पंजाब कांग्रेस में कई दिनों से जारी कलह आखिरकार शांत होती नजर आ रही है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के कांग्रेस प्रमुख बनाए रखने के विरोध में उठी आवाजें अब शांत होने लगीं हैं। क्योंकि कांग्रेस हाईकमान अमरिंदर सिंह वड़िंग मुद्दे पर अडिग रहा, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को काफी जद्दोजहद के बाद आखिरकार पीछ हटना पड़ा। इन दोनों नेताओं ने गुरुवार को पार्टी हाईकमान के फैसले के साथ चलने की बात कही।
चरणजीत सिंह चन्नी ने नई दिल्ली में मीडिया से कहा, “सब ठीक है। हम पार्टी के साथ हैं और पार्टी के हाई कमान के सभी निर्देशों का पालन करेंगे।” चन्नी एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक से बाहर आने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। चन्नी और रंधावा के अलावा, विधायक परगत सिंह और राणा गुरजीत सिंह भी लगभग तीन घंटे चली इस बैठक में शामिल हुए।”
चन्नी और उनके प्रति निष्ठा रखने वाले अन्य लोग उस समय से नाराज थे जब हाई कमान ने अगले साल की शुरुआत में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले अमरिंदर सिंह राजा को पार्टी की पंजाब इकाई के प्रमुख के रूप में बने रहने के लिए कहा था।
चन्नी ने कहा कि हमें आज यहां बुलाया गया था और हमने अपना पक्ष रख दिया है। मैं एक बात बिल्कुल स्पष्ट करना चाहता हूं और वह यह है कि हम पार्टी के साथ खड़े हैं। राहुल गांधी हमारे नेता हैं, हम उनसे प्यार करते हैं और उनके साथ जिएंगे-मरेंगे। मल्लिकार्जुन खड़गे हमारे पार्टी अध्यक्ष हैं और हमारे सभी कार्यकर्ता और नेता पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे।”
उन्होंने पंजाब में पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद को लेकर किसी भी तरह की अटकलों को भी खारिज करने की कोशिश की। चन्नी ने कहा कि मीडिया में बेवजह हंगामा मचाया गया है। हमारा किसी को शर्मिंदा करने या किसी को नीचा दिखाने का कोई इरादा नहीं था। हम पार्टी को आगे ले जाना चाहते हैं। हाई कमान ने हमारी बात सुनी और जो भी फैसला वह लेगा, हम उसे स्वीकार करेंगे और उसी के अनुसार आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब हमने चंडीगढ़ में बैठक की थी, तो हमारा एकमात्र उद्देश्य भूपेश बघेल जी के सामने अपना दृष्टिकोण रखना था।
वाड़िंग को पीपीसीसी प्रमुख के पद पर बरकरार रखे जाने के बाद असहमति की आवाजें और तेज हो गईं थी, जिसके चलते केंद्रीय नेतृत्व ने बघेल को पंजाब भेजा, जहां वे छह दिन तक रहे, नेताओं से मुलाकात की और बुधवार को दिल्ली में वेणुगोपाल को रिपोर्ट सौंपी। बघेल ने यह भी संकेत दिया कि पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन में यथास्थिति बनाए रखना कठपुतलियों का खेल नहीं है।
कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि बागी नेताओं को चेतावनी पढ़कर सुनाई गई और उन्हें स्पष्ट कर दिया गया कि उन्हें उच्च कमान के फैसलों का पालन करना होगा। उन्हें यह भी बताया गया कि उनके सार्वजनिक बयान पार्टी की छवि खराब कर रहे हैं। पार्टी ने पहले ही संकेत दिया था कि वह वाड़िंग पर अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगी, क्योंकि इससे विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक ढांचे की कमजोरीका आभास हो सकता है। एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया था कि राज्य के 29 जिला अध्यक्षों में से 25 वाड़िंग के साथ हैं। उन्हें सात सांसदों में से चार और 18 विधायकों में से 10 का भी समर्थन प्राप्त है।
कांग्रेस भवन में पत्रकारों से बात करते हुए राणा गुरजीत ने बताया कि उन्हें वेणुगोपाल के कार्यालय से एक बैठक में शामिल होने का संदेश मिला था। बैठक के बाद राणा ने बैठक के परिणाम पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, बागी नेताओं ने आंतरिक एकता और संगठनात्मक प्रभावशीलता को लेकर चिंता व्यक्त की। बताया जाता है कि चन्नी ने वेणुगोपाल को बताया कि वाड़िंग नेताओं को एकजुट नहीं कर सकते, जो बागी खेमे में गहरी असंतुष्टि को दर्शाता है। बागी खेमे का दावा है कि उसे कई विधायकों समेत करीब 80 नेताओं का समर्थन प्राप्त है।
विद्रोही समूह ने इससे पहले 11 जुलाई को चंडीगढ़ में राणा गुरजीत सिंह के आवास पर भूपेश बघेल से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने वाड़िंग के प्रति अपने विरोध को दोहराया और समाधान के लिए दबाव बनाया। चन्नी खेमे से जुड़े अन्य प्रमुख व्यक्तियों में प्रताप सिंह बाजवा, अरुणा चौधरी और भारत भूषण आशु शामिल हैं। राज्य विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता बाजवा ने भी वेणुगोपाल से उनके आवास पर मुलाकात की, लेकिन उन्होंने बैठक के दौरान हुई बातचीत का खुलासा नहीं किया।
पंजाब में कांग्रेस के अंदर इस वक्त खींचतान चल रही है। इसी बीच शनिवार को पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने अपने समर्थकों के साथ चंडीगढ़ में पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल से मुलाकात की। चन्नी गुट के कांग्रेस नेताओं से मुलाकात के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि पार्टी में कोई झगड़ा नहीं है, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को हटाने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। पढ़ें पूरी खबर।
