महाराष्ट्र में मंदिरों में चोरी के आरोपों को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ है, उसकी शुरुआत शायद एक छोटी-सी शिकायत से हुई थी। शिकायत यह थी कि मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर के कुछ कर्मचारी श्रद्धालुओं से पैसे लेकर उन्हें वीवीआईपी दर्शन की लाइन में भेज रहे थे। इस मामले की जांच के दौरान ही आगे का विवाद सामने आया।
इस कथित घोटाले में शामिल रकम लगातार बढ़ती जा रही है, क्योंकि विपक्ष को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक अवसर नजर आ रहा है। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे का कहना है कि हर साल 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी की जाती है।
महाराष्ट्र के सबसे धनी और सबसे ज्यादा दर्शनीय स्थलों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर के अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को पकड़ लिया गया है और चोरी पर रोक लगा दी गई है। सिद्धिविनायक मंदिर में प्रतिदिन हजारों और त्योहारों के दौरान लाखों लोग आते हैं।
सीसीटीवी फुटेज खंगाली
मंदिर के न्यासी राहुल लोंढे ने बताया कि 2023 के अंत में मंदिर का कार्यभार संभालने वाले वे और अन्य न्यासी सदस्य वीआईपी दर्शन के लिए पैसे लेने वाले कर्मचारियों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे थे, तभी उन्हें कथित चोरी का पता चला। लोंढे ने कहा, “हमने कई सीसीटीवी कैमरों की जांच की और पाया कि कुछ कर्मचारी दान पेटी से पैसे चुरा रहे थे। हमने पुलिस को सूचना दी और उन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।”
उन्होंने आगे कहा कि इस साल की शुरुआत में संदेह फिर से बढ़ गया क्योंकि न्यासी इस तथ्य से हैरान थे कि भक्तों की संख्या में बढ़ोतरी के बावजूद दान संग्रह स्थिर बना हुआ था। शिव सेना नेता और ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सर्वंकर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने और एक दूसरे ट्रस्टी भास्कर शेट्टी ने एंटी-करप्शन ब्यूरो से मदद लेने का फैसला करने से पहले कई महीनों तक दान के आंकड़ों पर नजर रखी। उन्होंने कहा, “उस समय ब्यूरो के इंचार्ज रहे विश्वास नांगरे-पाटिल ने हमें चोरी की संभावना की जांच करने के लिए कुछ लोग दिए।”
निगरानी बढ़ा दी गई
सदा सर्वंकर ने बताया कि शुरुआत में उन्हें कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला, लेकिन जांचकर्ताओं की सलाह पर उन्होंने अपनी निगरानी बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि ध्यान साप्ताहिक दान की गिनती की प्रक्रिया पर केंद्रित किया गया और जल्द ही, एक सत्र के दौरान एक सीसीटीवी कैमरा ढका हुआ पाया गया।
इस साल मार्च में मंदिर के कर्मचारी राजेंद्र पेंडुरकर को पुजारियों के कमरे में रखे दान पेटी से कथित तौर पर नकदी निकालते हुए पकड़ा गया, जबकि अधिकृत प्रतिनिधि अनुपस्थित थे। न्यासियों ने बताया कि आगे की जांच में पता चला कि कई अन्य कर्मचारी भी ऐसा ही कर रहे थे। लोंढे ने कहा, “यह असंभव है कि कोई एक व्यक्ति अकेले इस पर काम कर रहा हो। हमने रैकेट का पता लगाया और आठ अन्य लोगों को पकड़ा। इनके अलावा, जल्दी दर्शन कराने के लिए पैसे लेने जैसी गतिविधियों के लिए 19 अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है।”
20 मार्च को दर्ज की गई थी एफआईआर
इस मामले में दादर पुलिस स्टेशन में 20 मार्च को एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने बाद में 80000 रुपये बरामद किए और सीसीटीवी फुटेज में करीब 10 दिनों तक एक छोटे से दान पेटी से बार-बार नकदी निकालते हुए लोगों को देखा गया। गिरफ्तार किए गए आठों लोग जमानत पर रिहा हैं और उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।
ट्रस्ट का मानना है कि पकड़े जाने से पहले यह रैकेट कम से कम छह महीने से चल रहा था। लोंढे ने बताया कि यह नतीजा उन्होंने घोटाले के सामने आने के बाद दान की रकम में हुई बढ़ोतरी को देखकर निकाला।
कागजी तौर पर चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया जटिल है। बुधवार को लगभग 30 चंदा पेटियां खोली जाती हैं। प्रत्येक पेटी पर वित्तीय अधिकारी और कार्यकारी अधिकारी के साइन होते हैं। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में उसे खाली किया जाता है, चुनिंदा कर्मचारियों, सरकार द्वारा नियुक्त डिप्टी एग्जीक्यूटिव ऑफिसर और बैंक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में उसकी गिनती की जाती है और आखिरकार में नकदी तुरंत बैंक में जमा कर दी जाती है।
मंदिर द्वारा 18 करोड़ रुपये की वार्षिक चोरी के आंकड़े को चुनौती दी गई है, और यह आंकड़ा न तो 20 मार्च की एफआईआर में है और न ही आरोपपत्र में। राज ठाकरे का तर्क है कि कथित चोरी का पता चलने से पहले साप्ताहिक दान 50 लाख रुपये से कम था। गिरफ्तारियों और कड़ी निगरानी के बाद, यह कथित तौर पर बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपये हो गया। उनका यह आंकड़ा एक वर्ष में लगभग 1 करोड़ रुपये की साप्ताहिक वृद्धि का अनुमानित आंकड़ा है।
राज ठाकरे ने क्या तर्क दिया
मंदिर प्रशासन सालाना 18 करोड़ रुपये की चोरी की बात को नहीं मानता है, न तो यह आंकड़ा 20 मार्च की एफआईआर में है और न ही चार्जशीट में। राज ठाकरे का तर्क है कि कथित चोरी का पता चलने से पहले हर हफ्ते मिलने वाला दान 50 लाख रुपये से कम था।
गिरफ्तारियों और कड़ी निगरानी के बाद, यह कथित तौर पर बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपये हो गया। उनका यह आंकड़ा एक साल में लगभग 1 करोड़ रुपये की साप्ताहिक बढ़ोतरी का अनुमानित आंकड़ा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामला अब सुलझ चुका है। दादर पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “हमने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, सभी ने 10000 रुपये की हेराफेरी की थी। चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। अगर मंदिर ट्रस्ट को लगता है कि मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए, तो वे अदालत का रुख कर सकते हैं।”
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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के मशहूर सिद्धिविनायक मंदिर में दान की चोरी की बात कही जा रही है। यह दावा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को किया है। उन्होंने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को भेजे गए एक पत्र का हवाला भी दिया। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
