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‘लॉकडाउन से कोरोनावायरस के मामलों पर कितनी रोक लगी, यह सामने आने में अभी दो हफ्ते लगेंगे’

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन के प्रमुख के श्रीनाथ रेड्डी ने 30 मार्च के बाद कोरोनावायरस मामलों में 200% की बढ़ोतरी आने और देश में संक्रमण के आगे की स्थिति पर जानकारी दी।

Author Translated By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: April 10, 2020 9:30 AM
डॉक्टर श्रीनाथ रेड्डी के मुताबिक, कोरोना मामलों के बढ़ने का पता इससे चलेगा कि अगल-अलग समय पर लोगों पर कितने तरह के टेस्ट किए गए। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

देशभर में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लॉकडाउन के बावजूद तब्लीगी जमात के केस सामने आने के बाद से ही हर दिन नए संक्रमितों के मिलने की संख्या पिछले दिन के मुकाबले बढ़ी है। ऐसे में ज्यादातर लोगों ने कोरोनावायरस को फैलने से न रोक पाने के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े कदमों को बेकार बताना शुरू कर दिया है। हालांकि, डॉक्टरों का मानना है कि जिस तरह कोरोना के मामले सामने आए हैं, इसके मुताबिक संक्रमण में बढ़ोतरी या कमी की बात दो हफ्ते बाद ही साफ हो सकेगी।

द इंडियन एक्सप्रेस ने कोरोना के बढ़ते मामलों पर पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रोफेसर के श्रीनाथ रेड्डी से बात की। डॉक्टर रेड्डी से जब पूछा गया कि देश में 30 मार्च तक 1251 मामले और 32 मौतें थीं, लेकिन एक हफ्ते बाद ही इसमें 200 फीसदी का उछाल आ गया। क्या देश में कोरोनावायरस का ग्राफ (कर्व) लॉकडाउन के बाद से ऊपर जा रहा है।

इस पर डॉक्टर रेड्डी ने कहा, “कोरोनावायरस के मामलों के बढ़ने की टेस्टिंग के आधार पर तुलना की जा सकती है। मसलन एक समय तक कितनी टेस्टिंग हुई और कितने मामले आए और उसके बाद अलग-अलग अवधियों में कितने तरह की टेस्टिंग हुई और संक्रमण के मामले कितने बढ़े। इस लिए हमें कम से कम दो हफ्तों का इंतजार करना होगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोरोनावायरस का ग्राफ देश में स्थिर हो रहा है या ऊपर-नीचे जा रहा है।”

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 डॉक्टर रेड्डी ने बताया कि भारत जैसे बड़े देश में हमें राज्यवार या जिलेवार तरीके से कोरोना के बढ़ने का विश्लेषण करना होगा, क्योंकि यह आंकड़े जगह के हिसाब से बदलेंगे। कोरोनावायरस का प्रभाव कितना घट-बढ़ रहा है, इसका पता लगाने के लिए यह जानना जरूरी होगा कि टेस्टिंग में कितने मामले पॉजिटिव आ रहे हैं। इसके अावा यह देखना भी जरूरी होगा कि सांस लेने में तकलीफ या संक्रमण के कितने मामले रोज अस्पताल में दाखिल हो रहे हैं। इसके अलावा सर्विलांस डेटा और लैबों में किए गए रैंडम टेस्ट सर्वे का आंकलन भी जरूरी होगा। लॉकडाउन का कोरोनावायरस पर प्रभाव अगले दो हफ्तों में दिखाई दे सकता है, लेकिन एक महामारी को खत्म करने की कोशिश लंबी होगी। ऐसे में जून में ठीक से सामने आएगा कि हमारी कोशिशें कितनी सफल हुईं या कितनी चुनौतियां बाकी हैं।

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