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प्रेम पर पहरा: हिंदू युवती और मुसलिम युवक की शादी रुकवाई

रसायन विज्ञान में परास्नातक रैना गुप्ता (22) और पेशे से फार्मासिस्ट मोहम्मद आसिफ (24) की शादी की तैयारियां चल रही थी। पुलिस ने दोनों परिवारों को पारा पुलिस थाने बुलाया और उन्हें ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ के बारे में जानकारी दी। पारा इलाके की पुलिस ने इस मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की है।

Author लखनऊ | Updated: December 5, 2020 8:57 AM
crime, crime news, love jihadप्रतीकात्मक तस्वीर।

जब से ‘लव जिहाद’ को लेकर उत्तर प्रदेश में कानून लागू किया गया है तब से युवा-युवती के प्रेम विवाह पर कड़ा पहरा लग गया है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देखने को मिला। जहां पुलिस ने एक हिंदू युवती और मुसलिम युवक की शादी यह कह कर रुकवा दी कि शादी के लिए विधिक नियम कायदों का पालन नहीं किया गया है।

लखनऊ के पारा इलाके में विधिक नियम कायदों का पालन नहीं करने पर पुलिस ने एक हिंदू युवती और मुसलिम युवक का विवाह रुकवा दिया। हालांकि इस मामले में कोई प्राथमिकी दर्ज नही की गई है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) सुरेश चंद्र रावत ने शुक्रवार को बताया, ‘पुलिस को ऐसी सूचना मिली थी कि बुधवार को पारा इलाके की डूडा कॉलोनी में अंतरधार्मिक विवाह हो रहा है। इस पर पुलिस दल वहां पहुंचा तो पाया कि शादी की तैयारियां हो रही थी। पुलिस ने दोनों परिवारों को विवाह के लिए आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करने को कहा जिस पर परिजन राजी हो गए।’

उन्होंने बताया कि रसायन विज्ञान में परास्नातक रैना गुप्ता (22) और पेशे से फार्मासिस्ट मोहम्मद आसिफ (24) की शादी की तैयारियां चल रही थी। पुलिस ने दोनों परिवारों को पारा पुलिस थाने बुलाया और उन्हें ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ के बारे में जानकारी दी। पारा इलाके की पुलिस ने इस मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की है क्योंकि दोनों परिवार शादी टालने को राजी हो गए हैं।

इस अध्यादेश के तहत ऐसे धर्म परिवर्तन को अपराध की श्रेणी में लाया गया है, जो छल, कपट, प्रलोभन, बलपूर्वक या गलत तरीके से प्रभाव डाल कर विवाह करने के लिए किया जा रहा हो। इसे गैर जमानती संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखने और उससे संबंधित मुकदमे को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में विचारणीय बनाए जाने का प्रावधान किया गया है।

अध्यादेश का उल्लंघन करने पर कम से कम एक साल और अधिकतम पांच साल कैद तथा 15,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नाबालिग लड़की, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के मामले में तीन साल से दस वर्ष तक की कैद और 25 हजार रुपए जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में अधिकतम 10 साल की कैद और 50,000 रुपए जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है।

अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के इच्छुक लोगों को जिला अधिकारी के सामने एक निर्धारित प्रारूप में दो माह पहले इसकी सूचना देनी होगी। इजाजत मिलने पर वे धर्म परिवर्तन कर सकेंगे। इसका उल्लंघन करने पर छह माह से तीन साल तक की कैद और दस हजार रुपए जुर्माने की सजा तय की गई है।

अंतर-धार्मिक विवाह के लिए अदालत पहुंचे युवक को गिरफ्तार किया
अलीगढ़ की सिविल लाइंस पुलिस ने अंतर-धार्मिक विवाह के लिए पहुंचे एक युवक को गिरफ्तार किया है। एक युवक बृहस्पतिवार को चंडीगढ़ की युवती के साथ दीवानी न्यायालय में विवाह के लिए पहुंचा, जिसको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इससे संबंधित एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें युवक को कुछ पुलिसकर्मी खींचकर ले जा रहे हैं और युवक अदालत में अपनी पिटाई का आरोप लगा रहा है। वीडियो में युवक पुलिस कार्रवाई के बारे में शिकायत करते हुए खुद का नाम सोनू मलिक बता रहा है और उस लड़की का नाम ले रहा है जिसके साथ उसने विवाह की पहल की है।

जिस युवती के साथ कथित तौर पर भागकर उसने विवाह की योजना बनाई उसे भी महिला पुलिस ने पकड़ लिया। इस संदर्भ में सिविल लाइंस के क्षेत्राधिकारी अनिल समानिया ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि चंडीगढ़ में युवक के खिलाफ युवती को जबरन अपने कब्जे में रखने का मामला दर्ज किया गया है। उन्­होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपी चंडीगढ़ में एक दर्जी के रूप में काम कर रहा था जहां उसने उस युवती से दोस्ती की। उन्­होंने बताया कि चंडीगढ़ पुलिस आरोपी को लेने के लिए यहां पहुंच रही है।

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