में ममता बनर्जी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और ऐलान किया कि वह अपने समर्थकों के साथ अगले लोकसभा चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी की प्रेस कॉन्फ्रेंस अभी चल ही रही थी कि एक संदेश आया कि उन्हें छह साल के लिए कांग्रेस निकाल दिया गया।

इससे उदास और भावनात्मक रूप से आहत ममता अपनी मां से मिलने के लिए पहुंची थी। ममता की मां गायत्री देवी जो अबतक उन्हें कांग्रेस में ही रहने के लिए मना रही थी। चूंकि यह वही पार्टी थी जिसमें उनके दिवंगत पति की खूब निष्ठा थी। मगर जब उन्होंने बेटी के पार्टी से निष्कासन की खबर सुनी तो दोनों मां-बेटी खूब रोईं थीं। उन्होंने भावुक होते हुए अपनी बेटी से कहा था, ‘अब दोबारा तुमसे कांग्रेस में रहने के लिए नहीं कहूंगी। आगे बढ़ो और तृणमूल के लिए काम करो। मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी नहीं चाहती थी कि ममता बनर्जी कांग्रेस छोड़ें। उन्होंने ममता की शिकायतों को हल करने के लिए ऑस्कर फर्नांडीस से ममता बनर्जी और अजीत पांजा से परामर्श से एक नोट बनाने को कहा था। फर्नांडीस तब पश्चिम बंगाल में AICC के प्रभारी महासचिव थे। सोनिया गांधी भी तब बंगाल में राजनीतिक उठा-पटक के मामले में खासी रुचि ले रही थी। ममता बनर्जी को भी उम्मीद थी कि कोई समाधान जरूर निकलेगा। मगर वास्तविक रूप से कोई समधान नहीं हो पाया। नोट तैयार करने के बाद ऑस्कर ममता के संपर्क में नहीं आए थे।

शुतापा पॉल की किताब ‘दीदी: द अनटोल्ड ममता बनर्जी’ के मुताबिक दूसरी तरफ चुनाव आयोग द्वारा तय मानकों के मुताबिक तब राजनीचिक पार्टी को पंजीकृत करने की समयसीमा 17 दिसंबर थी। इसी बीच ममता को शक होने लगा कि उनके साथ धोखा हो सकता है। बहुत देर बाद जब ऑस्कर की कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो ममता ने टीएमसी को एक अलग पार्टी के रूप में पंजीकृत करने के अपने संकल्प को मजबूत किया।

खास बात है कि इस बीच सोनिया ने तब के कांग्रेस प्रमुख सीताराम केसरी से ममता को कांग्रेस में बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने आधी रात में 10, जनपथ के दरवाजे खुलवाए थे। जब ममता बनर्जी सोनिया गांधी से मिलने पहुंची थीं तब उन्होंने कहा था कि ‘वे राजीव गांधी के लिए कुछ भी कर सकती हैं लेकिन कांग्रेस में नहीं रहेंगी क्योंकि प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस में ममता विरोधी धड़ा खोल रखा है।’

ममता ने 10, जनपथ से बाहर निकलने से पहले सोनिया से कहा था, ‘अब बहुत देर हो चुकी है। जब आपने मध्यस्थता शुरू की तो मैंने नौ दिनों तक इंतज़ार किया। लेकिन पार्टी अध्यक्ष सीताराम केसरी मुझे केवल कैंपेनिंग कमेटी का मुखिया बनाने की बात कह रहे हैं, मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं। तृणमूल कांग्रेस इसका करारा जवाब देगी।’

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