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Vyom Mitra Robot: अंतरिक्ष में ह्मयूनॉयड से बड़ी छलांग

व्योममित्र अंतरिक्ष में एक मानव शरीर के क्रियाकलापों का अध्ययन करेगा। इस रोबोट को हाफ ह्यूमनॉइड कहा जा रहा है क्योंकि इसके पैर नहीं हैं। यह रोबोच केवल आगे और बगल में झुक सकता है। यह अंतरिक्ष में कुछ परिक्षण करेगा और इसरो के कमांड सेंटर से संपर्क में रहेगा।

Author Updated: January 28, 2020 1:44 AM
रोबोट ‘व्योममित्र’

Vyom Mitra Robot: भारतीय अतंरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने प्रायोगिक रूप से भेजे जाने वाले मानव रहित गगनयान में महिला रोबोट ‘व्योममित्र’ को भेजने का एलान किया है। हाल में इसरो ने इसके बारे में दुनिया को बताया और इसकी तस्वीरें जारी कीं। बंगलुरु में ‘मानव अंतरिक्षयान और खोज: वर्तमान चुनौतियां तथा भविष्य घटनाक्रम’ पर एक सेमिनार में मीडिया के सामने मानव के काम कर पाने में सक्षम इस रोबोट (ह्यूमनॉयड) व्योममित्र ने अपना परिचय दिया तो सब चकित रह गए।

भारत दिसंबर 2021 में अंतरिक्ष में अपना पहला मानव मिशन भेजने की योजना पर काम कर रहा है। इसके पहले चरण के तहत व्योममित्र को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी है। इसरो प्रमुख के सिवन के मुताबिक, ह्यूमनॉयड अंतरिक्ष में इंसानों की तरह काम करेगी और जीवन प्रणाली के संचालन पर नजर रखेगी। सिवन ने कहा कि यह अंतरिक्ष में इंसानों की तरह काम करेगी। यह जांच करेगी कि सभी प्रणालियां ठीक ढंग से काम कर रही हैं या नहीं।

इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा संचालित इस ह्यूमनॉयड व्योममित्र ने कुछ इस तरह से अपना परिचय दिया। रोबोट ने कहा, ‘सभी को नमस्कार। मैं व्योममित्र हूं और मुझे अर्ध मानव रोबोट के नमूने के रूप में पहले मानवरहित गगनयान मिशन के लिए बनाया गया है।’ मिशन में अपनी भूमिका के बारे में व्योममित्र को वैज्ञानिकों ने यह कहते हुए दिखाया, ‘मैं पूरे यान के मापदंडों पर निगरानी रखूंगी, आपको सचेत करूंगी और जीवनरक्षक प्रणाली का काम देखूंगी। मैं स्विच पैनल के संचालन सहित विभिन्न काम कर सकती हूं…।’ वह अंतरिक्ष यात्रियों की अंतरिक्ष में साथी होगी और उनसे बात करेगी। वह अंतरिक्ष यात्रियों की पहचान करने सहित उनके सवालों का जवाब देगी।

दिसंबर 2021 में भारत के मानव मिशन को अंतरिक्ष में भेजने से पहले इसरो दो मानव रहित मिशन क्रमश: दिसंबर 2020 और जून 2021 में भेजेगा। व्योममित्र उसी मिशन का हिस्सा है। इसरो के वैज्ञानिक सैम दयाल के मुताबिक, यह ह्यूमनॉयड एक इंसान की तरह काम करेगा और इसरो को वहां की जानकारियां मुहैया कराएगा। फिलहाल इसरो एक प्रयोग के रूप में इस व्योम मित्र का उपयोग कर रहा है। सैम दयाल ने कहा, ‘व्योममित्र अंतरिक्ष में एक मानव शरीर के क्रियाकलापों का अध्ययन करेगा और हमारे पास रिपोर्ट भेजेगा। हम इसे एक परीक्षण के रूप में अंजाम दे रहे हैं।’

दरअसल, भारत के ‘गगनयान’ मिशन का उद्देश्य न केवल अंतरिक्ष में भारत का पहला मानवयान भेजना है, बल्कि निरंतर अंतरिक्ष मानव उपस्थिति के लिए नया अंतरिक्ष केंद्र स्थापित करना भी है। यह काम तीन चरणों में होगा। दिसंबर 2020 और जून 2021 में दो मानवरहित मिशन और उसके बाद दिसंबर 2021 में मानवयुक्त अंतरिक्ष यान।

सिवन के मुताबिक, केवल मानव जीवन विज्ञान और जीवन रक्षा प्रणाली जैसे तत्व की कमी है जिसे अब हम विकसित कर रहे हैं। नए अंतरिक्ष केंद्र के संबंध में इसरो ने भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए बंगलुरु के पास अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया है। इसरो ने नासा और अन्य अंतरिक्ष एजंसियों एवं विभिन्न संस्थाओं से बात शुरू की है कि कैसे वह मानवयुक्त अंतरिक्षयान पर साथ मिलकर काम कर सकती है और कैसे उनके अनुभव से सीखा जा सकता है। ‘गगनयान’ इसरो के अंतर-ग्रहीय मिशन के दीर्घकालिक लक्ष्य में भी मदद करेगा।

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