रात के करीब दो बजे थे, तारीख थी 14 मार्च… भारत का जहाज MT शिवालिक इस समय संघर्ष के दौर से गुजर रहे होर्मुज स्ट्रेट को आखिरी हिस्से को पार कर रहा था… जैसे ही MT शिवालिक ने होर्मुज को पार कर ओमान की खाड़ी में सुरक्षित जलक्षेत्र में प्रवेश किया, कैप्तन सुखमीत सिंह (39) ने नेविगेशन ब्रिज पर मौजूद चीफ ऑफिसर और सेकंड ऑफिसर की ओर देखा और कहा, “अब हम खतरे से बाहर हैं – सबको बता दो, और उनसे कहो कि वे अपने परिवारों को भी जानकारी दे दें।”

इसके बाद कुछ ही मिनटों में चीफ इंजीनियर भी ऊपर वाले डेक पर आ गए। MT शिवालिक के सीनियर अधिकारियों ने एक साथ रुककर उस पल को महसूस किया, जिसकी कल्पना वे पिछले दो हफ्तों से बार-बार कर रहे थे। उनका जहाज कई दिनों तक पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से दुबई के पास लंगर डाले खड़ा रहा।

द इंडियन एक्सप्रेस से उन तनावपूर्ण दिनों के बार में बात करते हुए कैप्टन सुखमीत कहते हैं, “दो हफ्तों तक हम युद्ध क्षेत्र के बीचों-बीच एक पूरी तरह से भरे हुए टैंकर पर बैठे रहे। यह आसान नहीं था।”

कैप्टन की आवाज सुन भावुक हुए पिता

डेक से अन्य अधिकारियों के जाने के बाद कैप्टन सुखमीत ने अपने परिवार से फोन पर बात की। पंजाब के आदमपुर में उनके पिता गुरमीत सिंह, मां सुखविंदर और पत्नी संदीप कौर उनके फोन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उस रात उन तीनों में से कोई नहीं सोया।

फोन कॉल पर जब गुरमीत सिंह (69) ने जब अपने बेटे की आवाज सुनी तो उनका सारा तनाव आंसुओं में बह गया। इन आंसुओं को देख को सुखविंदर और संदीप समझ गए कि MT शिवालिक ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर लिया है। इस जहाज पर न सिर्फ 46,000 मेट्रिक टन LPG बल्कि 27 जिंदगियां भी थीं।

सुखमीत ने बताया कि उन मुश्किल दिनों में उनके परिवार के पास भरोसा करने के लिए बस उनकी रोजाना की छोटी-छोटी फोन कॉल्स ही थीं। वह अपने परिवार को फोन कर कहते थे, “मैं ठीक हूं। सब ठीक है”। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “28 फरवरी के बाद यह पहली बार था, जब हम लोग मुस्कुराए और हंसे, एक-दूसरे से ठीक से बात भी की।”

26 फरवरी को भरी गैस, निकलने से पहले ईरान पर हो गया हमला

MT शिवालिक कई बार कतर से LPG लेकर भारत आ चुका है। 26 फरवरी को भी उसने पहले की तरह गैस भरी और दो दिन बाद जब वह चलने की तैयार कर रहा था, तब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। इस जहाज को पहले रास लफान पोर्ट और फिर UAE के रास अल खैमाह स्थित मीना साकर जाने के लिए कहा गया। वहां भी सुरक्षा अनिश्चित थी क्योंकि दुबई पर मिसाइल और ड्रोन हमले हो रहे थे।

‘हमने ईरान से मिसाइलें आती देखीं’

सुखमीत ने बताया, “हमें हर दिन ईरान से आती मिसाइलें दिखाई देती थीं और धमाकों की आवाज सुनाई देती थीं। इस सबके बीच हम पूरी तरह से भरे हुए LPG वाले जहाज पर बैठे थे। जाहिर है, क्रू परेशान था और अक्सर मुझसे बात करने आता था। हम जानते थे कि बाहर निकलने का सिर्फ एक ही रास्ता था – जहाज को वहां लेकर चलना।”

उन्होंने कहा, “मैं लोगों का हौसला यह बताकर बढ़ाता था कि कंपनी और भारत सरकार उनकी सुरक्षा पर कितनी बारीकी से नजर रखे हुए हैं और यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं कि हम जल्द से जल्द इन अशांत जल क्षेत्रों से बाहर निकल सकें।”

पिता ने दी बड़ी सीख

सुखमीत के पिता गुरमीत ने बताया कि उनके बेटे ने इस बात का खास ख्याल रखा कि किसी को कोई चिंता न हो, खासकर अपनी 11 साल की बेटी को। उन्होंने कहा, “वह बस यही कहता था कि सब ठीक है लेकिन एक बार जब मैंने उस पर जो डाला तो उसने बताया कि आसमान अक्सर मिसाइलों से जगमगा उठता है…”

गुरमीत ने कहा, “मैंने उनसे कहा कि क्रू का मनोबल ऊंचा बनाए रखने से ज्यादा जरूरी और कुछ नहीं है। सुखमीत ने बताया कि वे दिन में तीन-चार बार उनसे मिल रहे हैं और उनसे बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने सरकार और कंपनी की भी उनके लगातार सहयोग और प्रोत्साहन के लिए खूब तारीफ की।”

13 मार्च को मिले होर्मुज से गुजरने के आदेश

13 मार्च को MT शिवालिक को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने के ऑर्डर मिले। इस जल मार्ग को पार करने के लिए करीब दस घंटे का समय लगता है। सुखमीत ने बताया, “एक नाविक के तौर पर आपको अक्सर समुद्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह अनुभव कुछ अलग था। सबसे ज्यादा मदद किनारे पर मौजूद सभी लोगों और जहाज पर मेरे क्रू के सहयोग से मिली। वे सचमुच कमाल के थे। तमाम चिंताओं के बावजूद, उन्होंने जबरदस्त धैर्य और टीम भावना दिखाई।”

आगे क्या हैं प्लान?

द इंडियन एक्सप्रेस को मुंद्रा पोर्ट के CEO कैप्टन आलोक मिश्रा ने बताया कि MT शिवालिक के कुछ और दिन वहां रुकने की उम्मीद है। अभी माल उतारने का काम पूरा नहीं हुआ है।

इस टैंकर के कुछ क्रू मेंबर्स अपने अनुबंध पूरे कर चुके हैं और उन्होंने साइन-ऑफ के लिए अप्लाई किया है। सुखमीत दिसंबर 2025 में जहाज पर सवार हुए थे। वह अभी कुछ और समय तक काम करने के मूड में हैं और “अगले लोडिंग पॉइंट” का इंतजार कर रहे हैं।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र की बात करें तो चौड़ाई 21-33 किलोमीटर है। ऐसे में जो तेल टैंकर और भारतीय जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं, उनके लिए जंग या तनाव की स्थिति में जोखिम वाली है। यहां से गुजरकर भारत आने वाले जहाज कांडला और मुंबई आते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें