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बंगाल की सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने मोदी सरकार से मांगी CISF की सुरक्षा, कहा- TMC की वफादार है स्थानीय सिक्योरिटी

हाल के वक्त में विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों व कर्मचारियों के टकराव की घटनाओं का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर विद्युत चक्रवर्ती ने पिछले महीने चिट्ठी लिखकर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से यह मांग की है। इस लेटर की एक कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजी गई है।

विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने केंद्र सरकार से CISF की सुरक्षा की मांग की। (indian express photo)

पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती यूनिवर्सिटी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इसके कैंपस में सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के जवानों की स्थाई तैनाती कर दी जाए। हाल के वक्त में विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रों व कर्मचारियों के टकराव की घटनाओं का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर विद्युत चक्रवर्ती ने पिछले महीने चिट्ठी लिखकर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से यह मांग की है। इस लेटर की एक कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजी गई है।

बता दें कि राष्ट्रपति विश्व भारती यूनिवर्सिटी के विजिटर जबकि प्रधानमंत्री इसके चांसलर हैं। बताया जा रहा है कि केंद्र को लिखी चिट्ठी में वीसी चक्रवर्ती ने कहा कि वर्तमान में यूनिवर्सिटी परिसर में तैनात स्थानीय सुरक्षाकर्मी का जुड़ाव ‘तृणमूल के स्थानीय बॉसेज’ से है और वे विश्व भारती के सिक्योरिटी अफसर के आदेशों की अवहेलना करते हैं। वीसी के मुताबिक, खामियों के लिए जब सुरक्षाकर्मियों को टोका जाता है तो स्थानीय तृणमूल नेता उनको बचाने के लिए आ जाते हैं।

चक्रवर्ती ने इस साल मई में आवेदन पत्रों की कीमत में इजाफे के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन का हवाला दिया है। छात्रों ने इस मुद्दे पर धरना दिया था और फैकल्टी मेंबर्स और अफसरों को यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर जाने से रोक लिया था। वाइस चांसलर का आरोप है कि इस तरह की घटनाओं के दौरान सुरक्षाकर्मी ‘मूकदर्शक’ बन जाते हैं और कभी कभी तो प्रदर्शनकारियों के पक्ष में माहौल बना देते हैं।

सूत्रों की मानें तो विश्व भारती प्रशासन की इस मांग पर केंद्र सरकार विचार कर रही है। मानव संसाधन मंत्रालय इस बारे में सीआईएसएफ से बातचीत कर सकता है। बता दें कि वर्तमान में किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय में अर्धसैनिक बल या पुलिसवालों की स्थाई तैनाती नहीं है।

हालांकि, ऐसी मांग पहले भी हो चुकी है। 2017 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसी ही मांग की गई थी। दावा किया गया था कि इतने बड़े कैंपस की सुरक्षा संभालने के लिए पर्याप्त लोग नहीं हैं। हालांकि, यह मांग अभी भी लंबित है। शिक्षण संस्थानों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। इसे अक्सर असहमति और छात्र प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है।

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