गुजरात के नर्मदा जिले में रविवार को पांच अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। यह निर्माण वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बताए जा रहे हैं। जिन्होंने गरुडेश्वर में अपने लिए आवंटित सब्सिडी वाली आवासीय भूखंडों पर कथित रूप से नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाए थे। यह इलाका स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से लगभग एक किलोमीटर दूर है।

अधिकारियों के मुताबिक, ये निर्माण आवासीय उपयोग की शर्तों का उल्लंघन करते हुए बनाए गए थे। इस गड़बड़ी का खुलासा इस साल की शुरुआत में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दायर की गई एक याचिका से हुआ, जिसे खुद एक अन्य सरकारी अधिकारी ने दायर किया था।

सार्वजनिक अवकाश के दिन यह तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई। जिन भूखंडों पर ये निर्माण किए गए थे। उन्हें साल 2019 में नर्मदा जिला कलेक्टर आर. एस. निनामा के हस्ताक्षर से जिले के 13 वरिष्ठ अधिकारियों को आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किया गया था।

आवासीय उद्देश्यों के लिए 135 वर्ग मीटर के भूखंडों का आवंटन 37,210 रुपये से लेकर 50,000 रुपये प्रति भूखंड की भारी रियायती दर पर किया गया था। यह कीमत राजस्व विभाग के एक परिपत्र को लागू करने के बाद तय की गई थी, जिसमें 99,255 रुपये के वास्तविक मूल्यांकित बाजार मूल्य में 50 से 75 प्रतिशत की कटौती की गई थी।

‘होम स्टे योजना’

गरुड़ेश्वर में आगामी जनजातीय संग्रहालय से सटे प्रमुख भूखंडों से दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा का सीधा दृश्य दिखाई देता है। आरोप है कि 13 अधिकारियों में से पांच ने निर्धारित समय सीमा के भीतर आवासीय परिसर का निर्माण पूरा करने की “अनिवार्य शर्त” का पालन नहीं किया, जिसके चलते भूखंड स्वतः ही सरकार के अधीन आ गए।

हालांकि, शेष भूखंडों पर न तो आवंटन पत्रों में निर्धारित सामान्य आवासीय निर्माण हुआ था और न ही दो साल की निर्माण समय सीमा का अनुपालन किया गया था। नाम न छापने की शर्त पर वरिष्ठ अधिकारियों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि प्रशासन द्वारा शिकायतों की जांच करने पर छह से 12 शयनकक्षों वाले बहुमंजिला बंगले पाए गए।

इनमें से छह बंगलों का निर्माण पूरी तरह हो चुका था और सातवां निर्माणाधीन था। एक अधिकारी ने कहा, “इन सभी संपत्तियों में व्यावसायिक होमस्टे संचालन के स्पष्ट संकेत मिलते हैं, जो इस क्षेत्र में एक तेजी से बढ़ता हुआ कारोबार है। इनमें से कोई भी सरकारी कर्मचारियों के आवास जैसा नहीं लगता, जैसा कि मूल आवंटन की शर्तों में निर्धारित था। गुजरात के सबसे अधिक देखे जाने वाले पर्यटन स्थलों में से एक से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान व्यावसायिक उद्देश्य को स्पष्ट करता है। प्रशासन के आकलन में प्रारंभिक रूप से ऐसे संकेत मिले हैं कि इन संपत्तियों को किराये पर कमरों वाले होमस्टे के रूप में उपयोग करने के लिए डिजाइन और निर्मित किया गया था। इनमें से अधिकतर में फ्लैट जैसी बुनियादी संरचना भी नहीं थी, कई बाथरूम थे और किचन तक नहीं थे।

यह अनियमितता सबसे पहले आधिकारिक संज्ञान में तब आई जब तत्कालीन कलेक्टर पी.के. जोशी ने सरकारी नियमों और नगर नियोजन संबंधी स्वीकृतियों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। दस्तावेजी साक्ष्य मांगने वाले आरटीआई आवेदनों से सटीक रिकॉर्ड सामने आए, जिसके बाद तत्कालीन जिला कलेक्टर संजय मोदी ने विस्तृत जांच का आदेश दिया। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर मोदी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इमारतों को गिराने का निर्देश दिया।

2 फरवरी, 2019 के आवंटन पत्रों में 13 तत्कालीन सेवारत अधिकारियों के नाम थे, जिन्होंने आवासीय उपयोग के लिए रियायती दरों पर भूमि का अनुरोध करते हुए जिला प्रशासन से संपर्क किया था। इनमें से कम से कम पांच राजस्व विभाग से संबंधित पदों पर थे, एक शिक्षा विभाग में था, और एक-एक चुनाव विभाग, सांख्यिकी विभाग और नगर नियोजन विभाग से थे।

इनमें से रविवार को पांच अधिकारियों की संपत्तियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत “किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए” ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि शर्तों का उल्लंघन करने के आरोपी अधिकारियों ने पूरे अभियान के दौरान शांतिपूर्वक सहयोग किया।

दो अधिकारियों डीआरडीए के निदेशक एल.एस. दिंडोर और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बी.डी. बारिया ने प्रशासन के फैसले के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की है, इसलिए रविवार को उनके बंगलों को नहीं तोड़ा गया। अन्य छह अधिकारियों को आवंटित भूखंड पहले ही वापस ले लिए गए थे। नर्मदा कलेक्टर गंगा सिंह और जिला विकास अधिकारी रविंद्रसिंह वाला टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे।

इस बीच, भरूच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने इस कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि कानून को अपना काम करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई चयनात्मक नहीं होनी चाहिए।

वासावा ने कहा कि अगर सरकारी अधिकारियों के मकान नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई जायज़ है और कानून को अपना काम करना चाहिए। हालांकि, एक ही नियम सभी पर लागू होना चाहिए। इलाके में प्रस्तावित पांच सितारा होटल परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर भूमि भराव के आरोप भी उठ रहे हैं, और इसकी भी जांच होनी चाहिए। आरोप हैं कि कुछ निर्माण बिना ज़रूरी अनुमतियों के और यहां तक ​​कि संदिग्ध स्वीकृतियों के आधार पर किए गए हैं। कार्रवाई भेदभावपूर्ण नहीं होनी चाहिए। चाहे अधिकारी हों, व्यापारी हों या आम नागरिक, न्याय और कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए।

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