Jammu-Kashmir News: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। बीजेपी विधायकों ने प्रस्ताव में राज्य के 5 अगस्त 2019 से पहले के दर्जे का जिक्र किए जाने पर आपत्ति जताई।
इस प्रस्ताव में दस संशोधन पेश किए गए हैं। इनमें से आठ का उद्देश्य इसे विस्तारित करना है ताकि इसमें अगस्त 2019 से पहले जम्मू और कश्मीर को मिला हुआ विशेष दर्जा बहाल किया जा सके।
विधानसभा में आज क्या-क्या हुआ?
सोमवार की कार्यवाही उस समय हंगामेदार हो गई जब भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और सदन के वेल में प्रवेश कर अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर से कुर्सी छोड़ने की मांग की। बीजेपी ने कहा कि अध्यक्ष के खिलाफ 23 सदस्यों ने एक प्रस्ताव पर साइन किए हैं और मांग की है कि पहले इस प्रस्ताव पर मतदान कराया जाए। जवाब में, राथर ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव नहीं देखा है और संबंधित नियमों को पढ़कर सुनाया कि अगर अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव का नोटिस लिखित में भी पेश किया जाता है तो वह सदन की कार्यवाही का हिस्सा 14 दिनों से पहले नहीं बनेगा।
सदन में बीजेपी विधायकों को ‘स्पीकर साहब, कुर्सी छोड़ो, कुर्सी छोड़ो’ के नारे लगाते देखा गया। विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि बीजेपी भी राज्य का दर्जा देने के पक्ष में है, लेकिन उमर के प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई भाषा पर उन्हें आपत्ति है। शर्मा ने कहा, “जम्मू और कश्मीर एक संवेदनशील राज्य है, दुश्मन इसकी सीमाओं पर मौजूद है। हम भी राज्य के दर्जे के पक्ष में हैं, लेकिन इस प्रस्ताव में जिस तरह की भाषा या शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, वह अस्वीकार्य और असंवैधानिक है।”
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने किया पलटवार
उन्होंने 2000 के प्रस्ताव में मांगे गए 1953 से पहले के दर्जे का भी जिक्र किया और कहा कि उमर अब्दुल्ला के सरकार में रहते हुए केंद्र ने इसे खारिज कर दिया था। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने भी पलटवार करते हुए कहा कि जम्मू और कश्मीर एकमात्र सीमावर्ती राज्य नहीं है।
चौधरी ने कहा, “जम्मू और कश्मीर ही एकमात्र सीमावर्ती राज्य नहीं है, राजस्थान भी है। क्या इसका मतलब यह है कि हमें राज्य का दर्जा या विशेष दर्जा देने की मांग छोड़ देनी चाहिए?” उन्होंने संसद में भारत सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा करने में हो रही देरी पर भी सवाल उठाया।
प्रस्तावित संशोधन क्या हैं?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के छह विधायकों ने प्रस्ताव में अनुच्छेद 370 और 35ए को जोड़ने की मांग की है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के बारामूला विधायक जावेद हसन बेग की ओर से पेश किए गए संशोधन में जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के संदर्भ के बाद अनुच्छेद 370 की बहाली और अनुच्छेद 35ए के तहत पूर्व में उपलब्ध संवैधानिक संरक्षणों को जोड़ने का प्रस्ताव है।
इसी तरह के संशोधन एनसी विधायक अल्ताफ अहमद वानी, तनवीर सादिक, चौधरी मोहम्मद अकरम, अजाज अहमद जान और हिलाल अहमद लोन ने पेश किए हैं। पीडीपी विधायक वहीद पारा ने भी प्रस्ताव का विस्तार करने की मांग की है, जिसमें स्वायत्तता की बहाली और अनुच्छेद 370 और 35ए को उनके मूल स्वरूप में शामिल करने का प्रस्ताव है।
कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट ने एक और संशोधन पेश किया है। इसमें प्रस्ताव के आखिर में जम्मू और कश्मीर के वंचित लोगों के प्रति और विभिन्न मंचों पर की गई अपनी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने की याद दिलाने के लिए शब्दों को जोड़ने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था। इसमें भारत सरकार से जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की गई थी। प्रस्ताव में सदन की ओर से 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पारित प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया था। फारूक अब्दुल्ला के कार्यकाल के दौरान पारित 2000 के प्रस्ताव में जम्मू और कश्मीर की 1953 से पहले की स्थिति को बहाल करने की मांग की गई थी। इसे केंद्र सरकार ने अस्वीकार कर दिया था। 2024 के प्रस्ताव में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे की बहाली के लिए वहां के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का आह्वान किया गया था।
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जम्मू और कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश करने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्षी बीजेपी सदस्यों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
