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विश्वभारती ने वापस ली RSS से जुड़े मंच के साथ वर्कशॉप की मंजूरी, कहा- मालूम नहीं था कि संघ और ABVP से जुड़ा है संगठन

सूत्रों ने बताया कि बाद में मंच और विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'राष्ट्रीय कला-संस्कृति-संचार वर्कशॉप' को बोलपुर शहर में एक निजी बैंक्वेट हॉल में स्थानांतरित कर दिया गया

RSSतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

पश्चिम बंगाल में विश्वभारती यूनिवर्सिटी के पदाधिकारियों ने रविवार (20 अक्टूबर, 2019) को एक बयान में कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय कला मंच संग एक सांस्कृतिक वर्कशॉप की अपनी मंजूरी को वापस ले लिया है। राष्ट्रीय कला मंच आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ा है। विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि जब उन्होंने दो दिवसीय कार्यक्रम को मंजूरी दी तब संगठन की पृष्ठभूमि की जानकारी नहीं थी। एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक विश्वविद्यालय में छात्रों एक वर्ग ने कार्यक्रम के जरिए भगवाकरण का आरोप लगाते हुए इसका बहिष्कार करना शुरू कर दिया।

द टेलीग्राफ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि विवाद की शुरुआत बीते शनिवार से ही हो चुकी थी। अखबार ने विश्वभारती के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर अनिर्बान सिरकार (PRO) के हवाले से बताया, ‘वर्कशाप में हमें ऐसे संगठन के जुड़े होने की जानकारी नहीं थी। जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली हमने पत्रकारिता विभाग को विश्वविद्यालय में ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं होने को कहा।’ सिरकार ने आगे कहा कि विश्वभारती अपने कैंपस में राजनीतिक पृष्टभूमि से जुड़े किसी भी संगठन को कार्यक्रम की अनुमति नहीं देगा।

सूत्रों ने बताया कि मंच और विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘राष्ट्रीय कला-संस्कृति-संचार वर्कशॉप’ को बोलपुर शहर में एक निजी बैंक्वेट हॉल में स्थानांतरित कर दिया गया था। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा, ‘यूनिवर्सिटी को मंच के स्वरूप के बारे में तब पता चला जब सीपीएम की छात्र इकाई एसएफआई से वाइस चांसलर बिदयुत चक्रवर्ती को इस बाबत पांच अक्टूबर को एक पत्र भेजा। पत्र में कैंपस को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई अगर कार्यक्रम को परिसर में आयोजित करने की मंजूरी दी गई।’

उल्लेखनीय है कि रविवार को विश्वविद्याल प्रशासन के कदम का सीपीआई छात्र इकाई ने स्वागत किया है। संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में राजीति का भगवाकरण का मुकाबला करने के लिए यह सकारात्मक कदम है। विश्वभारती में एसएफआई नेता सोमनाथ सॉ ने कहा, ‘हम कार्यक्रम को रद्द करने के चलते प्रशासन के इस कदम का स्वागत करते हैं। अगर आगे ऐसा होता है कि हम निश्चित रूप से इसका विरोध करेंगे।’

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