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विनोद दुआ पर एफआईआर करवाने वाले बीजेपी के नवीन कुमार और मार्कण्‍डेय काटजू में करीब 24 घंटे चला ‘ट्विटर युद्ध’

मार्कण्डेय काटजू और नवीन कुनमार ने एक-दूसरे को शकुनि, बकासुर, भस्‍मासुर जैसे विशेषणों तक का इस्‍तेमाल किया। दोनों के समर्थकों ने भी इस 'ट्वीट-युद्ध' में अपना योगदान देने से परहेज नहीं किया।

Author June 8, 2020 10:54 AM
विनोद दुआ पर एफआईआर करवाने वाले बीजेपी के नवीन कुमार और मार्कण्‍डेय काटजू में करीब 24 घंटे चला ‘ट्विटर युद्ध’। (फोटो सोर्स: Vinod Dua Facebook Page)

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्‍डेय काटजू  और बीजेपी प्रवक्‍ता नवीन कुमार के बीच ट्विटर पर जंग छिड़ गई। नवीन कुमार वही नेता हैं, जिनकी शिकायत पर पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ झूठी खबर बताने की एफआईआर हुुुुई है। दोनों ने एक-दूसरे को शकुनि, बकासुर, भस्‍मासुर जैसे विशेषणों तक का इस्‍तेमाल किया। दोनों के समर्थकों ने भी इस ‘ट्वीट-युद्ध’ में अपना योगदान देने से परहेज नहीं किया।

काटजू और कुमार ने एक-दूसरे पर ताने कसते हुए जम कर ट्वीट किए। काटजू के एक ट्वीट पर बीजेपी नेता मेेजर सुरेंद्र पुुुनिया ने लिखा- हे राम! सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज स्वीकार कर रहे हैं कि उन्हें जज रिश्तेदारों ने बनवाया ! इतना बड़ा सच बोलने के लिये या तो हिम्मत होनी चाहिये या पागलपन.. क्या देश की सर्वोच्च न्यायिक इकाई में भी भ्रष्टाचार और भाई भतीजावद घुसा हुआ है? क्या होगा देश का?

नवीन कुमार ने अपने सहयोगी नेता को जवाब दिया-प्रिय @MajorPoonia जी ये शकुनि जी (@mkatju) ने अपने पाप ऐसे ही नहीं स्वीकारें,पूरे दिन मुझे अपने रिश्तेदार जैसे मारीच, भस्मासुर, मायासुर, मंथरा, महिषासुर, बकासुर के नामों से पुकारते रहे लेकिन हम ठहरे हनुमान जी दरबारी। बस हमारी संगत में रहे तो सच बोलने लगे। आगे भी रहे तो अच्छा होगा।

पुनिया का कमेंट काटजूू के इस ट्वीट पर था- चलिए मान लीजिये मेरे रिश्तेदारों ने मुझे जज बनाया। अब बताइये अच्छे दिन कब आ रहे हैं ? कब तक जनता में त्राहि त्राहि मची रहेगी ? काटजू ने यह जवाब नवीन कुमार को दिया था।

नवीन ने कहा था- शकुनि जी, अब असुरों की संस्तुति पर जज नहीं बनाए जाते हैं। अब योग्यताओं के आधार पर जज नियुक्त होते हैं न कि रिश्तेदारों की चाकरी करने से। जब न्यायाधीश निष्पक्ष हो तो दिन अच्छे होते हैं। बेरोज़गार चाटुकारों के अच्छे दिन अब कभी नहीं आयेंगे। ये घर्मराज की सत्ता है धृतराष्ट्र की नहींं।

नवीन कुमार ने काटजूू से यह भी कहा- शायद आप 2019 का चुनाव भूल गए 300 पार अच्छे दिनों का ही संकेत है ।

काटजू ने नवीन कुमार के लिए लिखा- हे बकासुर जी इधर उधर की बात न करके यह बताएं कि आपका तथाकथित धर्मराज भस्मासुर कैसे बन गया जो मुल्क को तबाही की ओर ले जा रहा है? इस पर नवीन कुमार ने जवाब दिया- आप ये स्पष्ट हो जाइये की आपको जानना क्या है? कन्फ्यूजन नेताओं की चाकरी करते-करते आप खुद भी कन्फ्यूज हो चुके हैं।

दोनों के बीच बहस रुक-रुक कर, लेकिन काफी लंबी चली। एक अंतराल के बाद काटजू ने फिर ट्वीट किया- @naveenjindalbjp : मायासुर जी, चुप क्यों हैं? बताइये ना I अच्छे दिन कब आ रहे हैं?

