नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ, आखिरी विडियो में क्या कहा था सुनें

वीडियो में दुआ कहते दिख रहे हैं कि “जब से प्रधान सेवक (पीएम मोदी) को बांग्लादेश में कहते सुना कि उनका भी वहां की आजादी की लड़ाई में योगदान था, वह सोच रहे हैं कि इस हालत में तो प्रधान सेवक को बख्श दो। ठीक होकर उनके बारे में बात कर लेना।”

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वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ। (फोटोः ट्विटर@iChiragJha)

वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ का शनिवार की शाम दिल्ली में निधन हो गया। उनकी बेटी मल्लिका ने इंस्टाग्राम पर इसकी पुष्टि की है। उनका अंतिम संस्कार रविवार को लोधी श्मशान घाट में होगा। बेटी मल्लिका दुआ ने अपने पिता की एक तस्वीर साझा की और लिखा, हमारे निडर और असाधारण पिता, विनोद दुआ का निधन हो गया है। उन्होंने एक अद्वितीय जीवन जिया। दिल्ली की शरणार्थी कॉलोनियों से 42 वर्षों तक वह पत्रकारिता को उत्कृष्टता के शिखर तक बढ़ाते हुए हमेशा सच बोलते रहे। वह अब मेरी मां, उनकी प्यारी पत्नी चिन्ना के साथ स्वर्ग में हैं। वो एक दूसरे के साथ गाना, खाना बनाना, यात्रा करना एक-दूसरे के लिए जारी रखेंगे।

कुछ अर्सा पहले ही 67 वर्षीय दुआ को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस साल की शुरुआत में उन्हें कोरोना संक्रमण भी हुआ था। पिछले हफ्ते जब उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उनकी बेटी मल्लिका ने एक स्वास्थ्य अपडेट भी शेयर किया था। हालांकि उनकी हालत गंभीर बताई जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों का कहना था कि सुधार भी दिख रहा है। शनिवार शाम अचानक उनके निधन की खबर ने सभी को स्तब्ध करके रख दिया। बेटी ने अपनी पोस्ट में इसकी पुष्टि की।

वीडियो में दुआ कहते दिख रहे हैं कि “जब से प्रधान सेवक (पीएम मोदी) को बांग्लादेश में कहते सुना कि उनका भी वहां की आजादी की लड़ाई में योगदान था, वह सोच रहे हैं कि इस हालत में तो प्रधान सेवक को बख्श दो। ठीक होकर उनके बारे में बात कर लेना।” वह यह भी बोले हैं कि “22 दिन से लगातार उन्हें हल्का बुखार है। इसी वजह से वो विनोद दुआ शो नहीं कर पा रहे। एक बार ठीक हो जाएं फिर प्रधान सेवक से अपने रिश्ते के बारे में खुलकर बात करेंगे। तब तक उन्हें दुआएं दें।” ये उनका आखिरी वीडियो बताया जा रहा है।

1947 में भारत-पाक विभाजन से पहले उनका परिवार अब के पाकिस्तान के दक्षिण वजीरिस्तान के एक छोटे से शहर डेरा इस्माइल खान में रहता था, जिसे बाद में तालिबान में तब्दील कर दिया गया। बंटवारे के बाद उनका परिवार मथुरा चला आया। उनका जन्म 1954 में हुआ। उनके पिता सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में थे। विनोद दिल्ली विवि के एलुमनि थे। उन्होंने1980 के दशक में थिएटर भी किए। 1974 में विनोद दुआ ने पहली बार टेलीविज़न पर युवा मंच कार्यक्रम होस्ट किया। 1992 से 1996 तक वह दूरदर्शन पर प्रसारित एक साप्ताहिक वर्तमान मामलों की पत्रिका परख के निर्माता थे। इससे उन्हें काफी ख्याति मिली। वर्ष 2008 में पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट भूमिका के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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