पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब भारत में भी दिखने लगा है। इस टकराव के कारण देश में कमर्शियल एलपीजी यानी रसोई गैस के सिलेंडरों की कमी होने लगी है। इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो अपने रोजमर्रा के काम के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। इनमें रेस्टोरेंट और होटल, सड़क किनारे खाने-पीने की दुकानें, ऑटो-रिक्शा चालक और कपड़े धोने वाली लॉन्ड्री सेवाएं शामिल हैं। कई जगहों पर गैस की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है।
दरअसल यह संकट पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव की वजह से पैदा हुआ है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष के चलते समुद्री जहाजों की आवाजाही अहम समुद्री रास्ते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से लगभग रुक गई है। यह संकरा समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है। भारत अपने एलपीजी आयात का 80 प्रतिशत से भी ज्यादा इसी रास्ते से करता है, इसलिए जहाजों की आवाजाही रुकने से आपूर्ति प्रभावित हुई है।
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने तेल रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करें और फिलहाल उपलब्ध गैस को केवल घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को ही प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराया जाए।
इस कमी का असर सबसे पहले बड़े शहरों में दिखाई देने लगा है। बेंगलुरु में कई रेस्टोरेंट, खासकर शहर के बिजनेस इलाकों में, अपने कामकाज को सीमित करने लगे हैं। बृहत बेंगलुरु होटल मालिक संघ (Bruhat Bengaluru Hotel Owners Association) ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि अगर कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई बंद रही तो शहर के रेस्टोरेंट बंद करने पड़ सकते हैं।
संघ के अध्यक्ष पी.सी. राव ने बताया कि रेस्टोरेंट्स को कमर्शियल सिलेंडर मिल ही नहीं रहे हैं और उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की। उनके अनुसार सोमवार सुबह से ही सप्लायर्स ने गैस देना बंद कर दिया, जिससे शहर के करीब 25 से 30 होटल प्रभावित हुए।
शहर के केंगेरी इलाके में रेस्टोरेंट चलाने वाले रमेश चंद्र ने बताया कि लगातार दूसरे दिन भी उन्हें कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके पास अभी चार-पांच सिलेंडर बचे हैं और जब तक स्टॉक रहेगा तब तक होटल चलाएंगे। लेकिन वे रोज़ाना दो से चार सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उन्हें नहीं पता कि अगला दिन होटल खुल पाएगा या नहीं।
मंगलवार दोपहर तक कुछ रेस्टोरेंट्स ने अपना मेन्यू भी छोटा करना शुरू कर दिया। इन्फैंट्री रोड पर स्थित ‘बैंगलोर थिंडी’ नाम का एक मशहूर फूड स्पॉट, जहां आम तौर पर लंच के समय काफी भीड़ रहती है, उसने फिलहाल सिर्फ पेय पदार्थ ही देने की घोषणा कर दी।
इस मामले को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) को पत्र लिखकर समस्या का समाधान करने की मांग की है। वहीं बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या (Tejasvi Surya) ने भी मंत्री को पत्र भेजकर इस मुद्दे पर ध्यान दिलाया।
इसी तरह तमिलनाडु में भी कई होटल और रेस्टोरेंट ने बताया कि उनके पास कमर्शियल एलपीजी का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। कई जगहों पर गैस बचाने के लिए खाने के आइटम कम कर दिए गए हैं। चेन्नई के कई रेस्टोरेंट्स ने फ्राइड राइस, साइड डिश और अप्पम जैसे ऐसे व्यंजन बंद कर दिए हैं जिनमें ज्यादा गैस लगती है।
राज्य के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन (M. K. Stalin) ने इस स्थिति पर समीक्षा बैठक की और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर केंद्र से अनुरोध किया कि इस संकट का असर आम लोगों, व्यापारिक संस्थानों और सूक्ष्म-लघु उद्योगों पर न पड़े।
ओडिशा में होटल संघ ने भी बताया कि गैस की कमी से कई प्रतिष्ठानों की सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। संघ के अध्यक्ष जे.के. मोहंती ने कहा कि होटल और रेस्टोरेंट पूरी तरह कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर होते हैं। सप्लाई रुकने से खाना बनाने और सर्विस देने में दिक्कत हो रही है। अगर यही स्थिति रही तो होटल बंद करने, बुकिंग रद्द करने और पर्यटकों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
पंजाब के पंजाब होटल और रेस्तरां मालिक संघ (Punjab Hotel and Restaurant Owners Association) ने भी इस संकट पर चर्चा के लिए लुधियाना में आपात बैठक बुलाई है ताकि आगे की स्थिति और संभावित विकल्पों पर विचार किया जा सके।
मुंबई में यह संकट केवल होटल और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। शहर की लॉन्ड्री सेवाएं भी इससे प्रभावित हुई हैं। 136 साल पुराना महालक्ष्मी धोबी घाट (Mahalaxmi Dhobi Ghat) भी इस कमी से जूझ रहा है। यहां कई धोबी कपड़े सुखाने के लिए एलपीजी से चलने वाली मशीनों का इस्तेमाल करते हैं। गैस की कमी के कारण कपड़े सुखाने में देरी हो रही है और डिलीवरी कई दिनों तक टल रही है।
वहीं कोलकाता में ऑटो-रिक्शा चालक भी इस संकट से काफी परेशान हैं। शहर के बाहरी इलाकों में अधिकांश ऑटो एलपीजी से चलते हैं। मंगलवार को गैस भरवाने के लिए ऑटो की कई किलोमीटर लंबी लाइनें लग गईं।
एक ऑटो चालक राजा मंडल ने बताया कि वह तीन घंटे से लाइन में खड़े हैं, जबकि उनके एक दोस्त को पिछले दिन छह घंटे इंतजार करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। गैस की कमी के कारण सड़कों पर ऑटो कम हो गए हैं, जिससे यात्रियों को भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इस तरह पश्चिम एशिया में बढ़ा यह संघर्ष अब भारत में कई सेवाओं और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगा है।
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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से दुनिया के ज्यादातर देश प्रभावित हैं। भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने तो युद्ध के प्रभावों को कम करने के लिए कई उपायों का ऐलान किया है। भारत सरकार ने भी हालातों को देखते हुए मंगलवार को आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत प्राकृतिक गैस की सप्लाई को नियंत्रित करने का निर्देश दे दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
पश्चिम एशिया संकट का असर: यूपी में कमर्शियल एलपीजी की किल्लत, होटल-रेस्टोरेंट बंद होने का खतरा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एलपीजी और ईंधन आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 जारी किया है जिसके तहत गैस के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य जरूरी क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इस बीच पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्तर प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच , राज्य भर के कई होटल बंद हो सकते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
मुंबई में धीमी आंच पर पकने वाले खाने पर संकट, ईरान युद्ध के कारण LPG की किल्लत, रेस्टोरेंट ने मेनू से हटाईं ये डिशेज
क्या आपको दादर के दशकों पुराने चीनी रेस्टोरेंट जिप्सी में मिलने वाली धीमी आंच पर पकी दाल मखनी या शेजवान सॉस का स्वाद पसंद है? हो सकता है कि अब उनका स्वाद पहले जैसा न हो। जिप्सी का रोस्ट चिकन या पेकिंग डक भी शायद मेनू से हटा दिया जाए। मुंबई के नरीमन प्वाइंट से लेकर दहिसर और मुलुंड तक के रेस्टोरेंट मालिक, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी के कारण बाधा पैदा होने से निपटने के लिए मेनू में बदलाव कर रहे हैं। खाना पकाने के प्रोसेस को छोटा कर रहे हैं और धीमी आंच पर पकाए जाने वाले व्यंजनों को बंद करने पर विचार कर रहे हैं। आपूर्तिकर्ताओं ने इस बाधा का कारण पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को बताया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