नवीन ने जवाब दिया- महाराज शकुनि सुनिए।मैं एक #COVIDー19 के मरीज़ के दिल्ली के अस्पताल में बिस्तर तलाश में थोड़ा सा क्या व्यस्त हुआ, आप असुर परिवार की भाँति व्याकुल हो गये। मुझको मरीज़ के लिए Sleeping accommodation तलाशना भी इसलिए पड़ा चूँकि आप ही भाँति @ArvindKejriwal भी असहिष्णु व्यक्ति है।ख़ैर मुझको Block नहीं करना।

इस पर काटजू का जवाब- महिषासुर जी, आपके आक़ा ने पूरे मुल्क को बदहाल करके अस्पताल में डाल दिया है. मगर आप केवल एक मरीज़ के चक्कर में पड़े हैं I धन्य हैं आप।

नवीन की टिप्‍पणी- शकुनि जी, आपका सामान्य ज्ञान @0ffice0ffRG or @priyankagandhiके बराबर ही है। आपको इतना ज्ञान तो होगा ही कि @ArvindKejriwal आपके आक़ा हो सकते हैं, मेरे नहींं। काटजू बोले- मंथरा जी, तू इधर उधर की न बात कर, यह बता क़ाफ़िला क्यों लुटा?

नवीन का एक और ट्वीट- शकुनि जी, आप मुझे ये बताइए कि आप अपने रिश्तेदारों के नामों से मुझे क्यों कर रहे हैं? कभी कालनेमि, कभी मंथरा, कभी मारीच तो कभी भीष्म पितामह! पहले ये बताईये ना आपको जज किसने और कैसे बनाया? प्लीज़ अब बता दीजिए अब तो आप सेवानिवृत्ति और सत्ता का सुख भी भोख चुके हो।

इस बहस में दोनों पक्ष के समर्थक भी कूद गए। Anshuman Mani Tripathi @anshuman_mani ने लिखा- मार्कण्डेय काटजू भले ही अपने रिश्तेदारों की सिफारिश से जज बने पर इनके असली वाले “रिश्तेदार” तो पाकिस्तान में हैं, तभी तो जिन इमरान खान को पाकिस्तानी मीडिया तालिबानी खान कहता रहा, उस इमरान खान को काटजू साहब ने नोबेल शांति पुरस्कार देने की मांग की थी।

Ajitpandey @Ajitpan81693849 ने कमेंट किया- न्यायपालिका से सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। उनके मुख और कलम पर कोई लगाम नहीं है। जब चाहे जो बोलते हैं जब चाहे जो लिखते हैं। धीरे-धीरे उनकी गंभीरता समाप्त होते जा रही है।
Sunil Lal @sunil2819 ने लिखा- 90s के पूर्व,न्यायपालिका में अनियंत्रित भाई भतीजावाद के चलते, बने उ.न्या. के बड़बोले पूर्व न्यायाधीश @mkatju (पुत्र @INCIndia नेताDrKNKatju/भतीजे BNKatju मु.न्या. AlldHC) को गम्भीरता से कौन लेता है।

HINDUSTANI @hindustani_16 ने लिखा- अच्छे दिन आने शुरू हुए है तभी तो आप फुदक रहे हो। जब अंग्रेजों की पार्टी देश में शासन कर रही थी तब कहाँ थे। 370 हटा कर उन कश्मीरी पण्डितों को न्याय दिलवा देते। उन लोगो को नागरिक ही बना देते जो 70 सालों से अपना वोट भी नही डाल पाए। ऐसा बहुत कुछ था लेकिन आपको दिखता नही था।

इतना होने के बाद भी मार्कण्‍डेय काटजू ने फिर ट्वीट किया- हे नरकासुर मैं सिर्फ यह जानना चाहता हूँ कि भारत का क़ाफ़िला क्यों लुटा? इस पर नवीन कुमार ने जवाब दिया-  हे कपटी शकुनि जब से लुटेरे और षड्यंत्रकारी सत्ता से बाहर हुए है तब से वो इसी बात का भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि ख़ज़ाना लुट गया। जिस परिवार की आप चाकरी करते थे वो पूरा ख़ानदान अरबों रुपए के घोटाले में ज़मानत पर हैं और ये ज़मानत आप जैसे जज ने ही दी है।

Girish Chandra LohaniNorth east arrow @GirishC1964 ने काटजू के समर्थन में लिखा- यही बात ध्रतराष्ट्र ने विदुर से पूछी थी। तब भी और आज भी यही उत्तर मिलेगा कि आँख पर भले ही पट्टी बंधी हो पर अपने अंत:करण अपने विवेक पर पट्टी मत बांधो। “धर्मो रक्षति रक्षितः” इसकी व्याख्या आप अपने मर्गदर्शक से पूछ लें क्योंकि अर्जुन के मर्गदर्शक श्री कृष्ण थे और दुर्योधन के शकुनि।

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