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कोरोना के खिलाफ हम होंगे कामयाब

कोरोना वायरस का दुनिया भर में खौफ है। लेकिन हमें इससे इतना डर क्यों? क्या हमे इससे डरने की आवश्यकता है? इस वायरस के बारे में कुछ तथ्य हैं, जिसकी वजह से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। इन तथ्यों में एक सबसे जरूरी है कि हम एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाए रखें और सामाजिक-सामुदायिक रूप से कम एकत्रित हों।

Author नई दिल्ली | Updated: March 22, 2020 4:08 AM
कोरोना वायरस।

डॉ.रवि मलिक
पहली वजह
हमें इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। इस विषाणु से मृत्यु दर तीन फीसद है। 97 फीसद ऐसे व्यक्ति बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। जो तीन फीसद मौतें होती हैं वे वृद्ध वय वालों में ज्यादा हैं। इनमें भी दमे के मरीज हैं। बेकाबू अस्थमा और अनियंत्रित मधुमेह, एडस के मरीज या इन दिनों जिन्हें इम्यूनो कम्प्रोमाइज दवाइयां दी जा रही हैं या कैंसर के मरीज हैं, उनके मृत्यु के मामले ज्यादा हैं। साधारण स्वस्थ व्यक्ति संभावना न के बराबर है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सावधान नहीं रहेंगे।

दूसरी वजह
केंद्र सरकार और राज्य सरकारें जागरूक हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री काफी जागरुक हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री भी जागरूक हैं। प्रधानमंत्री ने दक्षेस की बैठक की और आपात कोष की स्थापना कराई। उन्होंने मुख्यमंत्रियों के संग भी बातचीत की। इस रणनीति में भारत अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिये और राज्यों के संग समन्वय करके सही दिशा में आगे बढ़ा है। यही कारण है कि कोरोना की चरण दो की स्थिति में अभी तक परेशानी वाली बात कोई नहीं है। हां, चरण तीन में सामुदायिक संपर्क से स्थानीय स्तर पर इसके प्रसार की आशंका है जैसा कि दूसरे देशों में हुआ है। यह भी मुमकिन है हम चरण तीन में कभी नहीं आएं। अगर भारत चरण तीन में गया भी तो भी हम नियंत्रण में रहेंगे क्योंकि हमारे देश की सरकारें व अंतरराष्ट्रीय समुदाय जागरूक है। लिहाजा हमसब लोग सुरक्षित हैं।

तीसरी वजह
तीसरी सबसे बड़ी वजह है कि बचाव करके इससे बचा जा सकता है। इसके बचाव के दो तरीके हैं। एक तो अपनी श्वसन स्वच्छता पर ध्यान दें और हाथों की साफ सफाई का ख्याल रखें। अगर यह दो बातें अमल में आईं तो कोरोना विषाणु आप तक फटक भी नहीं सकता। श्वसन स्वच्छता से मतलब खांसने और छींकने के समय रूमाल, टिश्यू पेपर या कोहनी का इस्तेमाल करना और एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाए रखना। अगर हर कोई एहतियात रखे तो इससे डरने की कोई वजह नहीं।

चौथी वजह
महामारियां पहले भी आई हैं। 20 साल पहले सार्स बीमारी आई थी लेकिन 2003 के बाद इस रोग का एक भी मामला नहीं आया। जबकि सार्स में मृत्यु दर कहीं ज्यादा थी यानी 10 फीसद जबकि कोरोना में महज तीन फीसद है। अक्सर यह देखा गया है जब गर्मी आती है और उमस कम हो जाती है तो श्वसन विषाणु बहुत समय तक जिंदा नहीं रह पाते। हालांकि कोरोना विषाणु के बारे में अभी यह कहा नहीं जा सकता।

पांचवीं वजह
पूरी दुनिया समन्वय बनाकर चल रही है। आज 2020 में दुनिया में बहुत दक्ष चिकित्सक, विज्ञानी अनुसंधानकर्ता मौजूद हैं। कई देशों में कोरोना को लेकर शोध हो रहा है। भविष्य में टीका भी उपलब्ध हो सकता है। संभव है ऐसी एंटीवायरल आ जाए जो कोरोना विषाणु को जड़ समूल नष्ट कर दे। निकट भविष्य में दवाइयां और टीके उपलब्ध होने की संभावना दिखाई दे रही है।

छठी वजह
दुनिया के पास इस बीमारी से लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। कोई विशेष मास्क की जरूरत भी नहीं है। सिर्फ दो तरह के व्यक्ति ही मास्क पहनेंगे। जिसे बीमारी है और जो उसके परिजन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता हैं। मास्क और विषाणुनाशक द्रव की कहीं कमी नहीं है। वैसे सबसे सुरक्षित सेनेटाइजर साबुन और पानी है। खुले पानी से अगर हाथ धोएंगे तो आप सुरक्षित हैं। इस बीमारी से लड़ने के लिए पर्याप्त साधन हैं, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है।

सातवीं वजह
सरकार ने एक बड़ा एलान किया है बीमारी से संबंधित परीक्षण अब निजी अस्पताल और लैब भी कराए जा सकते हैं। सरकार न केवल सरकारी बल्कि निजी क्षेत्र को भी इस मुहिम में शामिल कर रही है। इस बीमारी से लड़ने के लिए देश में प्रशिक्षित लोगों की कमी नहीं है। स्टार्टअप, स्टैडंप इंडिया में बहुत सारे उद्यमी ऐसे हैं जो कि नई चीजें ला रहे हैं। 3 डी प्रिटिंग कर रहे हैं। रोबोटिक्स में भी आगे खोज रो रही है। इसमें कि संक्रमण नियंत्रण जैसी बहुत सी चीजें शामिल हो रही हैं।

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