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राष्‍ट्रपति पुतिन स्‍वागत में वक्‍त बर्बाद नहीं कर रहे, पीएम नरेंद्र मोदी संग घंटों चली बातचीत

रूस की तरफ से गुाजरिश की गई थी कि बातचीत पर ज्‍यादा समय दिया जाए, न कि स्‍वागत-सत्‍कार में। पुतिन और मोदी के बीच गुरुवार (4 अक्‍टूबर) को डिनर पर करीब तीन घंटे तक बातचीत चली थी।

Author October 6, 2018 2:51 PM
रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo : PTI)

भारत आए रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन यहां पर वस्‍तु एवं सेवा कर को लागू किए पाने की प्रक्रिया समझने को आतुर दिखे। पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर काफी देर तक चर्चा की। पिछले दौरों से अलग, इस बार भारत आए पुतिन को परंपरागत स्‍वागत-सत्‍कार नहीं मिला। अफवाह थी कि पुतिन के शासकीय दौरे को निम्‍न श्रेणी में कर दिया गया है, इसलिए ऐसा हुआ। हालांकि साउथ ब्‍लॉक ने साफ कहा कि ऐसा क्रेमलिन (रूस की राजधानी) के कहने पर किया गया। रूस अनौपचारिक वार्ता चाहता था जिसमें कोई तामझाम न हो।

रूस की तरफ से गुाजरिश की गई थी कि बातचीत पर ज्‍यादा समय दिया जाए, न कि स्‍वागत-सत्‍कार में। पुतिन और मोदी के बीच गुरुवार (4 अक्‍टूबर) को डिनर पर करीब तीन घंटे तक बातचीत चली थी। शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल स्‍तरीय वार्ता से पहले, दोनों नेताओं के बीच डेढ़ घंटे बातचीत हुई। सोची में, दोनों नेताओं ने छह घंटे तक वार्तालाप किया था जबकि दिल्‍ली में साढ़े चार घंटे तक दोनों नेता विभिन्‍न विषयों पर चर्चा करते रहे।

भारत और रूस ने शुक्रवार को लंबी दूरी तक सतह से हवा में मार करने वाली एस-400 ट्रियंफ की आपूर्ति के सौदे को अंतिम रूप दे दिया। इससे भारतीय वायुसेना की हवाई रक्षा क्षमता को पर्याप्त बढ़ावा मिलेगा। 19वें भारत-रूस वार्षिक द्विपक्षीय शिखर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच 5.4 अरब डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) का यह सौदा हुआ। दोनों नेताओं ने मीडिया के समक्ष अपने बयानों में हालांकि इसका कोई जिक्र नहीं किया। अमेरिका द्वारा भारत को इस सौदे को न करने का दवाब डालने से इसकी संवेदनशीलता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दोनों नेताओं द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, “सतह से लंबी दूरी तक हवा में वार करने वाली ‘एस-400 प्रणाली’ भारत को देने के समझौते का दोनों देशों ने स्वागत किया।” मीडिया को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारत-रूस संबंध अद्वितीय हैं और राष्ट्रपति पुतिन ने व्यक्तिगत रूप से इसमें योगदान किया है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश अफगानिस्तान, हिंद-प्रशांत क्षेत्र और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), ब्रिक्स, जी-20, और एसियाई देशों में एक बहुध्रुवीय और बहुपक्षीय दुनिया के लिए काम करने के अतिरिक्त आतंकवाद के खिलाफ काम करने के लिए सहमत हुए हैं।

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