पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर चढ़ते सियासी पारे के बीच राजनीतिक दलों ने राज्य की राजधानी कोलकाता को लेकर नई रणनीति तैयार की है। इस चुनाव में भाजपा जहां शहरी मध्यम वर्ग और व्यापारियों के साथ युवाओं को लुभाने में जुटी हुई है। वहीं तृणमूल कांग्रेस अपने पारंपरिक मतदाताओं के साथ युवाओं पर ध्यान लगा रही है। जबकि कांग्रेस व वाम गठबंधन ने इस चुनाव में पुराने जनाधार की तलाश तेज कर दी है।
दक्षिण बंगाल में स्थित कोलकाता जिले में कुल 11 विधानसभा हैं। इनमें कोलकाता बंदरगाह, भवानीपुर, रासबिहारी, बालीगंज, चौरंगी, इंटेली, बेलेघाटा, जोरासांको, श्यामपुकुर, मानिकतला और काशीपुर-बेलगछिया विधानसभा पर पिछले 15 सालों से तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है।
2006 में साथ लड़े थे टीएमसी और बीजेपी
साल 2006 के चुनाव में यहां वाम गठबंधन मजबूत था, उस समय तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ा। राजग गठबंधन ने उस समय केवल 31 सीटें जीती। इसमें 30 सीटें तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई। जबकि भाजपा खाता भी खोल नहीं पाई।
साल 2011 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के रास्ते अलग-अलग हो गए। साल 2011 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने कोलकाता के सभी 11 सीटों पर जीत दर्ज कर राज्य में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। भाजपा इस चुनाव में तीसरे नंबर पर रही। वहीं साल 2016 और 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर से इन सभी सीटों पर कब्जा किया और भाजपा दूसरे नंबर पर रही।
शहरी मध्यम वर्ग कोलकाता में सबसे ज्यादा
स्थानीय नेताओं का कहना है कि संख्या के लिहाज से कोलकाता जिले में सबसे बड़ा वोट बैंक शहरी मध्यम वर्ग और बंगाली भाषी मतदाता हैं। यहां बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक और युवा मतदाता भी हैं। इनके बीच रोजगार और महंगाई बड़ा चुनावी मुद्दा है। शहरी मध्यम वर्ग में सरकारी कर्मचारी, निजी नौकरीपेशा, छोटे व्यापारी और पेशेवर शामिल हैं।
अक्सर इनके बीच चुनावी मुद्दे बदलते रहते हैं। जबकि बंगाली भाषी के बीच पारंपरिक रूप से स्थानीय मुद्दों, सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय राजनीति को लेकर प्रचार किया जा रहा है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों इस वर्ग पर विशेष ध्यान दे रहे हैं।
मुस्लिम मतदाता की संख्या भी काफी
इसके अलावा कुछ इलाकों में मुस्लिम मतदाता की संख्या भी काफी है। इस बार तृणमूल कांग्रेस के अलावा कांग्रेस और वाम गठबंधन भी इस और विशेष ध्यान दे रहा है। बड़ा बाजार जैसे क्षेत्रों में मारवाड़ी और अन्य व्यापारी समुदाय का प्रभाव माना जाता है। इन्हें लेकर भाजपा ने विशेष घोषणाएं की है।
कोलकाता जिले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन का कहना है कि भाजपा इस जिले में खाता भी नहीं खोल पाएगी। पिछले चुनाव से इस जिले में हमेशा तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ही जीतते हुए आए हैं। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहरी मतदाता इस बार भाजपा के पक्ष में है। जो चुनावी परिणाम को बदल देंगे।
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राजनीतिक विश्लेषक मैदुल इस्लाम ने कहा, मुर्शिदाबाद की 22, उत्तर दिनाजपुर की 9 और मालदा की 12 सीट समेत कुल 43 सीटें मुसलिम बाहुल्य हैं। उन्होंने कहा, हुमायूं कबीर के गठबंधन से एआइएमआइएम के अलग होने से अब मतदाताओं का रुख तेजी से बदलने की आशंका जताई जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
