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वोटिंग के बाद एक साल तक रखनी होती है VVPAT पर्ची, EC ने 4 महीने में ही करवा दिया नष्ट, उठ रहे सवाल- आखिर इतनी हड़बड़ी क्यों?

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख निर्वाचन अधिकारियों को 24 सितंबर 2019 को एक लैटर जारी कर वीवीपैट पर्चियों को नष्ट करने के निर्देश दिए थे।

नियम के मुताबिक एक साल तक संभाल कर रखनी होती है VVPAT पर्ची। फोटो: Indian Express

वोटिंग के बाद वीवीपैट (वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल) पर्ची को नियम के मुताबिक एक साल तक संभाल कर रखनी होती है लेकिन चुनाव आयोग ने इसे 4 महीने में ही नष्ट करवा दिया। लोकसभा चुनाव 2019 की वीवीपैट पर्चियों को आयोग ने नष्ट करवा दिया है। ऐसा बीते साल मई में घोषित किए गए चुनाव परिणाम के चार महीने बाद कर दिया गया। ‘द क्विंट’ को एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी हासिल हुई है। आरटीआई के जवाब में दिल्ली के निर्वाचन विभाग के पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर ने इस बात की पुष्टि की है।

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख निर्वाचन अधिकारियों को 24 सितंबर 2019 को एक लैटर जारी कर वीवीपैट पर्चियों को नष्ट करने के निर्देश दिए थे। अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक जब एक साल तक इन पर्चियों को नष्ट नहीं किया जा सकता तो आखिर किस हड़बड़ी में ऐसा किया गया?

वीवीपीएट व्यवस्था के तहत वोटर डालने के तुरंत बाद एक पर्ची निकलती है। इस पर जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है, उनका नाम और चुनाव चिह्न छपा होता है। अगर ऐसा नहीं होता तो मतदाता तुरंत चुनाव अधिकारी को इस संबंध में सूचित कर सकता है। यानि कि मतदाता के लिए अपनी बात को सिद्ध करने के लिए यह पर्ची एक सबूत के तौर पर काम करती है लेकिन इनके नष्ट हो जाने के बाद अब कोई भी अपनी बात को सिद्ध नहीं कर सकता। पर्चियों के नष्ट होने के बाद वह संभावित सबूत भी मिट गए हैं।

‘द क्विंट’ की रिपोर्ट में कानूनी विशेषज्ञों ने चुनाव आयोग के इस फैसले को नियमों के खिलाफ बताया है। विशेषज्ञों ने कहा है कि चुनाव आयोग को इस हड़बड़ी के पीछे की वजहों को उजागर करना होगा। विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि असामान्य परिस्थितियों में ही ईसी के पास ऐसा करने का अधिकार है लेकिन आयोग को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।

वहीं चुनाव के दौरान राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मणीपुर, मेघालय और आंध्र प्रदेश में ईवीएम और वीवीपैट के ‘बेमेल’ पर्चियों से जुड़े 8 मामलों को चुनाव आयोग ने संज्ञान में ले रखा है। इस पर जांच चल रही है। क्विंट ने इसपर जुलाई 2019 में आरटीआई के तहत आयोग से जानकारी मांगी थी जिसपर नवंबर में जवाब मिला था। आयोग ने अपने जवाब में कहा था कि ईसी की टेक्नीकल एक्सपर्ट्स कमेटी अभी भी मालमों की जांच कर रही है इसलिए सूचनाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती है। अब सवाल यह है कि क्या इन पर्चियों को भी नष्ट कर दिया गया है या नहीं। बहरहाल इस मामले में ईसी ही सब स्पष्ट कर पाएगा कि आखिर क्यों और किन असामान्य परिस्थितियों में पर्चियों को नष्ट करने के निर्देश दिए गए।

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