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किसान आंदोलन: सिंघु सीमा पर भड़की हिंसा, दो पक्षों में नारेबाजी, पथराव

पुलिस ने एसएचओ पर हमला करने वाले व्यक्ति को हिरासत में ले लिया है। इससे पहले शुक्रवार सुबह नरेला-बवाना के स्थानीय निवासियों ने भी तिरंगा मार्च निकाला था हालांकि पुलिस ने उन्हें नहीं रोका।

सिंघु बार्डर पर पथराव करते लोग और मौके पर जुटी भीड़।

सिंघु बॉर्डर पर किसानों और स्थानीय लोगों के एक बड़े समूह के बीच शुक्रवार को झड़प हो गई, जिसके चलते पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ मुख्य प्रदर्शन स्थलों में शामिल सिंघु बॉर्डर पर हुई झड़प के दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर पथराव भी किया। एक अधिकारी ने बताया कि एक व्यक्ति ने दिल्ली पुलिस के अलीपुर थाना प्रभारी (एसएचओ) प्रदीप पालीवाल पर तलवार से हमला किया, जिससे वह घायल हो गए। साथ ही, कुछ अन्य लोग भी घायल हुए हैं। अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने एसएचओ पर हमला करने वाले व्यक्ति को हिरासत में ले लिया है।

स्थानीय निवासी होने का दावा कर रहे लोगों का समूह सिंघू बॉर्डर को खाली कराने के लिए वहां पहुंचा था। इन लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने (प्रदर्शनकारी किसानों ने) गणतंत्र दिवस पर ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया। डंडों से लैस स्थानीय लोगों का समूह प्रदर्शन स्थल पर पहुंचा और किसानों के खिलाफ नारे लगाते हुए उनसे वहां से जाने को कहा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव भी किए। सिंघू बॉर्डर प्रदर्शन स्थल पर काफी हद तक बाहर से प्रवेश रोका गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का प्रतिरोध करने के लिए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी वहां आ रहे थे।

हालांकि, किसान यूनियन के स्वयंसेवियों ने उन्हें फौरन रोक दिया, जिससे स्थिति ज्यादा उग्र नहीं हो पाई। पंजाब के रहने वाले हरकीरत मान बेनीवाल (21) ने कहा, ‘वे स्थानीय लोग नहीं हैं, बल्कि भाड़े पर बुलाए गए गुंडे हैं। वे लोग हम पर पथराव कर रहे थे और पेट्रोल बम फेंक रहे थे। उन्होंने हमारी ट्रॉली भी जलाने की कोशिश की। हम उनका प्रतिरोध करने के लिए यहां हैं।’

पुलिस ने एसएचओ पर हमला करने वाले व्यक्ति को हिरासत में ले लिया है। इससे पहले शुक्रवार सुबह नरेला-बवाना के स्थानीय निवासियों ने भी तिरंगा मार्च निकाला था हालांकि पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। लोगों ने भी उस वक्त शांतिपूर्ण तरीके से ही मार्च निकाला, लेकिन कुछ देर बाद स्थिति तनावपूर्ण होने लगी।

हिंसा के बाद सिंघू बॉर्डर पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। हरियाणा सीमा में स्थित धरनास्थल से लेकर दिल्ली की सीमा में करीब तीन किलोमीटर तक के दायरे में पांच स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है। हर स्तर में अर्धसैनिक बल और स्थानीय पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है। इनकी संख्या करीब 200 से 250 के बीच है। इस वजह से सिंघू बॉर्डर पर हरियाणा की तरफ से दिल्ली में प्रवेश करना अब बेहद मुश्किल हो गया है।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को किसान संघों की ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। कई प्रदर्शनकारी लाल किला पहुंच गए थे और इस ऐतिहासिक स्मारक में प्रवेश कर गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसकी प्राचीर पर धार्मिक झंडा भी लगाया, जहां देश के प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करते हैं।

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