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‘हम लड़ेंगे’, मजदूरों-श्रम कानून को लेकर केंद्र पर बरसे RSS से जुड़े संगठन के नेता, बोले- श्रमिकों को मारोगे भी, फिर रोने भी न दोगे

संगठन के नेता ने कहा है कि ये तो वही बात हुई कि पहले आप (सरकार) श्रमिकों को मारेंगे, फिर उन्हें रोने भी नहीं देंगे।

कोरोना संकट, लॉकडाउन के बीच गृह राज्य न जाने पाने को लेकर गमगीन महिला। (फोटोः पीटीआई)

कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों की बदहाल स्थिति, श्रम कानूनों में फेरबदल और केंद्र द्वारा निजीकरण को लेकर लिए गए फैसलों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने कड़ा विरोध जताया है। संगठन के नेता ने कहा है कि ये तो वही बात हुई कि पहले आप (सरकार) श्रमिकों को मारेंगे, फिर उन्हें रोने भी नहीं देंगे।

BMS महासचिव व संगठन में वरिष्ठ प्रवक्ता बृजेश उपाध्याय ने टीवी पत्रकार बरखा दत्त को बताया, “आएसएस से जुड़ी बीएमएस श्रमिक कानूनों और प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर बहुत नाराज हैं। आज जब मजदूर गृह राज्य लौट रहे हैं वहां उनके पास काम का बंदोबस्त नहीं है। ये बड़ा चिंता विषय है। बिहार के 35 लाख प्रवासी अगर वहां लौटेंगे तो वहां का इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा नहीं है कि सूबा उन लोगों को फौरन रोजगार मुहैया करा देगा।”

बकौल उपाध्याय, “हमने सरकार से कहा है कि इन श्रमिकों की दिहाड़ी उन्हें मिलनी चाहिए। सरकार को ऐसे वक्त में सरकार को गरीब की मदद करनी चाहिए थी। सुधार गर्वनेंस में होना चाहिए था, जबकि लेबर लॉ को सस्पेंड कर दिया गया। हमने तीन बड़े कारणों को लेकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है।”

उनके मुताबिक, हमने चिट्ठी लिख सरकारों से बात की। कहा कि ये जो हुआ है, ये गलत है। आप इसे वापस लें। मध्य प्रदेश सीएम की ओर से जवाब आया, जबकि गुजरात और यूपी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। हमने पहले लोकतांत्रिक तरीके अपनाए, लेकिन महामारी के समय अगर इसका कोई गलत इस्तेमाल करना चाहता है, इस स्थिति में बीएमएस ने फैसला किया हम मजदूरों के हितों के साथ खड़े होंगे। चाहे सड़क पर लड़ना पड़ेगा या कोर्ट में, हम उसके लिए तैयार हैं।

उन्होंने आगे कहा, “आप (सरकार) क्या सुनिश्चित करना चाहते हैं? आप मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे।” देखें, उन्होंने बातचीत के दौरान और क्या कहाः

‘घिसे-पिटे उपायों के बजाय अर्थव्यवस्था को उबारने के नये तरीके लायें’: BMS ने इससे पहले शनिवार को मोदी सरकार से कि वह घिसे-पिटे उपायों के बजाय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के नये उपाय सामने लाये। बयान के मुताबिक, ” पहले तीन दिन की उमंग के बाद वित्त मंत्री की घोषणाओं का चौथा दिन देश और देश के लोगों के लिये दुखद दिन है।’’

संगठन ने आगे कहा, “आठ क्षेत्रों कोयला, खनिज, रक्षा उत्पादन, हवाई क्षेत्र प्रबंधन, हवाई अड्डे, विद्युत वितरण, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा पर ध्यान दिया गया है, लेकिन सरकार कह रही है कि निजीकरण को छोड़कर इसका कोई विकल्प नहीं है। यह इस बात का को दर्शाता है कि सरकार संकट के समय में आर्थिक हालत सुधारने के उपाय नहीं सोच पा रही है।’’

दरअसल, बीएमएस ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर भी सुरक्षा की दृष्टि सेआपत्ति जताई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी तथा इसकी रोकथाम के लिये करीब दो महीने से लागू लॉकडाउन की मार से अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिये घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की चौथी किस्त के उपायों की यहां एक संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी।

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