Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग ने यूपी पुलिस कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त किया है। अजय पाल शर्मा के दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा क्षेत्र का दौरा करने और संभावित उपद्रवियों को वोटिंग के दिन किसी भी तरह की बाधा न डालने की चेतावनी परर विवाद खड़ा हो गया है।
राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने शर्मा पर अपनी भूमिका से परे काम करने और पार्टी कार्यकर्ताओं को “डराने-धमकाने” का आरोप लगाते हुए कहा कि वह निर्वाचन आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराएगी। वहीं, फाल्टा से तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान ने कहा कि अगर शर्मा “सिंघम” हैं, तो वह “पुष्पा” हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं या मतदाताओं को “डराने-धमकाने” की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बख्तरबंद गाड़ियों के साथ फाल्टा पहुंचे आईपीएस अजय पाल
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एसीपी) और 2011 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शर्मा सौ से अधिक सशस्त्र केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और एक बख्तरबंद वाहन के साथ सोमवार को फाल्टा पहुंचे थे। उनके पास “संभावित उपद्रवियों” की एक सूची थी। फाल्टा विधानसभा सीट डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिसका प्रतिनिधित्व तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी करते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों ने अजय शर्मा पर पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के विधानसभा चुनाव के लिए 29 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने फाल्टा में खान के आवास के साथ-साथ उनके चुनाव कार्यालय के बाहर ‘जय बांग्ला’ के नारे लगाए।
जहांगीर बोले- वो सिंघम तो मैं पुष्पा
जहांगीर खान ने घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह बीजेपी की ओर से तैनात पुलिस अधिकारियों को मतदाताओं को डराने-धमकाने नहीं देंगे। तृणमूल उम्मीदवार ने कहा, “यह बंगाल है; अगर वह (शर्मा) ‘सिंघम’ हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं। फाल्टा में भाजपा की ओर से तैनात उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों की किसी भी तरह की धमकी या दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “वे (अर्धसैनिक) बल के साथ आए और मुझ पर तथा मेरे लोगों पर दबाव डालने की कोशिश की। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे कृत्य स्वीकार्य नहीं हैं।”
चुनाव आयोग के अधिकारी ने क्या कहा?
चश्मदीदों के मुताबिक शर्मा सोमवार देर रात खान के आवास पर पहुंचे थे और कहा था कि अगर मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोई शिकायत मिलती है, तो अधिकारी तत्काल कठोर कदम उठाएंगे। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि आयोग को खबर मिली थी कि खान के समर्थक फाल्टा में लोगों से कथित तौर पर उनके मतदाता पहचान पत्र एकत्र कर रहे थे और उन्हें धमका रहे थे, जिसके बाद शर्मा ने क्षेत्र का दौरा किया।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों को झूठा करार दिया और मांग की कि शर्मा मतदाताओं को डराए-धमकाए जाने के सबूत पेश करें। अधिकारियों ने बताया कि शर्मा उन 95 पर्यवेक्षकों में शामिल हैं, जिन्हें निर्वाचन आयोग ने बंगाल में दूसरे चरण के चुनाव में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया है। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और दबंग पुलिस अधिकारी के रूप में जाने जाने वाले शर्मा के सोमवार रात खान के आवास पर पहुंचने से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें उन्हें मतदान के दिन हिंसा और धमकी का सहारा लेने वालों को कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देते हुए देखा जा सकता है।
वायरल हो रहा आईपीएस का वीडियो
वीडियो में आईपीएस अजय पाल शर्मा को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है, “यहां मौजूद सभी लोगों को यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेनी चाहिए : जो भी व्यक्ति उपद्रव करेगा, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।” वीडियो में शर्मा तृणमूल नेता जहांगीर खान के आवास पर पहुंचकर यह कथित टिप्पणी करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं, “जहांगीर (खान) के परिवार के सदस्य भी यहां मौजूद हैं। उन्हें बताएं कि उनके सहयोगियों की ओर से लोगों को डराए-धमकाए जाने की लगातार खबरें मिल रही हैं। अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो हम उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे। बाद में शिकायत करने या खेद जताने के लिए मत आना।”
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों ने शर्मा और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आईपीएस अधिकारी निर्वाचन आयोग के प्रत्यक्ष समर्थन से अपनी निर्धारित भूमिका से परे जाकर काम कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा, “मीडिया ने उन्हें ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ नाम दिया है। हमें आश्चर्य होता है कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले राज्य के ऐसे पुलिस अधिकारी यहां क्या कर रहे हैं? वह पुरुष सदस्यों की गैरमौजूदगी में किसी के घर जाकर महिलाओं को धमकी कैसे दे सकते हैं? क्या उन्हें बिना किसी सबूत के लोगों को गिरफ्तार करने का जिम्मा सौंपा गया है?”
मंत्रियों ने भी उठाए अधिकारी के रवैए पर सवाल
मंत्री ने कहा, “निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पर्यवेक्षक केवल आयोग की आंखें और कान होते हैं, जिनका काम अवलोकन करना और रिपोर्ट देना होता है, न कि आयोग के हाथ-पैर। हम उनके पिछले रिकॉर्ड से वाकिफ हैं, जिसमें महिलाओं की ओर से उनके खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायतें भी शामिल हैं।” भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पर्यवेक्षक (शर्मा) की कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करती है और पार्टी निर्वाचन आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराएगी।”
राज्य सरकार में मंत्री अरूप बिस्वास ने निर्वाचन आयोग पर अपने ही नियमों का उल्लंघन करने और भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों से तटस्थ रहने की उम्मीद की जाती है। संवैधानिक सीमाओं से परे काम करने या किसी विशेष पार्टी को निशाना बनाने के किसी भी प्रयास को कानूनी रूप से चुनौती दी जाएगी।” बिस्वास ने कहा कि वे ऐसे व्यवहार कर रहे हैं, जैसे वे युद्ध लड़ रहे हों, अर्धसैनिक बलों के जवानों और बख्तरबंद वाहनों से मतदाताओं को डरा रहे हैं।
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पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग शुरू होने वाली है। अब चुनाव की लड़ाई उत्तर के सीमावर्ती इलाकों से हटकर दक्षिण के ज्यादा आबादी वाले शहर और औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंच गई है। भले ही मुख्य मुकाबला तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है, लेकिन एक और अहम चीज नतीजों पर असर डाल सकती है। वह है वाम दलों और कांग्रेस के गठबंधन के बचे हुए वोट, जिन्हें 2021 के बाद अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। पढ़िए पूरी खबर…
