एक्शन चाहिए, मेडिटेशन नहीं- मंदी, महंगाई और आतंक के मोर्चे पर यशवंत सिन्हा का नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला

मोदी सरकार के कड़े आलोचक और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “नामी अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए ताजा शोध में पता लगा था कि नोटबंदी के बाद आर्थिक विकास दर तीन फीसदी गिर गई। पर पीएम इस पर भी चुप रहे, जबकि हम भी (जनता) शांत है।”

Yashwant Sinha, Former BJP Leader, Minister of Finance, Minister of External Affairs, Atal Bihari Vajpayee Government, NDA, BJP, Article, NDTV, Inflation, Economic Slowdown, Job Crisis, Demonitization, GST, Narendra Modi, Amit Shah, BJP, NDA, Central Government, India News, Hindi News, National News
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा लंबे वक्त से मोदी सरकार के कड़े आलोचक रहे हैं। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

BJP के पूर्व नेता, अटल बिहारी सरकार में वित्त मंत्री (1998-2002) व विदेश मंत्री (2002-2004) रहे यशवंत सिन्हा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार को फिर घेरा है। उन्होंने मंदी और महंगाई से लेकर आतंक तक के मोर्चे पर जुबानी हमला करते हुए कहा है कि देश इन सबसे निपटने के लिए ऐक्शन चाहिए, न कि विदेश में मेडिटेशन। बुधवार (छह नवंबर, 2019) को ndtv.com पर छपे लेख में उन्होंने यह भी कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम लोगों के लिए धीमे-धीमे असर करने वाले जहर जैसा है। राजधानी में कानून और न्याय व्यवस्था भी ताक पर है, जिसके लिए केंद्र जिम्मेदार है।

दिल्ली पुलिस और वकीलों की झड़प के ताजा मामले के संदर्भ में उन्होंने लिखा, “हमने देखा कि दिल्ली पुलिसकर्मी कैसे असुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, पर पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने इस पर कुछ भी बोलना जरूरी न समझा।” सिन्हा ने आगे लड़खड़ाई अर्थव्यवस्था और डायन रूपी महंगाई का मुद्दा भी छेड़ा। कहा कि हाल-फिलहाल में भारी संख्या में लोगों की नौकरियां चली गईं। हर बुनियादी जरूरत की चीज के दाम आसमान छू रहे हैं, पर हम पर ध्यान ही नहीं दे रहे।

बकौल पूर्व केंद्रीय मंत्री, “नामी अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए ताजा शोध में पता लगा था कि नोटबंदी के बाद आर्थिक विकास दर तीन फीसदी गिर गई। पर पीएम इस पर भी चुप रहे, जबकि हम भी (जनता) शांत है।” आगे आतंक को लेकर कहा- पुलवामा में आतंकी हमला हो जाता है, महीने गुजर जाते हैं। फिर मामला किनारे कर दिया जाता है। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है, लेकिन हम इस पर भी चुप्पी साधे रहते हैं।

लंबे समय से मोदी सरकार के कड़े आलोचक रहे सिन्हा यही नहीं रुके। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में चौंकाने वाले चुनावी नतीजों ने ये सारे अहम मुद्दे उठाने की बात विफल कर दी है। हमें ऐक्शन चाहिए, न कि विदेशी जमीनों पर मेडिटेशन। हम फौरन एक युवा नेता की जरूरत है, जो कि मैदान में जाए और इस तरह की बुराई के शैतान से लोहा ले। पर इससे भी जरूरी है कि लोगों को देश के सामने आने वाले खतरों को लेकर जागरूक और सचेत होना चाहिए।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट