सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ट्रेनिंग के दौरान विकलांगता के कारण सेना से बाहर किए गए अधिकारी कैडेटों को लाभ देने से संबंधित फैसले में देरी करने के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने चेतावनी दी कि वह रक्षा और वित्त मंत्रालयों के सचिवों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देगा।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने कहा कि उसने 20 जनवरी को केंद्र को 6 हफ्ते का समय दिया था। अदालत ने कहा, “हालांकि, इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है। हम यह समझने में असमर्थ हैं कि इस अदालत द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मुद्दे को उठाने के बावजूद रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई है।”

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालयों को निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालयों को निर्णय लेने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है और ऐसा न कर पाने पर अधिकारियों को अदालत में तलब करने की बात कही है। पीठ ने कहा, “इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि हमने संबंधित मंत्रालयों को पहले ही पर्याप्त समय दे दिया है, हम यह कहने के लिए विवश हैं कि अगर इस मामले में कोई प्रगति नहीं होती है तो हम रक्षा सचिव और वित्त सचिव को इस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश देने के लिए विवश होंगे।” अब इस मामले की सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित उन रिपोर्टों के आधार पर इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया था , जिनमें ट्रेनिंग के दौरान विकलांगता के कारण शीर्ष सैन्य संस्थानों से निष्कासित किए गए अधिकारी कैडेटों की दुर्दशा का वर्णन था और सशस्त्र बलों और केंद्र से इस पर प्रतिक्रिया मांगी थी।

Amicus Curiae की सिफारिशें

इसके बाद अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता रेखा पल्ली को इस मामले में Amicus Curiae (अदालती प्रतिनिधि) के रूप में नियुक्त किया। उन्होंने कई सिफारिशें पेश कीं, जिनमें सभी “अमान्य” भूतपूर्व और भावी अधिकारी कैडेटों और पात्र आश्रितों के लिए पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) के तहत कवरेज, लेफ्टिनेंट/फ्लाइंग ऑफिसर के पद के समकक्ष अनुग्रह राशि में वृद्धि, विकलांगता पेंशन के लिए पिछली सिफारिशों का कार्यान्वयन, तत्काल राहत के लिए एकमुश्त मुआवजा और उच्च शिक्षा में आरक्षण और बेहतर बीमा शामिल हैं।

7 अक्टूबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इन सुझावों को सेना, नौसेना और वायु सेना के मुख्यालयों के समक्ष रखा जाए ताकि वे इन कैडेटों के पुनर्वास के लिए एक योजना तैयार कर सकें। 16 दिसंबर को सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी ने अदालत को सूचित किया कि तीनों सेना प्रमुख सिफारिशों के बारे में सकारात्मक थे और दोनों मंत्रालयों की प्रतिक्रिया का इंतजार था।

मंगलवार को एएसजी द्वारा उसी रुख को दोहराने पर, बेंच गुस्से में आ गई और कहा कि हमें अब सचिवों को यहां बुलाना होगा। सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भट्टी ने अदालत से समन जारी करने से पहले कुछ और समय देने का आग्रह किया, अन्यथा उन्हें पेश होने के लिए कहा जा सकता है। पीठ ने कहा, “वित्त अधिनियम 2026 पर विचार चल रहा है इसलिए बाहर भेजे गए कैडेटों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यक व्यय पर ध्यान देने का यह सबसे उपयुक्त समय है।”

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशिक्षण के दौरान हुई विकलांगता के कारण शीर्ष सैन्य संस्थानों से बर्खास्त किए गए अधिकारी कैडेटों के मामले की जांच के लिए न्यायमित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें