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‘रोज-रोज दिल्ली नहीं आ सकते’, 8 राज्यों के FM ने केंद्र पर जताई नाराजगी- स्कूल, कॉलेज, अस्पताल बंद कर दें?

बकौल मंत्री, "हमने वित्त मंत्री से इस बारे में चर्चा की। यहां तक कि अक्टूबर-नवंबर का मुआवजा भी बकाया है, जो कि सरकार को चुकाना है। हम समस्याएं झेल रहे हैं। हम जेल, स्कूल और अस्पताल नहीं बंद कर सकते हैं। हमें पेंशन भी देनी हैं। हम रोज-रोज दिल्ली नहीं आ सकते हैं।"

Author नई दिल्ली | Updated: December 4, 2019 9:06 PM
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बैठक के दौरान बात करते गैर-भाजपा शासित राज्यों के वित्त मंत्री और प्रतिनिधि। (फोटोः फेसबुक/badalmanpreetsingh)

आठ गैर-BJP शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। इन सभी ने इस दौरान GST मुआवजा जारी होने में देरी को लेकर नाराजगी जाहिर की। कहा जा रहा है कि जीएसटी मुआवजे में देरी के चलते ये सभी सूबे संकटग्रस्त आर्थिक स्थिति में आ गए।

दिल्ली, पंजाब, पुदुचेरी और मध्य प्रदेश के वित्त मंत्रियों के साथ केरल, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधि इस दौरान सीतारमण के साथ बैठक में थे। भेंट के बाद पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने पत्रकारों को बताया कि अगस्त और सितंबर का मुआवजा अभी तक राज्यों को जारी नहीं किया गया है।

बकौल मंत्री, “हमने वित्त मंत्री से इस बारे में चर्चा की। यहां तक कि अक्टूबर-नवंबर का मुआवजा भी बकाया है, जो कि सरकार को चुकाना है। हम समस्याएं झेल रहे हैं। हम जेल, स्कूल और अस्पताल नहीं बंद कर सकते हैं। हमें पेंशन भी देनी हैं। हम रोज-रोज दिल्ली नहीं आ सकते हैं। हम शर्मिंदगी नहीं महसूस करना चाहते हैं। बार-बार जो पैसों की बात करते हैं, लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते।”

उनके हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया, “वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया है कि जल्द से जल्द मुआवजा जारी किया जाएगा, पर उन्होंने खुलकर समयसीमा के बारे में नहीं बताया।” जानकारी के मुताबिक, फिलहाल इन राज्यों को अगस्त और सितंबर का मुआवजा नहीं मिला है, जबकि अक्टूबर-नवंबर वाला भी 10 दिसंबर के बाद बकाया हो जाएगा।

ढाई घंटे चली लंबी बैठक के बाद मीडिया को दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि हमने सोचा है कि हम केंद्रीय वित्त मंत्री से अपील करते हुए कहेंगे कि उन्हें व्यक्तिगत तौर पर इस मामले को देखना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि संसद द्वारा पारित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन न हो।

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