दो भारतीयों के लिए अमेरिकी सपना लगभग एक बुरे सपने में बदल गया था। ध्रुव पटेल और दीपिका पटेल अमेरिका में एक नई जिंदगी शुरू करना चाहते थे, रास्ते में अगवा कर लिए गए और उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्हें तभी बचाया जा सका जब चिंतित परिवार ने एक सांसद से संपर्क किया। फिर सांसद ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया।
गुजरात के झाखरिया गांव के 22 साल के ध्रुव पटेल और कंथारिया की 32 साल की दीपिका पटेल को अमेरिका जाते समय अजरबैजान की राजधानी बाकू में अगवा कर लिया गया। उनके परिवार और आनंद के सांसद मितेश पटेल के बयानों के अनुसार, उन्हें फिरौती के लिए बंधक बनाया गया, पीटा गया और उनकी किडनी निकालकर बेचने की धमकी दी गई।
वे अजरबैजान में कैसे पहुंचे?
गुजरात के आनंद जिले के कंथारिया के रहने वाले ध्रुव और दीपिका ने 30 जनवरी को अमेरिका की अपनी सपनों की यात्रा शुरू की। आनंद से वे वडोदरा पहुंचे और फिर दिल्ली एयरपोर्ट पर गए। मुंबई के एक एजेंट ने अवैध डंकी रूट से उनकी यात्रा का इंतजाम किया। बताया जाता है कि ध्रुव ने एजेंट को लगभग 35 लाख रुपये और दीपिका ने लगभग 15 लाख रुपये का भुगतान किया।
डंकी रूट अमेरिका में एंट्री करने के लिए भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लोगों द्वारा आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक अवैध रूट है। इस रूट में आम तौर पर कई देशों से होकर गुजरना और घने जंगलों वाले क्षेत्रों को पार करना शामिल होता है। इंडिया टुडे के अनुसार, ध्रुव और दीपिका को इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है। वे 1 फरवरी को अजरबैजान की राजधानी बाकू पहुंचे। हालांकि, बाकू पहुंचने पर उन्हें अपने मोबाइल फोन बंद करने के लिए कहा गया।
पवन नाम के एजेंट ने कथित तौर पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा भुगतान की मांग की। उसने दोनों को मुंबई स्थित मूल एजेंट को और पैसे न भेजने का निर्देश भी दिया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसी क्षण उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने आगे भुगतान करने से इनकार कर दिया।
अजरबैजान में क्या हुआ?
ध्रुव और दीपिका के लिए हालात और भी बदतर हो गए। अगले दिन, उनका अपहरण कर लिया गया और उन्हें एक सुनसान घर में ले जाया गया, जहां उन्हें तहखाने में कैद रखा गया। ध्रुव के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और अपहरणकर्ताओं ने उसके परिवार को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए यह सब देखने के लिए मजबूर किया। परिवार के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने यह भी धमकी दी कि अगर फिरौती नहीं दी गई, तो वे ध्रुव के गुर्दे निकाल कर बेच देंगे।
परिवार वालों ने किसी तरह 65 लाख रुपये का इंतजाम कर लिया, यह सोचकर कि इससे उनकी रिहाई सुनिश्चित हो जाएगी। लगभग आधी रकम क्रिप्टोकरेंसी के जरिये दी गई, लेकिन भुगतान के बाद भी अपहरणकर्ता लगातार और ज्यादा पैसे की मांग करते रहे।
उन्हें कैसे बचाया गया?
परिवार के पास कोई और विकल्प न होने पर, उन्होंने आनंद के सांसद मितेश पटेल से उनकी रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। पटेल ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। विदेश मंत्रालय ने बाकू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया। अजरबैजान सरकार पर राजनयिक दबाव भी डाला गया, जो कारगर साबित हुआ। भारतीय अधिकारियों ने 24 घंटे के अंदर व्यक्तियों का पता लगाने के लिए एक अभियान भी चलाया।
जांचकर्ताओं के अनुसार, अपहरणकर्ताओं का संबंध पवन रॉकी और ‘बाबा खान’ के नाम से जाने जाने वाले एक ईरानी नागरिक के नेतृत्व वाले गिरोह से था। बताया जाता है कि इस गिरोह ने पहले भी गुजरात के मानसा क्षेत्र से युवाओं का इसी तरह अपहरण किया था। गुजरात पुलिस ने मुंबई स्थित पांच एजेंटों की तलाश शुरू कर दी है, जिन्होंने पीड़ितों को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसाया था। ध्रुव और दीपिका फिलहाल अजरबैजान स्थित भारतीय दूतावास की देखरेख में हैं। उन्हें भारत वापस लाने के लिए कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं।
शॉर्टकट के झांसे में आने से बचें- सांसद मितेश पटेल
एक वीडियो बयान में पटेल ने दोनों की रिहाई की पुष्टि की और विदेश मंत्रालय का आभार जताया। पटेल ने एनडीटीवी को बताया, “दो दिन पहले ध्रुव पटेल और दीपिका पटेल के माता-पिता ने मुझसे संपर्क किया और बताया कि उनका अजरबैजान में अपहरण कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि उन्हें (परिवार के सदस्यों को) एक वीडियो कॉल आया जिसमें अजरबैजान के लोगों (अपहरणकर्ताओं) ने उनकी रिहाई के बदले फिरौती की मांग की।”
उन्होंने आगे कहा, “अपहरणकर्ताओं ने धमकी दी थी कि अगर फिरौती नहीं दी गई तो वे दंपति को जान से मार देंगे। हमारी सरकार ने उन्हें जिंदा वापस लाने के लिए बहुत मेहनत की। मैं आनंद के युवाओं से अपील करता हूं कि वे ऐसे एजेंटों के जरिए विदेश जाने की कोशिश न करें, बल्कि यहीं काम करें। आपको यहां (गुजरात में) बेहतरीन अवसर मिलेंगे।” राहत महसूस कर रहे परिवार के सदस्यों ने सांसद और सरकार को धन्यवाद भी दिया है। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्या है यह डंकी रूट जिसके जरिए लोग दुनिया के अपने पसंदीदा देश तक पहुंचना चाहते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
