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6 हजार करोड़ की ‘अटल भूजल योजना’ अप्रैल से हो सकती है शुरू, गिरते भूमिगत जल के स्तर बढ़ाने की होगी कोशिश

देश के कई इलाकों में चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुके भूजल का संरक्षण तथा इसका स्तर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की 6000 करोड़ रूपये की महत्वाकांक्षी 'अटल भूजल योजना' के अप्रैल से शुरू होने के आसार हैं।

Author नई दिल्ली | February 18, 2018 1:26 PM
नितिन गडकरी ने बताया कि ‘अटल भूजल योजना’ करीब करीब मंजूरी के स्तर पर आ गई है। इसे मार्च 2018 तक मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल जायेगी

देश के कई इलाकों में चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुके भूजल का संरक्षण तथा इसका स्तर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की 6000 करोड़ रूपये की महत्वाकांक्षी ‘अटल भूजल योजना’ के अप्रैल से शुरू होने के आसार हैं। जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी ने ‘भाषा’ को बताया कि ‘अटल भूजल योजना’ करीब करीब मंजूरी के स्तर पर आ गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे मार्च 2018 तक मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल जायेगी जिससे इसे एक अप्रैल से लागू किया जा सके। उन्होंने बताया कि इस योजना में केंद्र सरकार और विश्व बैंक की आधी-आधी हिस्सेदारी होगी। इसके अलावा इसमें स्थानीय ग्रामीणों की व्यापक हिस्सेदारी सुनिश्चित की जायेगी।

मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह योजना गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिये प्रस्तावित है। इस योजना के तहत इन प्रदेशों के 78 जिलों, 193 ब्लॉकों और 8350 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है । केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की पिछले वर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 6584 भूजल ब्लॉकों में से 1034 ब्लॉकों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। इन ब्लॉकों के भूजल का वार्षिक उपभोग इनके पुनर्भरण से ज्यादा रहा। सामान्यत: इसे ‘डार्क जोन’ (पानी के संकट की स्थिति) कहा जाता है। इसके अलावा 934 ब्लॉक ऐसे हैं जिनमें पानी का स्तर कम हो रहा है, लेकिन उनका पुनर्भरण नहीं किया जा रहा। ऐसे ज्यादातर ब्लॉक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु में हैं।

जल संसाधन मंत्रालय के आंकड़े के मुताबिक, भारत में जल की प्रति व्यक्ति उपलब्धता वर्ष 1951 में 5177 घनमीटर से घटकर वर्ष 2011 में 1545 घनमीटर तक रह गई। इसका एक प्रमुख कारण वार्षिक जल उपलब्धता (आपूर्ति) से अधिक जल उपभोग (मांग) पर प्रभावी नियंत्रण की कमी का होना है । राष्ट्रीय जल मिशन के तहत 11 राज्यों आंध्रप्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, गुजरात, कर्नाटन, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल को कार्य निष्पादन आधारित जल संचालन के उद्देश्य मॉडल के तौर पर तैयार करने की पहल की गई है ।

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