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कृषि कानूनों के खिलाफ पश्चिम बंगाल विस में प्रस्ताव, ममता बोलीं- पहले दिल्ली संभालिए फिर बंगाल के बारे में सोचिए

पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी ने विधानसभा में कृषि कानूनों को वापस लेने को लेकर प्रस्ताव पेश किया। जिसके बाद बीजेपी विधायकों ने जमकर हंगामा किया और जय श्रीराम के नारे लगाए।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। (ANI)

दिल्ली से सटी सीमाओं पर केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। इसी बीच हरियाणा के पूर्व मुख्य संसदीय सचिव रामपाल माजरा ने किसान आंदोलन के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गुरुवार को चंडीगढ़ में प्रेस वार्ता कर भाजपा से नाता तोड़ने की घोषणा की। उन्होंने इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद यह ऐलान किया।

रामपाल माजरा ने अभय चौटाला के कदम की सराहना करते हुए भाजपा को किसान विरोधी बताया। विधानसभा चुनाव के समय माजरा ने इनेलो छोड़ भाजपा का दामन थामा था। वहीं पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने तीनों नए कृषि कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव रखा है। पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्यमंत्री पार्थ चटर्जी ने विधानसभा में कृषि कानूनों को वापस लेने को लेकर प्रस्ताव पेश किया। जिसके बाद बीजेपी विधायकों ने जमकर हंगामा किया और जय श्रीराम के नारे लगाए।

ममता सरकार की ओर से तीन कृषि कानून को वापस लेने का प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद भाजपा विधायकों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हुए पश्चिम बंगाल विधान सभा से बहिर्गमन किया और वॉक आउट कर गए। सरकार के इस फैसले का लेफ्ट और कांग्रेस ने समर्थन किया है। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी हमेशा हर आंदोलन को आतंकवादी गतिविधि मानती है, लंका कांड की तरह पूरे देश को भाजपा जला रही है। यह कानून पूरी तरह से किसान विरोधी है। हम पूरी तरह से आंदोलनकारी किसानों के साथ हैं।

ममता ने कहा “कृषि कानूनों की वापसी को लेकर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।” मुख्य मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने दिल्ली की स्थिति को बहुत बुरी तरह से संभाला है और वहां जो कुछ हुआ उसके लिए बीजेपी जिम्मेदार है।

सीएम ने कहा कि बीजेपी पहले दिल्ली की स्थिति से निपटे उसके बाद बंगाल के बारे में सोचें। दीदी ने अमित शाह पर भी तंज कसा, ममता ने कहा कि दिल्ली के किसानों के आंदोलन से पुलिस सही तरीके से नहीं निपट पाई। अगर यह बंगाल होता तो अमित भैया कहते, ‘क्या हुआ?’ हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। हम चाहते हैं कि इन तीन कानूनों को निरस्त किया जाए। या तो आप कानून वापस ले लें या कुर्सी छोड़ दें।

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