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भारत-रूस संबंध : दिखने लगे राजनाथ की मास्को यात्रा के लाभ

कूटनीतिक आयाम: विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक भारत की कोशिश है कि रूस के साथ संबंधों में रक्षा सौदों से आगे बढ़कर नए आयाम लाए जाएं। हिंद-प्रशांत रणनीति को लेकर भारत से ज्यादा चीन और रूस करीब हैं। ऐसे में भारत और रूस में बातचीत बेहद जरूरी है। भारत चाहेगा कि रूस चीन पर थोड़ा दबाव बनाए कि लद्दाख में चीन शांत रहे। मॉस्को में तैनात भारतीय राजदूत ने रूस के सामने भारत की चिंताएं कुछ वक्त पहले रखी थीं और रूस ने भरोसा दिया था कि चीन के साथ भारत का विवाद यदि बढ़ता है तो उसे शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की तमाम कोशिशें की जाएंगी।

Author Published on: June 30, 2020 4:50 AM
Defense Minister Rajnath, Russia visit, Moscow,हाल ही में रूस के दौर पर गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मास्को में सेना के मार्चपास्ट की सलामी ली।

भारत के प्रति रूस ने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी है। भारत-चीन के बीच जारी तनाव के बावजूद रूस ने भारत का साथ दिया है। रूस ने चीन की अपील न मानते हुए साफ कर दिया है कि भारत के साथ जारी रक्षा सौदों को वह जल्द से जल्द पूरा करेगा। दोनों देशों के बीच यह सहमति रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाल के रूस दौरे में बनी है। रूस तय समय पर एके-203 असॉल्ट राइफल, कामोव-226टी लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर और मिसाइल सिस्टम एस-400 की आपूर्ति करने के लिए तैयार है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस की 75वीं विक्ट्री डे परेड (नाजी जर्मनी पर सोवियत रूस की जीत का उपलक्ष्य) में हिस्सा लेने के लिए मॉस्को गए थे। वहां उनकी रूस के उप प्रधानमंत्री युर्य बोरिसव और रूसी रक्षा मंत्रालय के अहम ओहदेदारों के साथ कई दौर की बातचीत हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके साथ गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूस से साफ कर दिया कि उसे रक्षा सौदों में अब देरी नहीं करनी है।

रक्षा मंत्री रूस से यह आश्वासन लेने में कामयाब रहे कि अगले कुछ महीनों में विभिन्न सौदों को मूर्त रूप दे दिया जाएगा। रूस के दौरे के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा भी कि सभी रक्षा सौदे तय समय पर ही पूरे होंगे। सूचनाओं के मुताबिक, चीन के विरोध के बावजूद रूस से रक्षा आपूर्ति समय पर होगी।

रूस ने भरोसा दिया है कि मौजूदा अनुबंधों को जारी रखा जाएगा और कुछ को जल्द आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, मिसाइल प्रणाली एस-400 सौदे को लेकर रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इसकी आपूर्ति तय वक्त पर 2021 के अंत में शुरू हो जाएगी। इसके बाद इस सौदे को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, एके-203 राइफल के सौदे में कुछ प्रगति हुई है, जो दाम के मामले में रुकी हुई थी। ये सौदा साढ़े सात लाख से ज्यादा राइफलों की आपूर्ति को लेकर हुआ है। इसमें से एक लाख आयातित होंगी और 6.71 लाख राइफलें एक संयुक्त उपक्रम के तौर पर उत्तर प्रदेश के कोरवा में इंडो-रूस राइफल प्राइवेट लिमिटेड (आइआरआरपीएल) बनाएगा। 226टी लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर का सौदा वर्ष 2000 से अभी भी अटका हुआ है, लेकिन रूस ने इसे जल्द से जल्द सुलझा लेने का वादा किया है।

मॉस्को रवाना होने से पहले राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट कर उम्मीद जताई थी, ‘तीन दिवसीय यात्रा पर मॉस्को में भारत-रूस रक्षा और सामरिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी।’ रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, ‘चीन के साथ सीमा पर तनाव होने के बावजूद रक्षा मंत्री ने रूस की यात्रा स्थगित नहीं की, क्योंकि रूस के साथ भारत के दशकों पुराने सैन्य संबंध हैं।’

दरअसल, चीन के साथ सीमा विवाद बढ़ने के बाद रूस को साधने की कोशिश भारत ने शुरू की है। जानकारों के मुताबिक, रूस के साथ रक्षा सौदों को भारत लंबे समय से टाल रहा था। बहुउद्देश्यीय हेलिकॉप्टरों के मामले में रूस ने 60 बेचने की और 140 हेलिकॉप्टरों को भारत में बनाने की पेशकश की थी। लेकिन अमेरिकी हेलिकॉप्टरों से वार्ता चल रही थी और रूस से साथ भारतीय अधिकारी मोलभाव करते रहे। 2014 से अब तक कोई फैसला नहीं हो पाया।

जानकारों के मुताबिक, गलवान घाटी झड़प के बाद सेना ने ऐसे हेलिकॉप्टरों की कमी शिद्दत से महसूस की। इसके अलावा एके राइफलें बनाने, सुखोई और मिग विमानों की खरीद की प्रक्रिया भी अटकी हुई है।

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